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आज मध्यरात्रि में होगा होलिका दहन, 18 व 19 दोनों दिन खेला जाएगा रंग

Thu, 17 Mar 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Mar 2022 12:48 AM IST
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Holika Dahan will be held at midnight today, colors will be played on both 18th and 19th day
शाहजहांपुर के टाउन हाल ओबरब्रिज मार्ग पर रखी होली । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। ज्योतिष के अनुसार बृहस्पतिवार 17 मार्च की मध्यरात्रि 12.57 बजे के बाद होलिका दहन का मुहूर्त बन रहा है। वहीं, इस बार रंगों की होली 18 व 19 मार्च दोनों ही दिन खेली जाएगी।
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प्रमुख त्योहार होने के कारण होली मनाने को लेकर लोगों को काफी उत्साह रहता है। रात को होलिका दहन के बाद सुबह आखत डाली जाती है। फिर सभी लोग एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेलकर होली मनाते हैं। इस बार भी आखत डालने के बाद से ही होली का रंग शुरू हो जाएगा। तो अगले दिन भी रंग खेला जा सकेगा। चौक मंडी स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 17 मार्च बृहस्पतिवार को दोपहर 1.13 बजे से आरंभ होकर 18 मार्च शुक्रवार को दोपहर 1.03 बजे तक रहेगी।
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होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में रात को भद्रा मुक्त काल में होता है। 17 मार्च की मध्यरात्रि बनारसी पंचांग के अनुसार 12.57 बजे तथा मिथिला पंचांग के मुताबिक रात 1.09 बजे तक भद्रा रहेगा। ऐसे में होलिका दहन का पुनीत कार्य इसके बाद किया जाएगा। व्रत की पूर्णिमा 17 मार्च को तथा स्नान-दान की पूर्णिमा 18 मार्च को रहेगी। इसके बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो जाएगी, जोकि 19 मार्च शनिवार तक रहेगी। ऐसे में दोनों ही दिन रंग खेला जाएगा। 19 मार्च को हस्त नक्षत्र व वृद्धि योग बन रहा है।
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होलिका दहन को लेकर मान्यता
मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को मारने के लिए बहन होलिका को आदेश दिया था कि वह उसको गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, लेकिन ईश्वर की भक्ति में लीन प्रह्लाद बच गए। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।

इस तरह करें होली पूजन
होलिका दहन से पहले होली का पूजन किया जाता है। पं. अरुण शुक्ला ने बताया कि पूजन सामग्री में एक लोटा गंगाजल यदि उपलब्ध न हो तो ताजा जल भी लिया जा सकता है। रोली, माला, रंगीन अक्षत, धूप या अगरबत्ती, पुष्प, नई फसल के अनाज गेहूं की बालियां, पके चने आदि शामिल करें। श्रद्धा से होलिका के चारों और परिक्रमा करते हुए कच्चे सूत को लपेटें। तीन से सात बार होलिका की परिक्रमा करें। शुद्ध जल सहित अन्य पूजा सामग्रियों को एक-एक कर होलिका को अर्पित करें। होली का पूजन कर जल से अर्घ्य दें और दहन के बाद होलिका में कच्चे आम, नारियल, सतनाज, चीनी के खिलौने, नई फसल इत्यादि की आहुति दें। सतनाज में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, चावल जौ और मसूर शामिल की जा सकती है।
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