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24 घंटे में पांच और किसानों की मौत

Sun, 19 Apr 2015 12:13 AM IST
शाहजहांपुर
शाहजहांपुर Updated Sun, 19 Apr 2015 12:13 AM IST
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In the five and 24 hours Death of farmers
बेमौसम की बरसात के कारण हुए फसली नुकसान से परेशान पांच और किसानों की बीते 24 घंटे के दौरान मौत हो गई। चार बीघा खेत में सिर्फ दो क्विंटल गेहूं निकलने से परेशान रोजा क्षेत्र के गांव निघोना मकरंदपुर में किसान के युवा बेटे ने खेत के पास लगे आम के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। खुटार क्षेत्र के गांव सिल्हुआ में फसली नुकसान का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाने से दो बुजुर्ग किसानों ने दम तोड़ दिया। उधर, निगोही क्षेत्र के गांव महोलिया में कर्ज में डूबे अधेड़ किसान की जिंदगी पर फसली नुकसान भारी पड़ गया। इन्हें मिलाकर जिले में अब तक 27 किसानों की अस्वाभाविक मौत हो चुकी है।
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चार बीघा में दो क्विंटल गेहूं देख
विश्वपाल ने लगा ली फांसी
- आर्थिक तंगी और मुफलिसी में जी रहा पूरा परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
रोजा। तहसील सदर के गांव निघोना मकरंदपुर निवासी रामबहादुर के तीन बेटे थे। इसमें बड़े बेटे नन्हें सिंह की खेत में कीटनाशक दवा का छिड़काव करते समय करीब दस साल पहले मौत हो गई थी। उनकी पत्नी सागरा देवी का निधन हुए करीब आठ साल हो गए। इन्हीं का 24 वर्षीय बेटा विश्वपाल सिंह अपने बाबा रामबहादुर और दादी शिवदेई के साथ रहकर खेती का काम करता था।
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राम बहादुर ने बताया कि उसने अपने तीनों बेटों को दो-दो बीघा जमीन दे दी। नन्हे सिंह और बाबा के हिस्से की चार बीघा खेती अविवाहित विश्वदीप ही करता था। शुक्रवार को विश्वपाल सिंह ने गेहूं की कटाई और गहाई की थी, जिसमें मात्र दो क्विंटल गेहूं ही हाथ लगा था। रामबहादुर के अनुसार गेहूं की गहाई करने के बाद विश्वपाल शाम को घर आया और मायूस लेट गया। खाना खाने के बाद रात किसी पहर वह घर से निकल गया और सवेरे अपने ही खेत में आम के पेड़ में उसका शव फांसी पर लटका मिला। घरवालों ने इसकी सूचना थाने पर दी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। विश्वपाल की मौत से पूरा गांव सदमे में है।
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उम्मीद से कम दाने देखकर रामकुमार के प्राण पखेरू उड़े
खुटार। गांव सिल्हुआ के 75 वर्षीय रामकुमार दीक्षित के पास सात एकड़ खेत है। छह एकड़ में गेहूं खड़ा हुआ था। बारिश से गेहूं की फसल खराब हो गई थी। कटाई हुई तो प्रति एकड़ मात्र छह क्विंटल गेहूं निकलने से रामकुमार को गहरा सदमा लगा। शनिवार सुबह परिवार के लोगों से कम गेहूं निकलने की बात कहते हुए अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत करते हुए उन्होंने पानी मांगा। परिवार के लोगों ने इलाज के लिए ले जाने की तैयारी की, लेकिन इस बीच उन्होंने दम तोड़ दिया।  

रामस्वरूप की जान पर भारी पड़ी फसली क्षति
खुटार। नगर के मोहल्ला कोट निवासी 50 वर्षीय रामस्वरूप के पास मात्र पांच बीघा जमीन थी। शुक्रवार को गेहूं कटा तो मात्र 70 किलो गेहूं निकला। इससे रामस्वरूप को सदमा पहुंचा। बेटी की शादी और ऊपर से फसल खराब हो जाने पर वह काफी परेशान थे। शनिवार सुबह अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। इससे परिवार में कोहराम मच गया। रामस्वरूप के आठ बच्चे हैं। पांच की शादी हो चुकी है। एक पुत्री शिल्पी की शादी उन्होंने गोला में तय की थी। सोमवार को शिल्पी की गोद भराई की रस्म होनी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियां कर रहे थे। रामस्वरूप की मौत से खुशी का माहौल गम में बदल गया है।

बर्बादी देख थम र्गइं रामभजन की सांसें
खुटार। गांव सिल्हुआ निवासी 60 वर्षीय रामभजन की पत्नी फूलमती छह माह से गुर्दा और लीवर की बीमारी से पीड़ित थीं। उनके इलाज में घर का सारा जेवर बिक गया और परिवार पर 80 हजार रुपए का कर्ज भी चढ़ गया। इससे रामभजन काफी परेशान थे। दो एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल से उन्हें काफी उम्मीदें थीं।
शुक्रवार को गेहूं घर पहुंचा। पुत्र संतोष ने पिता को बताया कि दो एकड़ में मात्र नौ क्विंटल गेहूं की निकला है। इसके बाद रामभजन गुमसुम हो गए। शुक्रवार रात उनकी तबियत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें खुटार में निजी डॉक्टर के यहां ले गए। वहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी घर पहुंची तो कोहराम मच गया। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

खेत से लौटते समय चल बसे जयवीर
निगोही। गांव महोलिया निवासी 45 वर्षीय जयवीर सिंह ने पांच बीघा खेत में बोई गई गेहूं फसल की शुक्रवार को कंबाइन से कटाई कराई। शाम को वह खेत पर उपज देखने गए, लेकिन सिर्फ ढाई क्विंटल गेहूं देखकर सन्न रह गया। पड़ोस के दूसरे खेत से बालियां लेकर हाथ में मसलीं तो गेहूं के कुछ दाने देख उन्हें फसल की बर्बादी का अहसास हुआ। वह हिम्मत करके घर जाने को उठे, लेकिन देर रात तक घर नहीं पहुंचे। घरवालों ने उन्हें तलाश किया तो गांव के ही सत्यप्रकाश के गन्ने के खेत की मेड़ के पास उनका निर्जीव शरीर पड़ा मिला। मृतक के बेटे मोनू के अनुसार पैत्रक जमीन से भरण-पोषण नहीें हो पाने से जयवीर ने 50 हजार रुपये में पांच बीघा जमीन ठेके पर ली थी और रकम फसल पर देना तय हुआ था। एलडीबी का 70 हजार रुपये कर्ज पहले से था। बेटे मोनू की दो माह पहले हुई शादी के लिए भी गांववालों से सवा लाख रुपये उधार लिए थे। उनकी मौत से पत्नी उन्नति देवी, दो बेटों और अविवाहित बेटी का रोते-रोते बुरा हाल हो गया।


33336 किसानों को मिले 13.35 करोड़ के चेक
फसली नुकसान से किसानों की असमय मौत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने राहत राशि का वितरण कार्य तेज कर दिया है। शनिवार को सदर तहसील में 1915 किसानों को 67.02 लाख रुपये और पुवायां में 243 किसानों को 45.31 लाख रुपये के चेक दिए गए। डीएम शुभ्रा सक्सेना केअनुसार जिले में अब तक 33336 प्रभावित किसानों को 13.35 करोड़ रुपये के चेक दिए जा चुके हैं।
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