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मलेरिया की चपेट में नौनिहाल, रोजाना 20-25 मरीज पहुंच रहे अस्पताल
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ के चैंबर के बाहर लगी भीड़
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। मलेरिया तेजी से पैर पसार रहा है। बड़ों के साथ बच्चे भी चपेट में आ रहे हैं। रोजाना 20 से 25 मलेरिया ग्रस्त बच्चे राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास मलेरिया रोगियों के आंकड़े सिर्फ सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के ही हैं। निजी लैब के आंकड़े उपलब्ध न होने से मरीजों की सही संख्या पता नहीं चल पा रही है। इस साल अभी तक लगभग 250 मलेरिया के मरीज मिले हैं। निजी लैब की जांच में डेंगू के मरीज भी पाए जा रहे हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा मलेरिया फिर वायरल, टाइफाइड, खांसी और निमोनिया बच्चों को परेशान कर रहा है। आम दिनों में 14 से 15 सौ मरीजों की ओपीडी होती है। इस समय ढाई हजार पर्चे बन रहे हैं। इनमें करीब ढाई सौ बच्चे हर रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर दिन करीब 60 बच्चों के खून की जांच की जा रही है। मलेरिया से ग्रस्त अधिकतर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में पिछले हफ्ते डेंगू से पीड़ित दो बच्चे आए थे। उनकी जांच निजी पैथोलॉजी में की गई थी। डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि होने पर उन्हें अलग वार्ड में भर्ती कराया था। स्वस्थ होने पर बच्चों को छुट्टी दे दी गई। डेंगू के मरीजों के आने के बाद अस्पताल में सात बेड का नया वार्ड बना दिया गया है। हालांकि अभी इसमें मरीज भर्ती नहीं हैं।
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इसलिए बच्चे ज्यादा बन रहे शिकार
मच्छरजनित रोगों का बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर मानते हैं कि डेंगू-मलेरिया का मच्छर शाम ढले ज्यादा निकलते हैं। इसी समय बच्चे खेलने के लिए बाहर निकलते हैं। वहीं, बड़े जहां फुल कपड़े ज्यादा पहनते हैं जबकि बच्चों का बदन खुला रहता है।
निजी पैथोलॉजी नहीं उपलब्ध करा रही आंकड़े
हर साल जुलाई, अगस्त और सितंबर में सबसे ज्यादा मलेरिया का प्रकोप रहता है। अगस्त तक 203 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। सितंबर में अब तक यह आंकड़ा लगभग 250 पहुंच गया है। ये आंकड़े उन मरीजों के हैं, जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई थी। सरकारी केंद्रों से ज्यादा लोग मलेरिया-डेंगू की जांच निजी पैथोलॉजी सेंटर में कराते हैं। यहां से आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं भेजे जाते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास मलेरिया-डेंगू के मरीजों की सही संख्या नहीं है। सीएमओ डॉ. राजकुमार गौतम ने बताया कि निजी लैबों को भी निर्देशित किया जाएगा कि वे मलेरिया-डेंगू की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें।
काउंटर से मरीजों का मार्गदर्शन नहीं, हो रहे परेशान
अस्पताल में पर्चा बनाने वाले कर्मचारी मरीजों को मार्गदर्शन नहीं कर रहे। नाक, कान, गला रोग से पीड़ित बच्चों को बाल रोग फिजिशियन के पास भेजा जा रहा। मरीज और उसके तीमारदार के एक घंटा लाइन में लगने के बाद जब नंबर आता है तो पता चलता है कि उन्हें दूसरे डॉक्टर के पास जाना था। इस पर बाल रोग विशेषज्ञ ने अधिकारियों से तीमारदारों को संबंधित डॉक्टर के पास भिजवाने का आग्रह किया है।
एंटी लार्वा के छिड़काव की गति धीमी, फैल रहा मलेरिया
मच्छरों से निपटने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव करने में तेजी नहीं दिखाई जा रही है। कलान में एंटी लार्वा छिड़काव का कार्य सरकारी कागजों में पूर्ण किया गया। जैतीपुर में छिड़काव होने का दावा किया जा रहा। इतनी सुस्त रफ्तार होने से 15 ब्लॉकों में एंटी लार्वा का छिड़काव होना संभव नजर नहीं आ रहा। दूसरी तरफ नगर निगम द्वारा भी वैक्टरजनित बीमारियों से निपटने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव के नाम पर दिखावा किया जा रहा। गली-कूचों में टीमें अभी तक नहीं पहुंच पाईं हैं।
ये बरतें सावधानी
- मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।
- किसी भी मास्कीटों क्वाइल या लिक्विड के भरोसे न रहें।
- अपने आसपास साफ पानी बिल्कुल भी भरने न दें।
- शाम को बच्चों को बाहर घूमने या खेलने देने से बचें।
