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रात में भी थे निगरानी के निर्देश पर साहब दिन में भी आंखे मूंदे रहे
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शाहजहांपुर। दो दशक पहले जनपद की महायोजना में लोधीपुर के खन्नौत पुल से लेकर सूफी संत हजरत बूलनशाह मियां की दरगाह तक नदी के किनारे 119 गाटा नंबरों की जमीनों को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के तौर पर परिभाषित किया गया था, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते वहां अब तमाम पक्के मकान और दुकानें बना ली गई हैं। यही नहीं, करीब एक दशक पहले तत्कालीन डीएम नवदीप रिणवा ने नदी के किनारे की जमीनों पर अवैध निर्माण रोकने के लिए रात में और अवकाश के दिनों में खन्नौत के तटवर्ती क्षेत्र पर नजर रखने के निर्देश भी दिए, लेकिन संबंधित अधिकारी दिन में भी आंखें मूंदे रहे और अधिकांश गाटा नंबर अवैध कब्जों से घिर गए। अमर उजाला ने इस पर बृहस्पतिवार को विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की तो प्रशासन को भी सुध आई और अधिकारियों ने अवैध निर्माण की जांच शुरू करा दी।
दरअसल महानगर दोनों नदियों से घिरा होने के कारण शहरी क्षेत्र में ऐसे भूखंड नहीं बचे हैं, जहां नई कॉलोनियां बनाई जा सकें। शहर के मूल बाशिंदे नदी पार अथवा अन्य बाहरी इलाकों में रहना नहीं चाहते। नतीजे मेें मकान बनाने को लोगों ने खन्नौत के किनारे की बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में शामिल कृषि योग्य जमीनों के बैनामें कराकर उन पर मकान बनाने शुरू कर दिए। खास यह है कि जिन किसानों से जमीनें खरीदी गईं, उन्होंने भी ऐसी जमीनों का अधिकृत तौर पर राजस्व न्यायालयों से उप विभाजन नहीं कराया। नदी के किनारे की जमीन पर कब्जा कर एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी को वहां मकान और दुकानें बनाने पर तत्कालीन विनियमित क्षेत्र प्राधिकारी के स्तर से नोटिस जारी होने के बाद शुरू हुई मुकदमेबाजी के दौरान अधिकारियों द्वारा किए गए शसकीय पत्राचार से भी इसकी पुष्टि होती है।
निबंधन कार्यालय को बैनामा रोकने के दिए गए थे निर्देश
अक्तूबर 2009 में विनियमित क्षेत्र के तत्कालीन नियत प्राधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट ने सदर क्षेत्र के उप निबंधक को पत्र (संख्या 275/आरएसी/2009-10) भेजकर स्पष्ट किया था कि मोहल्ला लोधीपुर में खन्नौत नदी के पुल से मजार शरीफ तक का क्षेत्र शाहजहांपुर महायोजना मेें बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के रूप में परिभाषित है। इस क्षेत्र के अधीन किसी भी प्रकार का कोई निर्माण महायोजना के प्रावधानों के अनुरूप अनुमन्य नहीं है। देखा गया है कि इस क्षेत्र की कृषि भूमि को अनधिकृत रूप से उप विभाजन करके आवासीय प्लॉट के तौर पर विक्रय कर दिया जाता है और इस प्रकार खरीदे गए प्लाट पर भूखंड स्वामियों/अध्यासियों द्वारा समय-समय पर अनधिकृत भवन निर्माण कराए जा रहे हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए पत्र में गाटा संख्या 152 से 256 तक 103 नंबरों और गाटा संख्या 1665 से 1681 तक 13 नंबरों का उल्लेख कर सब रजिस्ट्रार को इन भूखंडों के विक्रय विलेख (बैनामा) पंजीकृत नहीं करने के निर्देश दिए थे।
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रोजा एसओ और एसपी से भी हुआ था पत्राचार
खन्नौत के किनारे अवैध निर्माण रोकने के लिए जुलाई 2008 से तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट चंद्र प्रकाश सिंह ने रोजा एसओ से लेकर एसपी तक कई बार पत्राचार किया, लेकिन पुलिस अधिकारी शिथिलता बरतते हुए परोक्ष तौर पर अवैध निर्माण को बढ़ावा देते रहे। एसपी को भेजे पत्र (संख्या 352/आरएसी/2008-09) में सिटी मजिस्ट्रेट ने लिखा है कि नदी तट के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में कुछ लोग बिना अनुमति के अक्सर निर्माण कार्य प्रारंभ कर देते हैं। भविष्य में बाढ़ आने पर जन-धन की भारी हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी देखा गया है कि ऐसे निर्माण कार्य रात्रिकाल और सार्वजनिक अवकाश की अवधि में कराए जा रहे हैं। इसलिए ऐसे निर्माण कार्यों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाना अत्यावश्यक है।
