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दूसरी डोज लगवाए बगैर आया वैक्सीन लगने का मैसेज
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पुवायां। बीडीसी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सुधीर त्रिवेदी ने कोरोना वेक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई है। बावजूद इसके उनके मोबाइल पर दूसरी डोज लगने का मैसेज आ गया। यहीं नहीं दोनों डोज लगने का प्रमाणपत्र भी डाउनलोड हो गया।
खुटार निवासी सुधीर त्रिवेदी ने बताया कि उन्होंने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज 28 जुलाई को तहसील पुवायां के परिसर में लगे कैंप में लगवाई थी। उनको दूसरी डोज लगवाने के लिए 23 अक्तूबर की तिथि दी गई थी। 23 अक्तूबर को वह किसी कारण पुवायां नहीं पहुंचे सके और घर पर ही रहे, लेकिन उनके मोबाइल पर दूसरी डोज लगने का मैसेज पहुंचा तो उनको हैरत हुई। बाद में उन्होंने मोबाइल नंबर के आधार पर प्रमाणपत्र भी डाउनलोड किया, जिसमें दूसरी डोज पुवायां के गांव जुझारपुर में एएनएम शशि पांडे की ओर से लगाना दर्शाया गया है।
सुधीर त्रिवेदी ने बताया कि दूसरे दिन वह वैक्सीन की डोज लगवाने के लिए गए तो उनको बता दिया गया कि उनको दूसरी डोज लग गई है। बिना वैक्सीन लगे मैसेज आने से वह परेशान हैं और दूसरी डोज नहीं लगने से उनको खतरा भी है। अधिवक्ता ने मांग की है कि बिना वैक्सीन लगे मैसेज किस तरह पहुंच गया और प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गया, इसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। पुवायां सीएचसी अधीक्षक डॉ. मोहम्मद आसिफ ने बताया कि ऐसा होता नहीं है, लेकिन किस तरह से मैसेज पहुंच गया इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर मामला दिखवाया जाएगा।
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खुटार निवासी सुधीर त्रिवेदी ने बताया कि उन्होंने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज 28 जुलाई को तहसील पुवायां के परिसर में लगे कैंप में लगवाई थी। उनको दूसरी डोज लगवाने के लिए 23 अक्तूबर की तिथि दी गई थी। 23 अक्तूबर को वह किसी कारण पुवायां नहीं पहुंचे सके और घर पर ही रहे, लेकिन उनके मोबाइल पर दूसरी डोज लगने का मैसेज पहुंचा तो उनको हैरत हुई। बाद में उन्होंने मोबाइल नंबर के आधार पर प्रमाणपत्र भी डाउनलोड किया, जिसमें दूसरी डोज पुवायां के गांव जुझारपुर में एएनएम शशि पांडे की ओर से लगाना दर्शाया गया है।
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सुधीर त्रिवेदी ने बताया कि दूसरे दिन वह वैक्सीन की डोज लगवाने के लिए गए तो उनको बता दिया गया कि उनको दूसरी डोज लग गई है। बिना वैक्सीन लगे मैसेज आने से वह परेशान हैं और दूसरी डोज नहीं लगने से उनको खतरा भी है। अधिवक्ता ने मांग की है कि बिना वैक्सीन लगे मैसेज किस तरह पहुंच गया और प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गया, इसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। पुवायां सीएचसी अधीक्षक डॉ. मोहम्मद आसिफ ने बताया कि ऐसा होता नहीं है, लेकिन किस तरह से मैसेज पहुंच गया इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर मामला दिखवाया जाएगा।
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