{"_id":"60db75058ebc3e771a30bda4","slug":"jila-pancayt-shahjahanpur-news-bly451504451","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला पंचायत अध्यक्ष : हर मोर्चे पर मात खा गई समाजवादी पार्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला पंचायत अध्यक्ष : हर मोर्चे पर मात खा गई समाजवादी पार्टी
विज्ञापन
शाहजहांपुर। सात जिला पंचायत सदस्य जिताने के बाद समाजवादी पार्टी 12 सदस्यों वाली भाजपा को टक्कर देने के पूरे मूड में थी। मगर पार्टी की अंतर कलह और भाजपा की सटीक रणनीति से अंतिम क्षणों में मात खानी पड़ गई। सपा अपने प्रत्याशी को ही जीत का भरोसा नहीं दिला सकी।
समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की सहमति से क्षत्रिय समाज से आने वालीं जलालाबाद प्रथम से जिला पंचायत सदस्य वीनू सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था। रणनीति साफ थी कि भाजपा से असंतुष्ट सदस्य, क्षत्रिय बिरादरी के सदस्यों के साथ ही सपा के निर्वाचित सदस्यों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतना है। सोमवार को सपा प्रत्याशी के नामांकन वापसी की चर्चाएं उड़ीं तो सपा पदाधिकारियों ने प्रत्याशी से संपर्क करने का प्रयास किया। सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां का कहना था कि सपा प्रत्याशी और उनसे जुड़े लोगों का मोबाइल कल से ही बंद आने लगा था। फिर भी उन्हें विश्वास था कि प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने की बात महज विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही अफवाह भर है। मगर मंगलवार सुबह दस बजे जब सपा प्रत्याशी भाजपा कार्यालय पहुंच र्गइं तो अफवाह सच साबित हो गई और सपाइयों के मुंह उतर गए। सपा अपना किला नहीं बचा सकी। सुबह से ही समाजवादी पार्टी के कार्यालय में समर्थक और पदाधिकारी उमड़े हुए थे। हालांकि बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी, प्रत्याशी को जीत का विश्वास नहीं दिला सकी। प्रत्याशी का जीत को लेकर संशय भाजपा की ओर झुकाव की वजह बना।
-
भाजपा ने खेला क्षत्रिय कार्ड
क्षत्रिय समाज की वीनू सिंह को जीत का विश्वास दिला पाने में पार्टी नाकाम रही। सपा की प्रत्याशी एक बड़े सपाई क्षत्रिय नेता के करीबी बताई जा रहीं हैं, लेकिन भाजपा के क्षत्रिय कार्ड के आगे उनका जोर नहीं चल सका। भाजपा ने अपने बड़े क्षत्रिय चेहरों को आगे कर दिया। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन डीपीएस राठौर के साथ ही अन्य लोग प्रत्याशी की घेराबंदी में लगे रहे। सपा प्रत्याशी अपनी पार्टी से ज्यादा भाजपाइयों के संपर्क में आ चुकीं थीं। परिवार के लोगों से विचार-विमर्श कर उन्होंने अंतत: भाजपा का दामन थाम लिया और नामांकन वापस लेने का फैसला कर लिया।
विज्ञापन
--
शाहजहांपुर : जिला पंचायत में दलगत स्थिति
कुल सदस्य-47
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए चाहिए सदस्य-24, भाजपा-12, बसपा-9, सपा-7, महान दल-1, कांग्रेस-1, आम आदमी पार्टी-1, जदयू-1, निर्दलीय-15
0000
भाजपा ने सपा को नहीं दिया इतिहास दोहराने का मौका
शाहजहांपुर। 2015 के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जिस तरह विपक्षी पार्टी होने के बावजूद भाजपा ने सपा से जीत छीन ली थी, वह इतिहास समाजवादी पार्टी नहीं दोहरा सकी। तब रातों-रात जिला पंचायत सदस्यों का मन बदला और अगले दिन भाजपा के अजय प्रताप सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए थे।
