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16 जोड़ों ने एक साथ कहा - कबूल है, कबूल है कबूल है
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Sun, 10 Apr 2016 11:37 PM IST
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16 जोड़ों ने एक साथ कहा - कबूल है, कबूल है कबूल है
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मुस्लिम समाज इज्तिमाई शादी कमेटी के तत्वावधान में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के 16 जोड़ों का निकाह कराया गया। विदाई में कमेटी की ओर से दूल्ह -दुल्हन को उपहार भी दिए गए।
उस्मान बाग लॉन में हुए भव्य समारोह में दूल्हा-दुल्हन के परिवारीजनों के लिए टेंट लगवाकर अस्थाई कमरों की व्यवस्था की गई। सुबह 10 बजे तक पंडाल खचाखच भर चुका था। काजी हाफिज मोहम्मद साबिर ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आगाज किया और निकाह की सुन्नत अदा की। शादी के लिए पहुंचे सभी 16 जोड़ों को निकाह पढ़ाया गया। काजी हाफिज साबिर और हाफिज माशूक ने निकाह पढ़ाया। दूल्हा-दुल्हन के सगे- संबंधियों और कमेटी के लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पसमांदा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने दूल्हा-दुल्हन के सुखद जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के लिए इस प्रकार के आयोजन किसी वरदान से कम नहीं हैं। विशिष्ट अतिथि चेयरमैन तनवीर खां ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सबाब दिलाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से समाज को मोहब्बत का पैगाम जाता है।
कमेटी अध्यक्ष सरताज मंसूरी के संचालन में हुए समारोह में सपा अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सैयद रिजवान अहमद, अंजुम मंसूरी, मुख्तार मंसूरी, खुर्शीद मंसूरी, इंकलाब नूरी आदि ने भी विचार रखे। इससे पूर्व अतिथियों का फूल मालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया।
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कौन-किसका बना हमसफर
सामूहिक निकाह समारोह में सरपान मंसूरी ने जाहिन, शमशाद मंसूरी ने रेहाना बानो, मुकीम खां ने गुलशन, जनीफ मंसूरी ने आसमां बानो, रुस्तम अली ने नूर बानो, नफीस अल्वी ने नसरीन, अली अहमद ने हसीना बानो, हसन मंसूरी ने रुखसाना, नबी मंसूरी ने नूरजहां, अफरोज शाह ने शान बी, जावेद अली ने शबीना, चांद बाबू ने राजदा, इकबाल मंसूरी ने रेशमा बानो, तसलीम मंसूरी ने शबनम बी, सलीम सिद्दीकी ने इशरत जहां, जमालुद्दीन सिद्दीकी ने गुलफ्शा के संग निकाह पढ़ा और एक-दूसरे के हमसफर बने।
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उस्मान बाग लॉन में हुए भव्य समारोह में दूल्हा-दुल्हन के परिवारीजनों के लिए टेंट लगवाकर अस्थाई कमरों की व्यवस्था की गई। सुबह 10 बजे तक पंडाल खचाखच भर चुका था। काजी हाफिज मोहम्मद साबिर ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आगाज किया और निकाह की सुन्नत अदा की। शादी के लिए पहुंचे सभी 16 जोड़ों को निकाह पढ़ाया गया। काजी हाफिज साबिर और हाफिज माशूक ने निकाह पढ़ाया। दूल्हा-दुल्हन के सगे- संबंधियों और कमेटी के लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पसमांदा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने दूल्हा-दुल्हन के सुखद जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के लिए इस प्रकार के आयोजन किसी वरदान से कम नहीं हैं। विशिष्ट अतिथि चेयरमैन तनवीर खां ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सबाब दिलाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से समाज को मोहब्बत का पैगाम जाता है।
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कमेटी अध्यक्ष सरताज मंसूरी के संचालन में हुए समारोह में सपा अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सैयद रिजवान अहमद, अंजुम मंसूरी, मुख्तार मंसूरी, खुर्शीद मंसूरी, इंकलाब नूरी आदि ने भी विचार रखे। इससे पूर्व अतिथियों का फूल मालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया।
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कौन-किसका बना हमसफर
सामूहिक निकाह समारोह में सरपान मंसूरी ने जाहिन, शमशाद मंसूरी ने रेहाना बानो, मुकीम खां ने गुलशन, जनीफ मंसूरी ने आसमां बानो, रुस्तम अली ने नूर बानो, नफीस अल्वी ने नसरीन, अली अहमद ने हसीना बानो, हसन मंसूरी ने रुखसाना, नबी मंसूरी ने नूरजहां, अफरोज शाह ने शान बी, जावेद अली ने शबीना, चांद बाबू ने राजदा, इकबाल मंसूरी ने रेशमा बानो, तसलीम मंसूरी ने शबनम बी, सलीम सिद्दीकी ने इशरत जहां, जमालुद्दीन सिद्दीकी ने गुलफ्शा के संग निकाह पढ़ा और एक-दूसरे के हमसफर बने।