लोधीपुर में खन्नौत नदी के किनारे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की कृषि योग्य जमीनों पर अवैध रूप से कराए गए पक्के निर्माण कार्यों की जांच कराई जा रही है। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के अभियंताओं को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विनीता सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट
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दरअसल महानगर दोनों नदियों से घिरा होने के कारण शहरी क्षेत्र में ऐसे भूखंड नहीं बचे हैं, जहां नई कॉलोनियां बनाई जा सकें। शहर के मूल बाशिंदे नदी पार अथवा अन्य बाहरी इलाकों में रहना नहीं चाहते। नतीजे मेें मकान बनाने को लोगों ने खन्नौत के किनारे की बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में शामिल कृषि योग्य जमीनों के बैनामें कराकर उन पर मकान बनाने शुरू कर दिए। खास यह है कि जिन किसानों से जमीनें खरीदी गईं, उन्होंने भी ऐसी जमीनों का अधिकृत तौर पर राजस्व न्यायालयों से उप विभाजन नहीं कराया। नदी के किनारे की जमीन पर कब्जा कर एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी को वहां मकान और दुकानें बनाने पर तत्कालीन विनियमित क्षेत्र प्राधिकारी के स्तर से नोटिस जारी होने के बाद शुरू हुई मुकदमेबाजी के दौरान अधिकारियों द्वारा किए गए शसकीय पत्राचार से भी इसकी पुष्टि होती है।
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निबंधन कार्यालय को बैनामा रोकने के दिए गए थे निर्देश
अक्तूबर 2009 में विनियमित क्षेत्र के तत्कालीन नियत प्राधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट ने सदर क्षेत्र के उप निबंधक को पत्र (संख्या 275/आरएसी/2009-10) भेजकर स्पष्ट किया था कि मोहल्ला लोधीपुर में खन्नौत नदी के पुल से मजार शरीफ तक का क्षेत्र शाहजहांपुर महायोजना मेें बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के रूप में परिभाषित है। इस क्षेत्र के अधीन किसी भी प्रकार का कोई निर्माण महायोजना के प्रावधानों के अनुरूप अनुमन्य नहीं है। देखा गया है कि इस क्षेत्र की कृषि भूमि को अनधिकृत रूप से उप विभाजन करके आवासीय प्लॉट के तौर पर विक्रय कर दिया जाता है और इस प्रकार खरीदे गए प्लाट पर भूखंड स्वामियों/अध्यासियों द्वारा समय-समय पर अनधिकृत भवन निर्माण कराए जा रहे हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए पत्र में गाटा संख्या 152 से 256 तक 103 नंबरों और गाटा संख्या 1665 से 1681 तक 13 नंबरों का उल्लेख कर सब रजिस्ट्रार को इन भूखंडों के विक्रय विलेख (बैनामा) पंजीकृत नहीं करने के निर्देश दिए थे।
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रोजा एसओ और एसपी से भी हुआ था पत्राचार
खन्नौत के किनारे अवैध निर्माण रोकने के लिए जुलाई 2008 से तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट चंद्र प्रकाश सिंह ने रोजा एसओ से लेकर एसपी तक कई बार पत्राचार किया, लेकिन पुलिस अधिकारी शिथिलता बरतते हुए परोक्ष तौर पर अवैध निर्माण को बढ़ावा देते रहे। एसपी को भेजे पत्र (संख्या 352/आरएसी/2008-09) में सिटी मजिस्ट्रेट ने लिखा है कि नदी तट के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में कुछ लोग बिना अनुमति के अक्सर निर्माण कार्य प्रारंभ कर देते हैं। भविष्य में बाढ़ आने पर जन-धन की भारी हानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी देखा गया है कि ऐसे निर्माण कार्य रात्रिकाल और सार्वजनिक अवकाश की अवधि में कराए जा रहे हैं। इसलिए ऐसे निर्माण कार्यों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाना अत्यावश्यक है।
लोधीपुर में खन्नौत नदी के किनारे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की कृषि योग्य जमीनों पर अवैध रूप से कराए गए पक्के निर्माण कार्यों की जांच कराई जा रही है। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के अभियंताओं को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विनीता सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट