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काश! पैसे मिल जाते तो बच जाती जान
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:34 PM IST
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जैतीपुर क्षेत्र के गांव बझेड़ा भगवानपुर के दुली गुप्ता की 55 वर्षीय पत्नी करिश्मा करीब पंद्रह दिनों से बीमार चल रही थीं। डॉक्टर ने जब जांच के लिए लिखा तो वह खेड़ा बझेड़ा के डाकघर से पैसा निकालने के लिए तीन दिन तक चक्कर काटते रहे, लेकिन डाकघर में कैश न होने की बात कहकर उन्हें टाला जाता रहा। दुली ने बताया कि बैंकों में भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए उन्होंने नौ हजार रुपये डाकघर में जमा कर दिए ताकि जरूरत पर पैसा निकाल सकें। बोले, अफसोस इस बात का है कि अगर डाकघर से पांच सौ रुपये भी मिल गए होते तो उनकी पत्नी की जान बच सकती थी।
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