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Shahjahanpur News: घर में भूख-प्यास और गर्मी की मार...छोड़कर गए तो चोरों का डर
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शाहजहांपुर। लगातार दूसरे वर्ष बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे लोग फंसे होने के बावजूद मकान छोड़कर जाने का फैसला नहीं कर पा रहे। लोग भूख-प्यास और गरमी से परेशान हैं। फिर भी चोरों के डर से कहीं जा नहीं रहे। घरों में बच्चे और बुजुर्ग जरूरी चीजों की किल्लत का सामना कर रहे हैं।
खन्नौत नदी किनारे बसे लोधीपुर के साथ बृजविहार कॉलोनी, लौका विहार कॉलोनी आदि मोहल्लों के लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। शुक्रवार तक गर्रा नदी का पानी भरने से सुभाषनगर, ककरा, अजीजगंज, उमरगंज, अब्दुल्लागंज के लोग दहशत में आ गए हैं। लोगों के सामने दो विकल्प हैं। या तो कुछ दिनों के लिए मकान छोड़कर कहीं चले जाएं या फिर वहीं रुके रहें।
क्षेत्र में बिजली आ नहीं रही। गरमी और उमस में न घर के अंदर चैन आ रहा है और न ही छत पर। चारों तरफ पानी भरा होने से सांप-बिच्छू, जहरीले जीवों का खतरा है। घर की नाली का पानी पास नहीं हो रहा। ऐसे में नहाने और नित्यक्रिया का संकट खड़ा हो गया है। साफ पानी न मिलने से पीने और खाना बनाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
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धीरे-धीरे कर मोबाइल की बैटरी खत्म हो रही है। इससे बाहर से मदद मिलने में भी दिक्कत आ जाएगी। लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा की है। गत वर्ष जब कई लोग मकान छोड़कर गए तो चोर घुस गए। सुभाषनगर कॉलोनी के लोगों ने बताया कि पिछले साल कई लोगों के घरों में चोरी हुई थी।
इसी दहशत में लोग बुरी तरह फंसे होने के बावजूद मकान छोड़कर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जिन लोगों के मकान एकमंजिला हैं, उनमें से अधिकतर लोग चले गए हैं। जिन लोगों के मकान की दो मंजिल बनीं हैं, उन्होंने सामान ऊपर शिफ्ट कर दिया है। इस उम्मीद में समय काट रहे हैं कि जल्द पानी घटे और उन्हें नरक से निजात मिले। वहीं, प्रशासन की टीमें मोटरबोट से घर-घर जाकर लोगों से शरणालय में जाने की अपील कर रहीं हैं लेकिन लोग मान नहीं रहे। संवाद
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एक व्यक्ति के हवाले छोड़ा मकान
कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने घर के बुजुर्ग या किसी एक व्यक्ति को घर में छोड़कर दूसरे स्थान पर शरण ली है। वे दिन में एक बार किसी तरह घर तक पहुंचकर खाने-पीने का सामान दे जाते हैं। सुभाषनगर कॉलोनी के सोनू ने बताया कि घर में मां को छोड़ा हुआ है क्योंकि जहां रिश्तेदारी में उनका परिवार रुका हुआ है, वो घर तीसरी मंजिल में है। वहां मां चढ़कर नहीं जा सकतीं। उन्होंने बताया कि वह सुबह-शाम नाव से घर तक आकर खाने-पीने का सामान दे जाते हैं। इसी तरह घर के अंदर रह रहे लोगों को उनके रिश्तेदार या मित्र जरूरत का सामान किसी तरह पहुंचा रहे हैं।
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लोगों में आक्रोश
गत वर्ष आई बाढ़ को एक आपदा मानकर भुलाने की कोशिश कर चुके लोग फिर से वैसे ही हालात पैदा होने पर शासन-प्रशासन से नाराज हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बाढ़ से बचाव का एक भी इंतजाम नहीं किया है। अब जब घरों में पानी भर गया है तो नाव या खाने-पीने का सामान भिजवाया जा रहा है। पुख्ता इंतजाम किए होते तो ऐसे हालात पैदा ही न होते।
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खन्नौत नदी किनारे बसे लोधीपुर के साथ बृजविहार कॉलोनी, लौका विहार कॉलोनी आदि मोहल्लों के लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। शुक्रवार तक गर्रा नदी का पानी भरने से सुभाषनगर, ककरा, अजीजगंज, उमरगंज, अब्दुल्लागंज के लोग दहशत में आ गए हैं। लोगों के सामने दो विकल्प हैं। या तो कुछ दिनों के लिए मकान छोड़कर कहीं चले जाएं या फिर वहीं रुके रहें।
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क्षेत्र में बिजली आ नहीं रही। गरमी और उमस में न घर के अंदर चैन आ रहा है और न ही छत पर। चारों तरफ पानी भरा होने से सांप-बिच्छू, जहरीले जीवों का खतरा है। घर की नाली का पानी पास नहीं हो रहा। ऐसे में नहाने और नित्यक्रिया का संकट खड़ा हो गया है। साफ पानी न मिलने से पीने और खाना बनाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
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धीरे-धीरे कर मोबाइल की बैटरी खत्म हो रही है। इससे बाहर से मदद मिलने में भी दिक्कत आ जाएगी। लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा की है। गत वर्ष जब कई लोग मकान छोड़कर गए तो चोर घुस गए। सुभाषनगर कॉलोनी के लोगों ने बताया कि पिछले साल कई लोगों के घरों में चोरी हुई थी।
इसी दहशत में लोग बुरी तरह फंसे होने के बावजूद मकान छोड़कर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जिन लोगों के मकान एकमंजिला हैं, उनमें से अधिकतर लोग चले गए हैं। जिन लोगों के मकान की दो मंजिल बनीं हैं, उन्होंने सामान ऊपर शिफ्ट कर दिया है। इस उम्मीद में समय काट रहे हैं कि जल्द पानी घटे और उन्हें नरक से निजात मिले। वहीं, प्रशासन की टीमें मोटरबोट से घर-घर जाकर लोगों से शरणालय में जाने की अपील कर रहीं हैं लेकिन लोग मान नहीं रहे। संवाद
एक व्यक्ति के हवाले छोड़ा मकान
कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने घर के बुजुर्ग या किसी एक व्यक्ति को घर में छोड़कर दूसरे स्थान पर शरण ली है। वे दिन में एक बार किसी तरह घर तक पहुंचकर खाने-पीने का सामान दे जाते हैं। सुभाषनगर कॉलोनी के सोनू ने बताया कि घर में मां को छोड़ा हुआ है क्योंकि जहां रिश्तेदारी में उनका परिवार रुका हुआ है, वो घर तीसरी मंजिल में है। वहां मां चढ़कर नहीं जा सकतीं। उन्होंने बताया कि वह सुबह-शाम नाव से घर तक आकर खाने-पीने का सामान दे जाते हैं। इसी तरह घर के अंदर रह रहे लोगों को उनके रिश्तेदार या मित्र जरूरत का सामान किसी तरह पहुंचा रहे हैं।
लोगों में आक्रोश
गत वर्ष आई बाढ़ को एक आपदा मानकर भुलाने की कोशिश कर चुके लोग फिर से वैसे ही हालात पैदा होने पर शासन-प्रशासन से नाराज हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बाढ़ से बचाव का एक भी इंतजाम नहीं किया है। अब जब घरों में पानी भर गया है तो नाव या खाने-पीने का सामान भिजवाया जा रहा है। पुख्ता इंतजाम किए होते तो ऐसे हालात पैदा ही न होते।