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Shahjahanpur News: सीएचसी में इलाज कराना मुश्किल, डॉक्टर न एक्सरे...अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था भी नहीं

Sun, 24 Aug 2025 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 24 Aug 2025 12:28 AM IST
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It is difficult to get treatment in CHC, there is no doctor, no X-ray facility... not even ultrasound facility
जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद - फोटो : संवाद
शाहजहांपुर। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड जांच समेत हेल्थ एटीएम जैसी अत्याधुनिक मशीनों से लैस किया है। इसके विपरीत सर्जन, डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों के तमाम पद रिक्त होने से यह सारी सुविधाएं बेमानी साबित हो रही हैं। नतीजे में तमाम मरीज मायूस लौट रहे हैं या फिर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
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तिलहर सीएचसी की ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। जब से ओपीडी का समय दो घंटे बढ़ाया गया, वहां पहुंचने वाले मरीज भी बढ़ गए, लेकिन डाक्टरों के कई पद रिक्त हैं। अधीक्षक समेत सिर्फ चार डॉक्टर ही तैनात हैं। दंत रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन और महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने से इनसे संबंधित मरीजों को दवाएं देने के बाद चलता कर दिया जाता है।
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जैतीपुर सीएचसी पर रोजाना लगभग 250 से 300 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन उनकी जांच केवल रस्म अदायगी तक सीमित है। यहां भी डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। इसी सीएचसी के अधीन संचालित खेड़ा रठ, डभौरा सिमरा व गढि़या रंगीन में कोई भी डॉक्टर तैनात नहीं है। क्षेत्र की करीब 50 हजार की आबादी इन्हीं चारों अस्पतालों पर निर्भर है। एक्सरे मशीन तकनीशियन नही होने से ठप है।
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मीरानपुर कटरा सीएचसी पर दंत राेग विशेषज्ञ समेत तीन डॉक्टर और महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए नर्सिंग ऑफिसर की नियुक्ति की गई है, लेकिन ऑपरेशन थियेटर नहीं है। ओटी की कमी के कारण नसबंदी कैंप में आने वाली महिलाओं को ऑपरेशन के लिए खुदागंज सीएचसी भेज दिया जाता है।
प्रति माह सौ से अधिक महिलाओं का प्रसव भी कराया जाता है, लेकिन सीएचसी के लेबर रूम का पंखा अरसे से खराब है। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हाईवे पर सीएचसी होने के बावजूद सर्जन न होने से हादसों में घायलों को रेफर कर दिया जाता है।
निगोही सीएचसी में न तो आपरेशन रूम बनाया गया है और न ही वहां कोई सर्जन नियुक्त है। इस कारण गर्भवती महिलाओं समेत हादसों में घायलों और गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन चौधरी के अनुसार गत एक माह में 35 से अधिक गर्भवती महिलाओं और 20 से ज्यादा घायलों को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड मशीन भी नहीं है। दो वर्ष पहले आई एक्सरे मशीन टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने से बंद है। महिला चिकित्सक की भी नियुक्ति नहीं होने से प्रसव पीड़ित महिलाओं को मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है।
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दिखावटी बनी एक्सरे और हेल्थ एटीएम
जैतीपुर सीएचसी पर सरकार ने हेल्थ एटीएम लगवाई है। इस मशीन से स्वास्थ्य से संबंधित 43 प्रकार की जांचें की जा सकती हैं, लेकिन मशीन चलाने की जानकारी किसी कर्मचारी को नहीं है। सीएससी प्रभारी डॉ. साजन के पूछने पर लैब टेक्नीशियन ने मशीन के विषय में जानकारी होने से इन्कार कर दिया। हर माह लगभग 200 मरीज एक्सरे के लिए पहुंचते हैं, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने से पिछले डेढ़ साल से मशीन बंद है। संवाद
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मजबूरन निजी अस्पताल गए
तिलहर के जोधपुर नवदिया के ब्रजेश कुमार ने बताया कि चार माह की बीमार भतीजी सलोनी को दवा दिलाने सीएचसी पर गए, लेकिन वहां बच्चों का कोई डॉक्टर नहीं मिला। मजबूरन प्राइवेट अस्पताल से दवा लेनी पड़ी। बंधीचक गांव के जोगेंद्र कुमार ने बताया कि भाई बृजेश को दांतों की दवा दिलाने उसके साथ सीएचसी पर गए, लेकिन ओपीडी में दांतों के डॉक्टर नहीं मिले। बाद में उसे एक निजी डॉक्टर को दिखाया।
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एनस्थीजिया के लिए शाहजहांपुर से बुलाते हैं डॉक्टर

पुवायां। सीएचसी पर डॉ. रामकुमार वर्मा सर्जरी करते हैं और एनस्थीजिया के लिए डॉक्टर शाहजहांपुर से आते हैं। सीएचसी परिसर में जलभराव और गंदगी की समस्या है। अधीक्षक डॉ. नरेंद्र पाल ने बताया कि आपरेशन से प्रसव की सुविधा सीएचसी पर उपलब्ध है। खुटार सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। टेक्नीशियन सचिन त्रिवेदी की ड्यूटी तीन दिन खुटार और तीन दिन बंडा साीएचसी पर रहने के कारण एक्सरे तीन दिन ही होते हैं। अधीक्षक डाॅ. संजीव कुमार ने बताया कि स्टॉफ और दवाओं की समस्या नहीं है। संवाद
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डॉक्टरों की कमी है, लेकिन मरीजों को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है। इसके लिए डॉक्टरों से उनकी पूरी क्षमता से काम लिया जा रहा है। गंभीर मरीजों को ही सीएचसी से रेफर किया जा रहा है। रिक्त पदों पर डॉक्टरों की तैनाती के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है।

- डॉ. ओमेंद्र कुमार राठौर, अधीक्षक, सीएचसी तिलहर
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सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे जिले में पांच तकनीशियन है, उन्हीं से कार्य कराया जा रहा है। डाॅक्टरों की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।


-डॉ. विवेक मिश्रा, सीएमओ

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद- फोटो : संवाद

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद- फोटो : संवाद

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद

जैतीपुर सीएचसी में इलाज के लिए इंतजार करते मरीज। संवाद- फोटो : संवाद

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