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पर्यावरण दिवस पर भी चली पेड़ों पर कुल्हाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Tue, 06 Jun 2017 12:06 AM IST
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कटान
- फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
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विश्व पर्यावरण दिवस पर एक तरफ जहां पौध लगाए जा रहे थे, पेड़, पौधों की रक्षा करने का संकल्प लिया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ वनकर्मियों की मिलीभगत से पेड़ों पर कुल्हाड़ा चल रहा था।
खुटार रेंज में जंगल से पेड़ों का कटान खुलेआम होता रहता है। यहां तैनात अधिकारी, कर्मचारी अंगद के पांव की तरह जम जाते हैं और तबादला होने पर जुगाड़ लगा कर यहीं बने रहना चाहते हैं। खुटार रेंज के बेहद घने जंगल अब बाग में तब्दील हो गए हैं, जो पेड़ हैं उनमें भी टहनी नहीं रह गई है। विश्व पर्यावरण दिवस पर भी पेड़ों का कटान रुकवाने का प्रयास नहीं किया गया। रोजाना की तरह लकड़कट्टे पेड़ों का काटकर ले जाते देखे गए।
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खुटार का रायटोला मोहल्ला बना लकड़ी माफिया का गढ़
खुटार का रायटोला मोहल्ला लकड़ी माफिया का गढ़ हैं। यहां रोजाना कई टन कोरों की बेशकीमती लकड़ी काटकर लाई जाती है और उसे चीरकर ईंधन के रूप में बेच दिया जाता है। लकड़ी लाने वाले लोग वनकर्मियों को हफ्ता देते हैं जिस कारण कोई भी लकड़ी काटने वालों से रोक टोक नहीं करता है। इस मोहल्ले में सुबह और शाम लकड़ी से भरी ठेली नगर के विभिन्न हिस्सों में ले जाते देखी जा सकती हैं। कुछ भट्ठा स्वामी और राइस मिलर भी जंगल की लकड़ी को खरीदकर बॉयलर में झुकवाते हैं।
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अब नजर नहीं आते वन्य पशु
वन कर्मियों को साथ लेकर क्षेत्र के शौकीन मिजाज शिकारी निरीह वन्य पशुओं का निरंकुश होकर शिकार करते हैं। यहां से शुरू होकर जंगलों का विस्तृत सिलसिला मैलानी, भीरा, पलिया होते हुए दुधवा नेशनल पार्क तक जाता है। कभी सुअर, बारहसिंगा, चीतल, सियार, खरगोश, जंगली मुर्गों और पाड़ा आदि वन्य पशुओं की भरमार वाले इन जंगलों में ये वन्य प्राणी अब नजर नहीं आते हैं।
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आम के बागों का भी हो गया सफाया
उद्यान विभाग और वनकर्मियों, पुलिस की मिली भगत से तहसील भर में आम के तमाम हरे-भरे बाग माफिया ने कटवा डाले हैं। पुवायां में गांव धारा के पास, पुवायां नगर के पास बाग, बंडा में कई बाग और खुटार के गांव बेला आदि में आम के पेड़ों का सफाया हो गया है। सूत्र बताते हैं कि माफिया से साठगांठ के चलते उद्यान विभाग के कुछ कर्मचारी आम के पेड़ों को सूखा और गैर फलदार दर्शाकर रिपोर्ट लगा देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग पेड़ को काटने का परमिट जारी कर देता है। बाग कटान की शिकायत उच्चाधिकारियों से किए जाने पर माफिया के खिलाफ जुर्माने आदि की कार्रवाई कर मामले को रफादफा कर दिया जाता है। रेंजर एसएप यादव का कहना है कि जंगल की पूरी देखभाल की जाती है। कटान की सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाती है।
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खुटार रेंज में जंगल से पेड़ों का कटान खुलेआम होता रहता है। यहां तैनात अधिकारी, कर्मचारी अंगद के पांव की तरह जम जाते हैं और तबादला होने पर जुगाड़ लगा कर यहीं बने रहना चाहते हैं। खुटार रेंज के बेहद घने जंगल अब बाग में तब्दील हो गए हैं, जो पेड़ हैं उनमें भी टहनी नहीं रह गई है। विश्व पर्यावरण दिवस पर भी पेड़ों का कटान रुकवाने का प्रयास नहीं किया गया। रोजाना की तरह लकड़कट्टे पेड़ों का काटकर ले जाते देखे गए।
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खुटार का रायटोला मोहल्ला बना लकड़ी माफिया का गढ़
खुटार का रायटोला मोहल्ला लकड़ी माफिया का गढ़ हैं। यहां रोजाना कई टन कोरों की बेशकीमती लकड़ी काटकर लाई जाती है और उसे चीरकर ईंधन के रूप में बेच दिया जाता है। लकड़ी लाने वाले लोग वनकर्मियों को हफ्ता देते हैं जिस कारण कोई भी लकड़ी काटने वालों से रोक टोक नहीं करता है। इस मोहल्ले में सुबह और शाम लकड़ी से भरी ठेली नगर के विभिन्न हिस्सों में ले जाते देखी जा सकती हैं। कुछ भट्ठा स्वामी और राइस मिलर भी जंगल की लकड़ी को खरीदकर बॉयलर में झुकवाते हैं।
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अब नजर नहीं आते वन्य पशु
वन कर्मियों को साथ लेकर क्षेत्र के शौकीन मिजाज शिकारी निरीह वन्य पशुओं का निरंकुश होकर शिकार करते हैं। यहां से शुरू होकर जंगलों का विस्तृत सिलसिला मैलानी, भीरा, पलिया होते हुए दुधवा नेशनल पार्क तक जाता है। कभी सुअर, बारहसिंगा, चीतल, सियार, खरगोश, जंगली मुर्गों और पाड़ा आदि वन्य पशुओं की भरमार वाले इन जंगलों में ये वन्य प्राणी अब नजर नहीं आते हैं।
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आम के बागों का भी हो गया सफाया
उद्यान विभाग और वनकर्मियों, पुलिस की मिली भगत से तहसील भर में आम के तमाम हरे-भरे बाग माफिया ने कटवा डाले हैं। पुवायां में गांव धारा के पास, पुवायां नगर के पास बाग, बंडा में कई बाग और खुटार के गांव बेला आदि में आम के पेड़ों का सफाया हो गया है। सूत्र बताते हैं कि माफिया से साठगांठ के चलते उद्यान विभाग के कुछ कर्मचारी आम के पेड़ों को सूखा और गैर फलदार दर्शाकर रिपोर्ट लगा देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग पेड़ को काटने का परमिट जारी कर देता है। बाग कटान की शिकायत उच्चाधिकारियों से किए जाने पर माफिया के खिलाफ जुर्माने आदि की कार्रवाई कर मामले को रफादफा कर दिया जाता है। रेंजर एसएप यादव का कहना है कि जंगल की पूरी देखभाल की जाती है। कटान की सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाती है।