2013 में सत्तासीन समाजवादी पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष का तख्ता पलट किया था। उपचुनाव में सपा से नीतू सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। दो साल बाद 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के अजय प्रताप सिंह और सपा से नीतू सिंह आमने-सामने थे। चुनाव की एक रात पहले तक सत्ताधारी सपा के पक्ष में हवा चल रही थी। मंत्री नितिन अग्रवाल की देखरेख में एक होटल में बहुमत से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य टिके हुए थे और यह तय था कि अगले दिन पार्टी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगा। मगर अगले दिन जो परिणाम आया उससे सब चौंक गए। अजय प्रताप छह वोटों से जीतकर नए जिला पंचायत अध्यक्ष बन चुके थे। सत्ता में होने के बावजूद सपा को मात खानी पड़ी थी। हालांकि तब सपा में भितरघात और अंदरूनी कलह ने भाजपा को बड़ा लाभ मिला था। इस बार चुनाव में समाजवादी पार्टी को उम्मीद थी कि पिछली बार का इतिहास दोहराया जाएगा और उनका प्रत्याशी सत्ताधारी दल के खिलाफ चुनाव जीतेगा। मगर भाजपा की सटीक रणनीति और हर हाल में चुनाव जीतने की जिद ने सपा प्रत्याशी को ही अपने खेमे में कर लिया। अब सपा के पास हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं रह गया।
-
अब तक ये बने जिला पंचायत अध्यक्ष
1989-कुंवर जयेंद्र प्रसाद (कांग्रेस)
1991-मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस)
1995-जीवेंद्र गंगवार (जनता दल)
2000-वीरेंद्र पाल सिंह यादव (भाजपा)
2005- अर्चना वर्मा (सपा)
2010-बहादुरलाल आजाद (बसपा)
2013-नीतू सिंह (सपा)
2015-अजय प्रताप सिंह यादव (भाजपा)
2021-ममता यादव (भाजपा)
000
भाजपा ने झोंकी ताकत, पूरी की निर्विरोध निर्वाचन की जिद
शाहजहांपुर। सिर्फ 12 जिला पंचायत सदस्य जिताने वाली भाजपा ने निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की जिद आखिरकार पूरी कर ही ली। अपने किले को अभेद्य करने के साथ ही सपा का किला ढहाने की रणनीति काम आई और ममता यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष की जीत का प्रमाणपत्र मिल गया।
जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा की डगर आसान नहीं थी। सत्तासीन होने के मद्देनजर पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर ही रहा था। कई लोगों ने टिकट न मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़ा। इनमें से कई तो भाजपा के घोषित प्रत्याशी को हराकर चुनाव भी जीत गए। बगावत के कारण कई सदस्यों को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जब महज 12 प्रत्याशी जीते तो साफ था कि इतने ही प्रत्याशी और जुटाने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति बदली। पार्टी से निष्कासित लोगों को गले लगाया। निर्दलीय सदस्यों को भी पुचकारा और अपने सदस्यों को उनकी अहमियत का लगातार अहसास दिलाते रहे।
धीरे-धीरे कर भाजपा ने बहुमत के करीब सदस्य जुटा लिए थे। इसके बावजूद पार्टी कोई चूक नहीं करना चाहती थी। बसपा के अध्यक्षी का चुनाव न लड़ने के फैसले से भी भाजपा को नई ऊर्जा मिली। पार्टी पहले भी रणनीति बना रही थी कि अध्यक्ष निर्विरोध चुना जाए मगर हालात बनते नहीं दिख रहे थे। इसके बाद पार्टी ने करीब 31 सदस्यों को अपने पाले में करने के साथ ही सपा में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पहली कोशिश यह थी कि सपा प्रत्याशी अपना नामांकन ही न कर सके। नामांकन हो गया तब पार्टी ने सपा प्रत्याशी को यह यकीन दिलाना शुरू किया कि वह जीत नहीं सकतीं। सत्ताधारी दल में शामिल हो जाना फायदे का सौदा रहेगा। नामांकन के बाद दो दिनों में सपा प्रत्याशी को यह यकीन हो चुका था कि वह केवल टक्कर दे सकती हैं, जीत उनसे दूर रहेगी। यहीं से पासा पलट गया।
एक दिन पहले ही प्रत्याशी ने नामांकन वापस लेने का मन बना लिया था। उधर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी जोर लगा दिया। सुरेश कुमार खन्ना के सियासी रणनीति का कोई जवाब समाजवादी पार्टी के पास नहीं था।
-
जितिन ने भी दिया था आशीर्वाद
जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी रहीं ममता यादव अपने पति व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप, ससुर व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्रपाल सिंह के साथ नामांकन से एक दिन पहले भाजपा नेता जितिन प्रसाद के पास पहुंचीं थीं। जितिन ने भी उन्हें मदद का पूरा आश्वासन दिया था। बताते हैं कि जितिन ने भी निर्विरोध निर्वाचन में पूरी मदद की।
-
वीनू सिंह भाजपा की नीतियों और कार्यक्रम से प्रभावित होकर शामिल हुई हैं। उन पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं था। सपा के आरोप बिल्कुल निराधार हैं। दबाव बनाने का काम समाजवादी पार्टी करती है। भाजपा की नीति सबको जोड़कर साथ चलने की है। ममता यादव अब जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
-हरिप्रकाश वर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा
-
वीनू सिंह भाजपा में क्यों गईं हैं, यह वही जानें मगर भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर दी। धनबल के जरिये उन्होंने चुनाव जीता है। पहले सदस्यों के निर्वाचन में धांधली की गई और अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में ऐसा किया गया।
-तनवीर खां, सपा जिलाध्यक्ष
-
सपा प्रत्याशी का अचानक नामांकन के बाद भाजपा में शामिल हो जाना कोई नई बात नहीं है। इस चुनाव में पूरे प्रदेश में सपा ने भाजपा की बी टीम बन कर काम किया है। जनहित की समस्याओं को लेकर कांग्रेस पार्टी हमेशा पूरी मजबूती से जिले और प्रदेश व देश की जनता के साथ खड़ी है।
- रजनीश गुप्ता मुन्ना, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की सहमति से क्षत्रिय समाज से आने वालीं जलालाबाद प्रथम से जिला पंचायत सदस्य वीनू सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था। रणनीति साफ थी कि भाजपा से असंतुष्ट सदस्य, क्षत्रिय बिरादरी के सदस्यों के साथ ही सपा के निर्वाचित सदस्यों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतना है। सोमवार को सपा प्रत्याशी के नामांकन वापसी की चर्चाएं उड़ीं तो सपा पदाधिकारियों ने प्रत्याशी से संपर्क करने का प्रयास किया। सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां का कहना था कि सपा प्रत्याशी और उनसे जुड़े लोगों का मोबाइल कल से ही बंद आने लगा था। फिर भी उन्हें विश्वास था कि प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने की बात महज विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही अफवाह भर है। मगर मंगलवार सुबह दस बजे जब सपा प्रत्याशी भाजपा कार्यालय पहुंच र्गइं तो अफवाह सच साबित हो गई और सपाइयों के मुंह उतर गए। सपा अपना किला नहीं बचा सकी। सुबह से ही समाजवादी पार्टी के कार्यालय में समर्थक और पदाधिकारी उमड़े हुए थे। हालांकि बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी, प्रत्याशी को जीत का विश्वास नहीं दिला सकी। प्रत्याशी का जीत को लेकर संशय भाजपा की ओर झुकाव की वजह बना।
विज्ञापन
-
भाजपा ने खेला क्षत्रिय कार्ड
