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अपात्रों के आवेदन से खाद्य सुरक्षा योजना में रुकावट
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:51 PM IST
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जिस तरह किसी खास मौके पर यूजर बढ़ने से मोबाइल नेटवर्क हैंग हो जाता है, गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों के लिए लागू खाद्य सुरक्षा योजना का जिले में ठीक वहीं हाल हो गया है। समाज के साधन संपन्न लोगों द्वारा सस्ता खाद्यान्न हड़पने के लिए किए गए आवेदन विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं। ऐसे में कोटेदारों की बन आई है और वे फर्जी आवेदनों की जांच के बहाने उन कार्डधारकों को भी सस्ता राशन देने से आनाकानी कर रहे हैं, जिनका चयन पात्र गृहस्थी श्रेणी में हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा लागू खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बीपीएल श्रेणी के लोगों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल यूनिटों की समतुल्य मात्रा में दिया जाना है। सामान्य श्रेणी के कार्डधारकों को अभी तक गेहूं 6.70 रुपये किलो मिलता रहा, लेकिन उन्होंने भी बीपीएल श्रेणी के लिए निर्धारित सस्ती दरों पर गेहूं हासिल करने के लिए आवेदन कर दिए। नतीजा यह हुआ कि आपूर्ति कार्यालय में नए आवेदनों का अंबार लग गया और उनमें से अपात्रों की छटनी करना पेचीदा काम साबित हो रहा है। अपात्र होने के बावजूद पात्र गृहस्थी श्रेणी पाने की होड़ का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक नगर क्षेत्र में एक लाख 38 हजार 42 और ग्रामीण क्षेत्र में चार लाख 33 हजार 890 पात्र गृहस्थियों का चयन किया जा चुका है। इसके बावजूद सवा लाख आवेदन जांच को विचाराधीन हैं। खास यह है कि शासन से नगर व देहात क्षेत्र के लिए प्राप्त पात्रता लक्ष्य के करीब बीपीएल परिवार पहुंच गए हैं, लेकिन उनकी संख्या लक्ष्य से अधिक साबित हो रही है। इसे देखते विभाग के अधिकारियों ने चयनित हो चुके पात्र गृहस्थी परिवारों की नए सिरे से जांच करानी शुरू की है। अफसरों का प्रयास है कि जिन लोगों ने पात्रता के मानकों की अनदेखी करके येन-केन-प्रकारेण पात्र गृहस्थी श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा लिया है, उनके नाम खारिज करके प्रतीक्षारत आवेदनों की जांच करके उन्हें पात्रता श्रेणी में लाया जा सके। यह काम माह के अंत तक पूरा हो पाएगा और तभी योजना का लाभ सभी गरीब परिवारों तक पहुंचने की उम्मीद है।
अपात्रों से की जाएगी खाद्यान्न की रिकवरी
शासन ने ऐसे लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना से दूर रखने का निर्णय किया है जिनके पास पक्का मकान, कृषि भूमि, दुपहिया वाहन, जेनरेटर आदि सुविधाएं हैं। इसके बावजूद 50 बीघा जमीन वाले भी गरीबों का खाद्यान्न हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। कोटेदारों की दुकानों पर जाकर ऐसे लाभार्थियों की जांच की जा रही है, जिनसे बाद में खाद्यान्न की रिकवरी भी कराई जाएगी। शेष 1.25 लाख आवेदनों की जांच का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अब तक शहरी क्षेत्र में पात्रता लक्ष्य 64.43 प्रतिशत के सापेक्ष 63 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 79.65 प्रतिशत के सापेक्ष 77 प्रतिशत पात्र गृहस्थी परिवार चयनित करके उसी के अनुरूप कोटेदारों को अप्रैल माह का खाद्यान्न आवंटित किया जा चुका है।
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अपात्रों से की जाएगी खाद्यान्न की रिकवरी
शासन ने ऐसे लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना से दूर रखने का निर्णय किया है जिनके पास पक्का मकान, कृषि भूमि, दुपहिया वाहन, जेनरेटर आदि सुविधाएं हैं। इसके बावजूद 50 बीघा जमीन वाले भी गरीबों का खाद्यान्न हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। कोटेदारों की दुकानों पर जाकर ऐसे लाभार्थियों की जांच की जा रही है, जिनसे बाद में खाद्यान्न की रिकवरी भी कराई जाएगी। शेष 1.25 लाख आवेदनों की जांच का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अब तक शहरी क्षेत्र में पात्रता लक्ष्य 64.43 प्रतिशत के सापेक्ष 63 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 79.65 प्रतिशत के सापेक्ष 77 प्रतिशत पात्र गृहस्थी परिवार चयनित करके उसी के अनुरूप कोटेदारों को अप्रैल माह का खाद्यान्न आवंटित किया जा चुका है।
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