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‘बुराइयों का संहार करते हैं शिव’
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 23 Aug 2015 11:38 PM IST
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खिरनीबाग रामलीला मैदान में चल रही शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन काशी के विद्वान शिव कथा मर्मज्ञ प्रशांत प्रभु ने कहा कि भगवान भोलेनाथ को संहार का देवता माना जाता है, लेकिन वह अपने भक्तों को अभयदान देकर लोकहित में बुराइयों का संहार करते हैं।
कथा व्यास ने श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में शिव कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि भोलेनाथ के स्वरूप और पूजा पद्धति से ही प्रतीत होता है कि वह उपेक्षितों के भगवान हैं। अन्य देवी-देवताओं की तुलना में आदि देव महादेव की पूजा अत्यंत सरल है। उनके लिए पुष्प मालाओं और पकवानों की जरूरत ही नहीं है। भोलेनाथ तो बेलपत्र, धतूरे, भांग आदि से ही संतुष्ट हो जाते हैं। उनकी पोशाक भी लुभावनी नहीं होती। वह स्वर्ण मुकुट के बजाय जटा-जूट धारण करते हैं और गले में सर्पों के हार ही शोभायमान रहते हैं। वह अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भोलेनाथ के प्रतिनिधि भी वही है, जो आम समाज में उपेक्षित माने जाते हैं। शिव ने देवताओं को बचाने के लिए विष का पान किया और नीलकंठ कहलाने लगे।
प्रशांत प्रभु ने कांवड़ के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा: संतों ने मनुष्य की काया को घट और उसमें बसे प्राण को जल बताया है। कायारूपी घट को भक्ति रूपी गंगाजल से भरना भी कांवड़ का अध्यात्म कहा गया है। आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में उद्योगपति रामचंद्र सिंघल सपत्नीक मौजूद रहे। जबकि व्यवस्था में संयोजक हरिशरण वाजपेयी, विश्वमोहन वाजपेयी, नरेंद्र सक्सेना, नीरज वाजपेयी, सतीश वर्मा, अशोक सिंह, रजत सक्सेना, विवेक त्रिवेदी, सीमा, पिंकी, शैफाली आदि का योगदान रहा।
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आज दो बजे से होगा रुद्राभिषेक
संयोजक नीरज वाजपेयी ने बताया कि सोमवार को अपराह्न दो बजे से कच्ची मिट्टी से पार्थिव रुद्र शिवलिंग निर्मित कर उनका अभिषेक किया जाएगा। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया है कि वह पार्थिव रुद्राभिषेक में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य कमाएं।
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कथा व्यास ने श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में शिव कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि भोलेनाथ के स्वरूप और पूजा पद्धति से ही प्रतीत होता है कि वह उपेक्षितों के भगवान हैं। अन्य देवी-देवताओं की तुलना में आदि देव महादेव की पूजा अत्यंत सरल है। उनके लिए पुष्प मालाओं और पकवानों की जरूरत ही नहीं है। भोलेनाथ तो बेलपत्र, धतूरे, भांग आदि से ही संतुष्ट हो जाते हैं। उनकी पोशाक भी लुभावनी नहीं होती। वह स्वर्ण मुकुट के बजाय जटा-जूट धारण करते हैं और गले में सर्पों के हार ही शोभायमान रहते हैं। वह अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भोलेनाथ के प्रतिनिधि भी वही है, जो आम समाज में उपेक्षित माने जाते हैं। शिव ने देवताओं को बचाने के लिए विष का पान किया और नीलकंठ कहलाने लगे।
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प्रशांत प्रभु ने कांवड़ के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा: संतों ने मनुष्य की काया को घट और उसमें बसे प्राण को जल बताया है। कायारूपी घट को भक्ति रूपी गंगाजल से भरना भी कांवड़ का अध्यात्म कहा गया है। आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में उद्योगपति रामचंद्र सिंघल सपत्नीक मौजूद रहे। जबकि व्यवस्था में संयोजक हरिशरण वाजपेयी, विश्वमोहन वाजपेयी, नरेंद्र सक्सेना, नीरज वाजपेयी, सतीश वर्मा, अशोक सिंह, रजत सक्सेना, विवेक त्रिवेदी, सीमा, पिंकी, शैफाली आदि का योगदान रहा।
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आज दो बजे से होगा रुद्राभिषेक
संयोजक नीरज वाजपेयी ने बताया कि सोमवार को अपराह्न दो बजे से कच्ची मिट्टी से पार्थिव रुद्र शिवलिंग निर्मित कर उनका अभिषेक किया जाएगा। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया है कि वह पार्थिव रुद्राभिषेक में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्य कमाएं।