क्षत्रिय समाज की वीनू सिंह को जीत का विश्वास दिला पाने में पार्टी नाकाम रही। सपा की प्रत्याशी एक बड़े सपाई क्षत्रिय नेता के करीबी बताई जा रहीं हैं, लेकिन भाजपा के क्षत्रिय कार्ड के आगे उनका जोर नहीं चल सका। भाजपा ने अपने बड़े क्षत्रिय चेहरों को आगे कर दिया। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन डीपीएस राठौर के साथ ही अन्य लोग प्रत्याशी की घेराबंदी में लगे रहे। सपा प्रत्याशी अपनी पार्टी से ज्यादा भाजपाइयों के संपर्क में आ चुकीं थीं। परिवार के लोगों से विचार-विमर्श कर उन्होंने अंतत: भाजपा का दामन थाम लिया और नामांकन वापस लेने का फैसला कर लिया।
विज्ञापन
--
शाहजहांपुर : जिला पंचायत में दलगत स्थिति
कुल सदस्य-47
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए चाहिए सदस्य-24, भाजपा-12, बसपा-9, सपा-7, महान दल-1, कांग्रेस-1, आम आदमी पार्टी-1, जदयू-1, निर्दलीय-15
0000
भाजपा ने सपा को नहीं दिया इतिहास दोहराने का मौका
शाहजहांपुर। 2015 के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जिस तरह विपक्षी पार्टी होने के बावजूद भाजपा ने सपा से जीत छीन ली थी, वह इतिहास समाजवादी पार्टी नहीं दोहरा सकी। तब रातों-रात जिला पंचायत सदस्यों का मन बदला और अगले दिन भाजपा के अजय प्रताप सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए थे।
2013 में सत्तासीन समाजवादी पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष का तख्ता पलट किया था। उपचुनाव में सपा से नीतू सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। दो साल बाद 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के अजय प्रताप सिंह और सपा से नीतू सिंह आमने-सामने थे। चुनाव की एक रात पहले तक सत्ताधारी सपा के पक्ष में हवा चल रही थी। मंत्री नितिन अग्रवाल की देखरेख में एक होटल में बहुमत से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य टिके हुए थे और यह तय था कि अगले दिन पार्टी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगा। मगर अगले दिन जो परिणाम आया उससे सब चौंक गए। अजय प्रताप छह वोटों से जीतकर नए जिला पंचायत अध्यक्ष बन चुके थे। सत्ता में होने के बावजूद सपा को मात खानी पड़ी थी। हालांकि तब सपा में भितरघात और अंदरूनी कलह ने भाजपा को बड़ा लाभ मिला था। इस बार चुनाव में समाजवादी पार्टी को उम्मीद थी कि पिछली बार का इतिहास दोहराया जाएगा और उनका प्रत्याशी सत्ताधारी दल के खिलाफ चुनाव जीतेगा। मगर भाजपा की सटीक रणनीति और हर हाल में चुनाव जीतने की जिद ने सपा प्रत्याशी को ही अपने खेमे में कर लिया। अब सपा के पास हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं रह गया।
-
अब तक ये बने जिला पंचायत अध्यक्ष
1989-कुंवर जयेंद्र प्रसाद (कांग्रेस)
1991-मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस)
1995-जीवेंद्र गंगवार (जनता दल)
2000-वीरेंद्र पाल सिंह यादव (भाजपा)
2005- अर्चना वर्मा (सपा)
2010-बहादुरलाल आजाद (बसपा)
2013-नीतू सिंह (सपा)
2015-अजय प्रताप सिंह यादव (भाजपा)
2021-ममता यादव (भाजपा)
000
भाजपा ने झोंकी ताकत, पूरी की निर्विरोध निर्वाचन की जिद
शाहजहांपुर। सिर्फ 12 जिला पंचायत सदस्य जिताने वाली भाजपा ने निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की जिद आखिरकार पूरी कर ही ली। अपने किले को अभेद्य करने के साथ ही सपा का किला ढहाने की रणनीति काम आई और ममता यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष की जीत का प्रमाणपत्र मिल गया।
जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा की डगर आसान नहीं थी। सत्तासीन होने के मद्देनजर पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर ही रहा था। कई लोगों ने टिकट न मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़ा। इनमें से कई तो भाजपा के घोषित प्रत्याशी को हराकर चुनाव भी जीत गए। बगावत के कारण कई सदस्यों को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जब महज 12 प्रत्याशी जीते तो साफ था कि इतने ही प्रत्याशी और जुटाने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति बदली। पार्टी से निष्कासित लोगों को गले लगाया। निर्दलीय सदस्यों को भी पुचकारा और अपने सदस्यों को उनकी अहमियत का लगातार अहसास दिलाते रहे।
धीरे-धीरे कर भाजपा ने बहुमत के करीब सदस्य जुटा लिए थे। इसके बावजूद पार्टी कोई चूक नहीं करना चाहती थी। बसपा के अध्यक्षी का चुनाव न लड़ने के फैसले से भी भाजपा को नई ऊर्जा मिली। पार्टी पहले भी रणनीति बना रही थी कि अध्यक्ष निर्विरोध चुना जाए मगर हालात बनते नहीं दिख रहे थे। इसके बाद पार्टी ने करीब 31 सदस्यों को अपने पाले में करने के साथ ही सपा में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पहली कोशिश यह थी कि सपा प्रत्याशी अपना नामांकन ही न कर सके। नामांकन हो गया तब पार्टी ने सपा प्रत्याशी को यह यकीन दिलाना शुरू किया कि वह जीत नहीं सकतीं। सत्ताधारी दल में शामिल हो जाना फायदे का सौदा रहेगा। नामांकन के बाद दो दिनों में सपा प्रत्याशी को यह यकीन हो चुका था कि वह केवल टक्कर दे सकती हैं, जीत उनसे दूर रहेगी। यहीं से पासा पलट गया।
एक दिन पहले ही प्रत्याशी ने नामांकन वापस लेने का मन बना लिया था। उधर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी जोर लगा दिया। सुरेश कुमार खन्ना के सियासी रणनीति का कोई जवाब समाजवादी पार्टी के पास नहीं था।
-
जितिन ने भी दिया था आशीर्वाद
जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी रहीं ममता यादव अपने पति व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप, ससुर व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्रपाल सिंह के साथ नामांकन से एक दिन पहले भाजपा नेता जितिन प्रसाद के पास पहुंचीं थीं। जितिन ने भी उन्हें मदद का पूरा आश्वासन दिया था। बताते हैं कि जितिन ने भी निर्विरोध निर्वाचन में पूरी मदद की।
-
वीनू सिंह भाजपा की नीतियों और कार्यक्रम से प्रभावित होकर शामिल हुई हैं। उन पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं था। सपा के आरोप बिल्कुल निराधार हैं। दबाव बनाने का काम समाजवादी पार्टी करती है। भाजपा की नीति सबको जोड़कर साथ चलने की है। ममता यादव अब जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
-हरिप्रकाश वर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा
-
वीनू सिंह भाजपा में क्यों गईं हैं, यह वही जानें मगर भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर दी। धनबल के जरिये उन्होंने चुनाव जीता है। पहले सदस्यों के निर्वाचन में धांधली की गई और अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में ऐसा किया गया।
-तनवीर खां, सपा जिलाध्यक्ष
-
सपा प्रत्याशी का अचानक नामांकन के बाद भाजपा में शामिल हो जाना कोई नई बात नहीं है। इस चुनाव में पूरे प्रदेश में सपा ने भाजपा की बी टीम बन कर काम किया है। जनहित की समस्याओं को लेकर कांग्रेस पार्टी हमेशा पूरी मजबूती से जिले और प्रदेश व देश की जनता के साथ खड़ी है।
- रजनीश गुप्ता मुन्ना, कांग्रेस जिलाध्यक्ष