- बुखार आने पर तुरंत ही अस्पताल में दिखाएं।
- फुल पैंट-शर्ट पहनाएं।
- बुखार आने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
- प्लेटलेट्स घटकर 20 हजार तक आने पर घबराएं नहीं।
मलेरिया से ग्रस्त बच्चे सबसे ज्यादा ओपीडी में आ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इस मौसम में बच्चों को मच्छर से बचाने की जरूरत है। -डॉ. अखिलेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा मलेरिया फिर वायरल, टाइफाइड, खांसी और निमोनिया बच्चों को परेशान कर रहा है। आम दिनों में 14 से 15 सौ मरीजों की ओपीडी होती है। इस समय ढाई हजार पर्चे बन रहे हैं। इनमें करीब ढाई सौ बच्चे हर रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर दिन करीब 60 बच्चों के खून की जांच की जा रही है। मलेरिया से ग्रस्त अधिकतर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में पिछले हफ्ते डेंगू से पीड़ित दो बच्चे आए थे। उनकी जांच निजी पैथोलॉजी में की गई थी। डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि होने पर उन्हें अलग वार्ड में भर्ती कराया था। स्वस्थ होने पर बच्चों को छुट्टी दे दी गई। डेंगू के मरीजों के आने के बाद अस्पताल में सात बेड का नया वार्ड बना दिया गया है। हालांकि अभी इसमें मरीज भर्ती नहीं हैं।
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इसलिए बच्चे ज्यादा बन रहे शिकार
मच्छरजनित रोगों का बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर मानते हैं कि डेंगू-मलेरिया का मच्छर शाम ढले ज्यादा निकलते हैं। इसी समय बच्चे खेलने के लिए बाहर निकलते हैं। वहीं, बड़े जहां फुल कपड़े ज्यादा पहनते हैं जबकि बच्चों का बदन खुला रहता है।
निजी पैथोलॉजी नहीं उपलब्ध करा रही आंकड़े
हर साल जुलाई, अगस्त और सितंबर में सबसे ज्यादा मलेरिया का प्रकोप रहता है। अगस्त तक 203 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। सितंबर में अब तक यह आंकड़ा लगभग 250 पहुंच गया है। ये आंकड़े उन मरीजों के हैं, जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई थी। सरकारी केंद्रों से ज्यादा लोग मलेरिया-डेंगू की जांच निजी पैथोलॉजी सेंटर में कराते हैं। यहां से आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं भेजे जाते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास मलेरिया-डेंगू के मरीजों की सही संख्या नहीं है। सीएमओ डॉ. राजकुमार गौतम ने बताया कि निजी लैबों को भी निर्देशित किया जाएगा कि वे मलेरिया-डेंगू की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें।
काउंटर से मरीजों का मार्गदर्शन नहीं, हो रहे परेशान
अस्पताल में पर्चा बनाने वाले कर्मचारी मरीजों को मार्गदर्शन नहीं कर रहे। नाक, कान, गला रोग से पीड़ित बच्चों को बाल रोग फिजिशियन के पास भेजा जा रहा। मरीज और उसके तीमारदार के एक घंटा लाइन में लगने के बाद जब नंबर आता है तो पता चलता है कि उन्हें दूसरे डॉक्टर के पास जाना था। इस पर बाल रोग विशेषज्ञ ने अधिकारियों से तीमारदारों को संबंधित डॉक्टर के पास भिजवाने का आग्रह किया है।
एंटी लार्वा के छिड़काव की गति धीमी, फैल रहा मलेरिया
मच्छरों से निपटने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव करने में तेजी नहीं दिखाई जा रही है। कलान में एंटी लार्वा छिड़काव का कार्य सरकारी कागजों में पूर्ण किया गया। जैतीपुर में छिड़काव होने का दावा किया जा रहा। इतनी सुस्त रफ्तार होने से 15 ब्लॉकों में एंटी लार्वा का छिड़काव होना संभव नजर नहीं आ रहा। दूसरी तरफ नगर निगम द्वारा भी वैक्टरजनित बीमारियों से निपटने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव के नाम पर दिखावा किया जा रहा। गली-कूचों में टीमें अभी तक नहीं पहुंच पाईं हैं।
ये बरतें सावधानी
- मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।
- किसी भी मास्कीटों क्वाइल या लिक्विड के भरोसे न रहें।
- अपने आसपास साफ पानी बिल्कुल भी भरने न दें।
- शाम को बच्चों को बाहर घूमने या खेलने देने से बचें।
- बुखार आने पर तुरंत ही अस्पताल में दिखाएं।
- फुल पैंट-शर्ट पहनाएं।
- बुखार आने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
- प्लेटलेट्स घटकर 20 हजार तक आने पर घबराएं नहीं।
मलेरिया से ग्रस्त बच्चे सबसे ज्यादा ओपीडी में आ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इस मौसम में बच्चों को मच्छर से बचाने की जरूरत है। -डॉ. अखिलेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज।