{"_id":"60f5c9d28ebc3e6d3f5b7ffc","slug":"health-shahjahanpur-news-bly4536771196","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में छूट गया कपड़ा, हालत गंभीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में छूट गया कपड़ा, हालत गंभीर
विज्ञापन
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के एक सर्जन पर लापरवाही का आरोप लगा है। यहां एक गर्भवती महिला के ऑपरेशन के दौरान पेट में कपड़ा छूट गया। ऑपरेशन के बाद महिला और नवजात को छुट्टी दे दी गई। घर पहुंचने पर महिला की हालत बिगड़ी तो पति ने उसे एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। सीटी स्कैन में पता चला कि महिला के पेट में कपड़ा है। फिर ऑपरेशन कर कपड़ा निकाला गया। वर्तमान में लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में महिला का इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर है। डीएम से शिकायत के बाद अब महिला सीएमएस को मामले की जांच सौंपी गई है।
तिलहर थाना क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी निवासी मनोज कुमार ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने छह जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने ऑपरेशन तो किया लेकिन उसकी लापरवाही से कपड़ा पेट के अंदर ही छूट गया। एक आंत को धागे से जोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद नवजात बच्ची और महिला को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। वह उसे लेकर दोबारा मेडिकल कॉलेज आए लेकिन कोरोना संक्रमण चरम पर होने के कारण उसे इलाज नहीं मिल सका। महिला का प्राइवेट डॉक्टर के यहां इलाज चलता रहा। बाद में वरुण-अर्जुन मेडिकल कॉलेज में महिला का सीटी स्कैन कराया गया। इसमें पेट में कपड़ा होने और एक आंत को धागे से जोड़े जाने की पुष्टि हुई।
महिला के पति मनोज का कहना है कि वह शिकायत करने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज गया लेकिन उसे वहां कोई मिला नहीं। 21 जून को महिला को वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां ऑपरेशन के बाद कपड़ा निकाल दिया गया। हालत में सुधार न होने पर महिला को बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली के एक निजी अस्पताल में ज्यादा खर्च आने पर महिला को लेकर परिवार वापस घर आ गया। इसके बाद खेत गिरवी रखकर और जेवर बेचकर पति दोबारा राजकीय मेडिकल कॉलेज आया जहां से महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया।
विज्ञापन
14 जुलाई को महिला को लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया है। यहां उसका इलाज चल रहा है। पीड़ित ने आठ जुलाई को डीएम से आरोपी डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। यहां से पत्र जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। जिस पर महिला सीएमएस को जांच सौंप दी गई है।
शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है। महिला सीएमएस को मामले की जांच सौंपी गई है। शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही डीएम को भेज दी जाएगी। - पूजा त्रिपाठी पांडेय, प्रवक्ता राजकीय मेडिकल कॉलेज
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सर्जन छुट्टी में हैं। रिकॉर्ड देखकर मामला बता सकेंगे। - डॉ. अरविंद किशोर शुक्ला, प्राचार्य वरुण-अर्जुन मेडिकल कॉलेज
आर्थिक रूप से टूट गया मनोज
छह जनवरी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में गर्भवती पत्नी का ऑपरेशन कराने के बाद से मनोज कुमार आर्थिक रूप से काफी टूट गए हैं। मनोज निजी अस्पतालों में पिछले छह महीने से पत्नी का इलाज करा रहे हैं। प्रतिदिन दवाओं पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद खेतीबाड़ी करने वाले मनोज के पास रुपये खत्म हो गए थे। करीब चार लाख रुपये इलाज में लग चुका है, लेकिन पत्नी की हालत अब भी खतरे के बाहर नहीं है। मनोज ने पत्नी को 14 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। जहां उसका इलाज चल रहा है। मनोज के पास सात-आठ बीघा खेती थी। पत्नी की जान बचाने के लिए मनोज ने खेत गिरवी रख दिया। पत्नी के जेवर शहर के एक सुनार की दुकान पर बेचने के बाद मिले रुपये से लखनऊ के अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस डॉक्टर पर मनोज ने आरोप लगाया है, उसका फरवरी में लखनऊ तबादला हो गया है। संवाद
विज्ञापन
तिलहर थाना क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी निवासी मनोज कुमार ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने छह जनवरी को प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने ऑपरेशन तो किया लेकिन उसकी लापरवाही से कपड़ा पेट के अंदर ही छूट गया। एक आंत को धागे से जोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद नवजात बच्ची और महिला को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। वह उसे लेकर दोबारा मेडिकल कॉलेज आए लेकिन कोरोना संक्रमण चरम पर होने के कारण उसे इलाज नहीं मिल सका। महिला का प्राइवेट डॉक्टर के यहां इलाज चलता रहा। बाद में वरुण-अर्जुन मेडिकल कॉलेज में महिला का सीटी स्कैन कराया गया। इसमें पेट में कपड़ा होने और एक आंत को धागे से जोड़े जाने की पुष्टि हुई।
विज्ञापन
महिला के पति मनोज का कहना है कि वह शिकायत करने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज गया लेकिन उसे वहां कोई मिला नहीं। 21 जून को महिला को वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां ऑपरेशन के बाद कपड़ा निकाल दिया गया। हालत में सुधार न होने पर महिला को बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली के एक निजी अस्पताल में ज्यादा खर्च आने पर महिला को लेकर परिवार वापस घर आ गया। इसके बाद खेत गिरवी रखकर और जेवर बेचकर पति दोबारा राजकीय मेडिकल कॉलेज आया जहां से महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया।
विज्ञापन
14 जुलाई को महिला को लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया है। यहां उसका इलाज चल रहा है। पीड़ित ने आठ जुलाई को डीएम से आरोपी डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। यहां से पत्र जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। जिस पर महिला सीएमएस को जांच सौंप दी गई है।
शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है। महिला सीएमएस को मामले की जांच सौंपी गई है। शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही डीएम को भेज दी जाएगी। - पूजा त्रिपाठी पांडेय, प्रवक्ता राजकीय मेडिकल कॉलेज
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सर्जन छुट्टी में हैं। रिकॉर्ड देखकर मामला बता सकेंगे। - डॉ. अरविंद किशोर शुक्ला, प्राचार्य वरुण-अर्जुन मेडिकल कॉलेज
आर्थिक रूप से टूट गया मनोज
छह जनवरी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में गर्भवती पत्नी का ऑपरेशन कराने के बाद से मनोज कुमार आर्थिक रूप से काफी टूट गए हैं। मनोज निजी अस्पतालों में पिछले छह महीने से पत्नी का इलाज करा रहे हैं। प्रतिदिन दवाओं पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद खेतीबाड़ी करने वाले मनोज के पास रुपये खत्म हो गए थे। करीब चार लाख रुपये इलाज में लग चुका है, लेकिन पत्नी की हालत अब भी खतरे के बाहर नहीं है। मनोज ने पत्नी को 14 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। जहां उसका इलाज चल रहा है। मनोज के पास सात-आठ बीघा खेती थी। पत्नी की जान बचाने के लिए मनोज ने खेत गिरवी रख दिया। पत्नी के जेवर शहर के एक सुनार की दुकान पर बेचने के बाद मिले रुपये से लखनऊ के अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस डॉक्टर पर मनोज ने आरोप लगाया है, उसका फरवरी में लखनऊ तबादला हो गया है। संवाद