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गांव का विकास जल्द न हुआ तो करेंगे चुनाव बहिष्कार
खेड़ा बझेड़ा (शाहजहांपुर)।
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:54 PM IST
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जैतीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत शंकरपुर पिटरहाई के मजरा बेहरिया के ग्रामीणों ने गांव की गलियों की कीचड़ में खड़े होकर पंचायत चुनाव का बहिष्कार करते हुए अपने दुखों का बयान किया। पूरे गांव में करीब 40 घर हैं और चार गलियां, लेकिन कोई भी गली ऐसी नहीं जिससे पैदल निकला जा सके। ग्रामीणों का गांव में आने का एक मात्र रास्ता जो कि शंकरपुर पिटरहाई जो कि नीम डांडी बाखरपुर व गोगेपुर को जाता है। ग्रामीण बताते हैं जब शिव तेरस को गोगेपुर में शिवमंदिर पर बारह दिन के मेले का आयोजन होता है जहां कई क्षेत्र के तमाम ग्रामीण इसी रास्ते से होकर जाते हैं जिन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि कोई भी अधिकारी कर्मचारी गांव के किसी काम को आता भी है तो वह केवल पिटरहाई गांव में ही बैठ कर कार्य कर लेता है। गांव में आने की जहमत नहीं उठाता। सबसे बड़ी बात इस गांव का अभी तक बिजलीकरण नहीं हुआ है। आजादी के बाद भी ग्रामीण रात के अंधेरे में जी रहे हैं। आसपास उजाला देख बच्चे भी अपने गांव में बिजली का बल्व जलते देखना चाहते हैं। पढ़ाई करने के लिए बच्चों को ढिबरी का सहारा ही लेना पड़ता है। गांव में केवल तीन हैंडपंप हैं, जिसमें एक पानी देता है दूसरा काफी समय से कीचड़ में दबा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी जब वोट बनाए गए तो कोई भी बीएलओ गांव में नहीं आया। गांव के कल्लू, हरिओम, पप्पू, शंकर, अमरपाल, जगनलाल, राजाराम, ऋषिपाल, रामविलास, जोधा, नन्न्हेलाल, रमेश, रामवती, ऊषा, मीरा, मैना, गीता आदि ने बताया कि यदि पंचायत चुनाव से पहले गांव के हालात नहीं बदले तो पूरी ग्राम पंचायत चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। जब उधर, ग्राम विकास अधिकारी नरेश यादव का कहना है गांव का खड़ंजा ठीक नहीं है और अभी खाते में पैसा नहीं है। पैसा आने पर कार्य कराया जाएगा।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि कोई भी अधिकारी कर्मचारी गांव के किसी काम को आता भी है तो वह केवल पिटरहाई गांव में ही बैठ कर कार्य कर लेता है। गांव में आने की जहमत नहीं उठाता। सबसे बड़ी बात इस गांव का अभी तक बिजलीकरण नहीं हुआ है। आजादी के बाद भी ग्रामीण रात के अंधेरे में जी रहे हैं। आसपास उजाला देख बच्चे भी अपने गांव में बिजली का बल्व जलते देखना चाहते हैं। पढ़ाई करने के लिए बच्चों को ढिबरी का सहारा ही लेना पड़ता है। गांव में केवल तीन हैंडपंप हैं, जिसमें एक पानी देता है दूसरा काफी समय से कीचड़ में दबा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी जब वोट बनाए गए तो कोई भी बीएलओ गांव में नहीं आया। गांव के कल्लू, हरिओम, पप्पू, शंकर, अमरपाल, जगनलाल, राजाराम, ऋषिपाल, रामविलास, जोधा, नन्न्हेलाल, रमेश, रामवती, ऊषा, मीरा, मैना, गीता आदि ने बताया कि यदि पंचायत चुनाव से पहले गांव के हालात नहीं बदले तो पूरी ग्राम पंचायत चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। जब उधर, ग्राम विकास अधिकारी नरेश यादव का कहना है गांव का खड़ंजा ठीक नहीं है और अभी खाते में पैसा नहीं है। पैसा आने पर कार्य कराया जाएगा।
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