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अजय गुप्त को जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखक सम्मान
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अजय गुप्ता
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जनपद के बाल साहित्यकार एवं श्री गांधी पुस्तकालय के सचिव अजय गुप्त को बाल विज्ञान साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उप्र हिंदी संस्थान शीघ्र सम्मानित करेगा। जगपति चतुर्वेदी स्मृति बाल विज्ञान लेखक सम्मान के अंतर्गत उनकी कृति का चयन किया गया है। सम्मान के तौर पर उन्हें 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
छह दिसंबर 1950 को जन्मे अजय गुप्त को बचपन से ही लेखन में रुचि रही। वह बताते हैं कि पांचवीं कक्षा पास करने के साथ ही उन्होंने लेख, कविताएं आदि लिखनी आरंभ कर दीं। लेखन से उनके इसी लगाव के कारण उनकी श्री गांधी पुस्तकालय से निकटता बढ़ी। उन्होंने बताया कि लगभग तीन-चार वर्ष पूर्व विज्ञान पर आधारित ‘कैसे होते हैं दिन-रात’ और ‘जंगल में मोबाइल’ शीर्षक से बच्चों के लिए दो पुस्तकें लिखीं। जंगल में मोबाइल वस्तुत: बाल कविता संग्रह है। इसके अतिरिक्त दिवंगत बेटी की स्मृति में प्रत्येक वर्ष बाल प्रभा पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।
उन्होंने बताया कि बाल प्रभा पत्रिका सहित उपरोक्त दोनों पुस्तकें बाल साहित्य संवर्धन योजना के अंतर्गत कुछ माह पूर्व हिंदी संस्थान भेजी थीं। वहां हुई बाल साहित्य सम्मान समिति की बैठक में उनकी पुस्तक का चयन पुरस्कार के लिए किया गया। इस आशय की सूचना उन्हें संस्थान के निदेशक श्रीकांत वर्मा द्वारा भेजे गए पत्र से मिली, लेकिन यह जानकारी उन्हें भी नहीं है कि उनकी किस कृति को पुरस्कार के लिए चुना गया है। संवाद
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छह दिसंबर 1950 को जन्मे अजय गुप्त को बचपन से ही लेखन में रुचि रही। वह बताते हैं कि पांचवीं कक्षा पास करने के साथ ही उन्होंने लेख, कविताएं आदि लिखनी आरंभ कर दीं। लेखन से उनके इसी लगाव के कारण उनकी श्री गांधी पुस्तकालय से निकटता बढ़ी। उन्होंने बताया कि लगभग तीन-चार वर्ष पूर्व विज्ञान पर आधारित ‘कैसे होते हैं दिन-रात’ और ‘जंगल में मोबाइल’ शीर्षक से बच्चों के लिए दो पुस्तकें लिखीं। जंगल में मोबाइल वस्तुत: बाल कविता संग्रह है। इसके अतिरिक्त दिवंगत बेटी की स्मृति में प्रत्येक वर्ष बाल प्रभा पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।
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उन्होंने बताया कि बाल प्रभा पत्रिका सहित उपरोक्त दोनों पुस्तकें बाल साहित्य संवर्धन योजना के अंतर्गत कुछ माह पूर्व हिंदी संस्थान भेजी थीं। वहां हुई बाल साहित्य सम्मान समिति की बैठक में उनकी पुस्तक का चयन पुरस्कार के लिए किया गया। इस आशय की सूचना उन्हें संस्थान के निदेशक श्रीकांत वर्मा द्वारा भेजे गए पत्र से मिली, लेकिन यह जानकारी उन्हें भी नहीं है कि उनकी किस कृति को पुरस्कार के लिए चुना गया है। संवाद
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