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तहसील का दर्जा तो दे दिया, भवन कब दिलाएंगे साहब
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शाहजहांपुर/कलान। विकास की दृष्टि से अति पिछड़े कलान ब्लॉक मुख्यालय को तहसील का दर्जा मिले तीन साल बीत गए, लेकिन क्षेत्रवासियों को तहसील जैसी सुविधाएं अब तक नहीं मिल सकी हैं। चाहे जमीन विवाद हो, फौजदारी के मामलों में सीओ से फरियाद हो या फिर भू संपत्तियों की खरीद-फरोख्त करनी हो, इन सभी कामों के लिए कलान तहसील क्षेत्र के लोगों को आज भी जलालाबाद तक दौड़ लगानी पड़ती है। इसका कारण शासन की अनुमति न मिलने से तहसील समेत अन्य विभागों के निर्माण न होना है।
आजादी के बाद जनपद का गठन होने पर प्रशासनिक लिहाज से कलान को ब्लॉक मुख्यालय बनाया गया था। कस्बे की तहसील जलालाबाद में थी। भौगोलिक दृष्टि से कलान और मिर्जापुर ब्लॉक में शामिल गांव जलालाबाद तहसील से जुड़े होने के कारण वहां के ग्रामीणों को खासी असुविधा का सामना करना पड़ता था। दरअसल, गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों से घिरे इन दोनों विकास खंडों के गांव बरसात में नदियाें का जलस्तर बढ़ने पर टापू बन जाते थे। जब तक प्रशासनिक अमला मदद को पहुंचता था, गांव बर्बादी के मुहाने पर पहुंच जाते थे। वर्ष 2006 और 2011 में आई बाढ़ के बाद यहां के हजारों परिवार विस्थापित हो गए। कटरी के इस इलाके तक विकास पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर सपा शासनकाल में 15 दिसंबर 2016 को इन दोनों विकास खंडों के 212 गांव जलालाबाद से काटकर कलान में नई तहसील बनाने की घोषणा की गई थी।
36 बीघा जमीन का कई स्थानों पर हुआ चयन
कलान में तहसील के मुख्य भवन के साथ ही उप निबंधक कार्यालय, कोतवाली भवन और अन्य विभागों के भवन बनाए जाने हैं। इसके लिए कस्बे से छह किमी दूर गांव सथरा धर्मपुर में 36 बीघा जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। चूंकि, मिर्जापुर ब्लॉक से यह गांव उल्टी दिशा में पड़ता है इसलिए वहां के नागरिकों ने विरोध किया तो प्रशासनिक अधिकारियों ने बदायूं-फर्रुखाबाद मार्ग पर नरसुईया गांव के पास और मिर्जापुर क्षेत्र के गांव नूरपुर तरसौरा में तहसील भवन निर्मित कराने के लिए अतिरिक्त भेजे। यह प्रस्ताव अभी तक शासन स्तर पर धूल फांक रहे हैं।
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तहसील बनने पर इन गांवों की बदलेगी तस्वीर
कलान में तहसील भवन बनने के साथ वहीं से प्रशासनिक कामकाज शुरू होने पर सीमावर्ती गांव भुड़ेली, भुन्नी खेड़ा, मालौं, खमरिया, चितपुरी, बेहटी, मथरा, पटना देवकली, नौगवां, सथरा धर्मपुर, सरफरा, पयारा उत्तरी, गोलागंज, खमरिया, हेतमपुर, लक्ष्मणपुर, झखरेली आदि की तस्वीर बदलनी तय है। यह सभी गांव और वहां के लोग शासन की अधिकांश विकास योजनाओं से अभी तक वंचित है।
अभी सिर्फ कामचलाऊ व्यवस्था
तहसील के नाम पर अभी कलान में सिर्फ कामचलाऊ व्यवस्था है। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीओ, सब रजिस्ट्रार आदि अधिकारी कहने को रोजाना कलान पहुंचते हैं, लेकिन रहने के लिए आवास नहीं होने से दिन ढलने से पहले जलालाबाद अथवा शाहजहांपुर लौट जाते हैं। स्टाफ की कमी भी प्रशासनिक कार्यों में बाधा डाल रही है।
