{"_id":"6406a6769e40773a05069166","slug":"holika-dahan-will-happen-today-in-pradosh-period-colors-will-be-played-tomorrow-shahjahanpur-news-c-4-1-86010-2023-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: प्रदोष काल में आज होगा होलिका दहन, कल खेला जाएगा रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: प्रदोष काल में आज होगा होलिका दहन, कल खेला जाएगा रंग
Tue, 07 Mar 2023 08:20 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 07 Mar 2023 08:20 AM IST
विज्ञापन
शाहजहांपुर। रंग होली की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। गली-मोहल्लों और चौराहों पर होलिका रख दी गई है। होलिका दहन मंगलवार को होगा और बुधवार को रंग खेला जाएगा। होलिका दहन के लिए प्रदोष काल में शाम 5:57 से 6:45 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में किया जाए तो सबसे शुभ माना जाता है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सोमवार को शाम 04:17 मिनट पर हो चुकी है। इसका समापन मंगलवार को शाम 06:09 मिनट पर होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त मंगलवार को शाम 5:57 से रात 6:45 बजे तक रहेगा। भद्रा काल का समय सोमवार को शाम 04:18 से मंगलवार को सुबह 05:13 बजे तक है।
नैमिष के आचार्य सत्यम दीक्षित बताते है कि कुछ विद्वानों का मानना है कि निसिथ व्यापिनी भद्रा हो तो भद्रा मुख त्याग करके होलिका प्रदीप्त करना चाहिए, लेकिन यह स्थिति तब लागू होती है जब पूर्णिमा तिथि अगले दिन प्रदोष काल को स्पर्श न करे। होलिका दहन प्रदोष काल में व्याप्त पूर्णिमा एवं भद्रारहित होता है। इसलिए सात मार्च सोमवार को भद्रारहित प्रदोष काल में व्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त है, होलिका दहन शाम को 5:57 से 6:45 बजे तक शास्त्र सम्मत होगा।
विज्ञापन
-- -- -
होलिका पूजन का समय
धार्मिक ग्रंथों में होलिका दहन से पहले उसकी पूजा का सुझाव दिया गया है। जोकि उचित समय पर करना चाहिए। इस बार होलिका पूजन के लिए शुभ समय मंगलवार को सुबह 10:14 से दोपहर 12:00 बजे तक है।
-- -- -
पूजा सामग्री
एक कटोरी जल, गाय के गोबर से बनी माला, रोली, चावल जो टूटे नहीं हों, अगरबत्ती या धूप, फूल, कच्चे सूती धागे, हल्दी टुकड़े, मूंग की साबुत दाल, बताशा, गुलाल पाउडर और नारियल, साथ ही गेहूं और चना जैसी ताजी फसलों के पूर्ण विकसित अनाज इन सब से विधिवत पूजन करें।
विज्ञापन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में किया जाए तो सबसे शुभ माना जाता है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सोमवार को शाम 04:17 मिनट पर हो चुकी है। इसका समापन मंगलवार को शाम 06:09 मिनट पर होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त मंगलवार को शाम 5:57 से रात 6:45 बजे तक रहेगा। भद्रा काल का समय सोमवार को शाम 04:18 से मंगलवार को सुबह 05:13 बजे तक है।
विज्ञापन
नैमिष के आचार्य सत्यम दीक्षित बताते है कि कुछ विद्वानों का मानना है कि निसिथ व्यापिनी भद्रा हो तो भद्रा मुख त्याग करके होलिका प्रदीप्त करना चाहिए, लेकिन यह स्थिति तब लागू होती है जब पूर्णिमा तिथि अगले दिन प्रदोष काल को स्पर्श न करे। होलिका दहन प्रदोष काल में व्याप्त पूर्णिमा एवं भद्रारहित होता है। इसलिए सात मार्च सोमवार को भद्रारहित प्रदोष काल में व्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त है, होलिका दहन शाम को 5:57 से 6:45 बजे तक शास्त्र सम्मत होगा।
विज्ञापन
होलिका पूजन का समय
धार्मिक ग्रंथों में होलिका दहन से पहले उसकी पूजा का सुझाव दिया गया है। जोकि उचित समय पर करना चाहिए। इस बार होलिका पूजन के लिए शुभ समय मंगलवार को सुबह 10:14 से दोपहर 12:00 बजे तक है।
पूजा सामग्री
एक कटोरी जल, गाय के गोबर से बनी माला, रोली, चावल जो टूटे नहीं हों, अगरबत्ती या धूप, फूल, कच्चे सूती धागे, हल्दी टुकड़े, मूंग की साबुत दाल, बताशा, गुलाल पाउडर और नारियल, साथ ही गेहूं और चना जैसी ताजी फसलों के पूर्ण विकसित अनाज इन सब से विधिवत पूजन करें।