कलान में तहसील भवन बनाने के लिए तीन स्थानों पर 36-36 बीघा जमीन देखी जा चुकी है और इसके प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर लंबित हैं। तहसील भवन बनने पर क्षेत्रवासियों को समय, श्रम और पैसा बर्बाद किए बगैर अपनी समस्याओं का निस्तारण कराना आसान हो जाएगा। इस बारे में डीएम के माध्यम से शासन को रिमाइंडर भेजा जाएगा। - रमेश चंद्र, एसडीएम कलान
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आजादी के बाद जनपद का गठन होने पर प्रशासनिक लिहाज से कलान को ब्लॉक मुख्यालय बनाया गया था। कस्बे की तहसील जलालाबाद में थी। भौगोलिक दृष्टि से कलान और मिर्जापुर ब्लॉक में शामिल गांव जलालाबाद तहसील से जुड़े होने के कारण वहां के ग्रामीणों को खासी असुविधा का सामना करना पड़ता था। दरअसल, गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों से घिरे इन दोनों विकास खंडों के गांव बरसात में नदियाें का जलस्तर बढ़ने पर टापू बन जाते थे। जब तक प्रशासनिक अमला मदद को पहुंचता था, गांव बर्बादी के मुहाने पर पहुंच जाते थे। वर्ष 2006 और 2011 में आई बाढ़ के बाद यहां के हजारों परिवार विस्थापित हो गए। कटरी के इस इलाके तक विकास पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर सपा शासनकाल में 15 दिसंबर 2016 को इन दोनों विकास खंडों के 212 गांव जलालाबाद से काटकर कलान में नई तहसील बनाने की घोषणा की गई थी।
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36 बीघा जमीन का कई स्थानों पर हुआ चयन
कलान में तहसील के मुख्य भवन के साथ ही उप निबंधक कार्यालय, कोतवाली भवन और अन्य विभागों के भवन बनाए जाने हैं। इसके लिए कस्बे से छह किमी दूर गांव सथरा धर्मपुर में 36 बीघा जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। चूंकि, मिर्जापुर ब्लॉक से यह गांव उल्टी दिशा में पड़ता है इसलिए वहां के नागरिकों ने विरोध किया तो प्रशासनिक अधिकारियों ने बदायूं-फर्रुखाबाद मार्ग पर नरसुईया गांव के पास और मिर्जापुर क्षेत्र के गांव नूरपुर तरसौरा में तहसील भवन निर्मित कराने के लिए अतिरिक्त भेजे। यह प्रस्ताव अभी तक शासन स्तर पर धूल फांक रहे हैं।
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तहसील बनने पर इन गांवों की बदलेगी तस्वीर
कलान में तहसील भवन बनने के साथ वहीं से प्रशासनिक कामकाज शुरू होने पर सीमावर्ती गांव भुड़ेली, भुन्नी खेड़ा, मालौं, खमरिया, चितपुरी, बेहटी, मथरा, पटना देवकली, नौगवां, सथरा धर्मपुर, सरफरा, पयारा उत्तरी, गोलागंज, खमरिया, हेतमपुर, लक्ष्मणपुर, झखरेली आदि की तस्वीर बदलनी तय है। यह सभी गांव और वहां के लोग शासन की अधिकांश विकास योजनाओं से अभी तक वंचित है।
अभी सिर्फ कामचलाऊ व्यवस्था
तहसील के नाम पर अभी कलान में सिर्फ कामचलाऊ व्यवस्था है। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीओ, सब रजिस्ट्रार आदि अधिकारी कहने को रोजाना कलान पहुंचते हैं, लेकिन रहने के लिए आवास नहीं होने से दिन ढलने से पहले जलालाबाद अथवा शाहजहांपुर लौट जाते हैं। स्टाफ की कमी भी प्रशासनिक कार्यों में बाधा डाल रही है।
कलान में तहसील भवन बनाने के लिए तीन स्थानों पर 36-36 बीघा जमीन देखी जा चुकी है और इसके प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर लंबित हैं। तहसील भवन बनने पर क्षेत्रवासियों को समय, श्रम और पैसा बर्बाद किए बगैर अपनी समस्याओं का निस्तारण कराना आसान हो जाएगा। इस बारे में डीएम के माध्यम से शासन को रिमाइंडर भेजा जाएगा। - रमेश चंद्र, एसडीएम कलान