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माताओं ने संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर किया हलछठ का पूजन
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शाहजहांपुर में शनिवार को हल छठ पर भगवान बलराम की स्वरुप की पूजा अर्चना करतीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। भादपद्र की पष्ठी पर शनिवार को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्मोत्सव व हलछठ का पर्व मनाया गया। माताओं ने अपनी संतानों के लिए व्रत रखा तथा हलछठ का पूजन किया। संतान की दीघार्यु के लिए प्रार्थना की गई।
शहर के श्री रुद्र बाला जी धाम पर आचार्य डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल व आचार्य पंडित अंकुर शुक्ला ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। पुत्रवती माताओं नें पुत्र की दीर्घायु और निसंतान माताओं ने संतान प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मंदिर में ही हलधारी भगवान बलराम के दिव्य स्वरूप की झांकी सजाई गई। पं. कान्हा कृष्ण शुक्ला ने बताया कि जब कंस ने देवकी और वासुदेव को कारगार में कैद कर दिया था। कंस ने एक-एक करके उनकी छह संतानों को मार दिया।
लेकिन सातवी संतान के रूप में शेषावतार भगवान बलराम देवकी के गर्भ में स्थापित हुए तो श्री हरि ने योग माया से उन्हें माता रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। इसलिए बलराम का जन्म भगवान कृष्ण के बड़े भाई के रूप में नंदबाबा के यहां हुआ। बलराम मल्लयुद्ध, कुश्ती और गदायुद्ध में पारंगत थे तथा हाथ में हल धारण करते थे। तभी उन्हें हलधर भी कहा जाता है। पूजन के दौरान वैष्णवी शुक्ला, दिव्यार्थ पांडेय, शांती, मीना, अंशिका शुक्ला, अनन्या, गीतांजलि, पूजा त्रिपाठी, अंजली पांडेय, मनीषा तिवारी, स्वेता तिवारी, आकांक्षा, अभिलाषा आदि मौजूद रहीं।
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शहर के श्री रुद्र बाला जी धाम पर आचार्य डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल व आचार्य पंडित अंकुर शुक्ला ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। पुत्रवती माताओं नें पुत्र की दीर्घायु और निसंतान माताओं ने संतान प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मंदिर में ही हलधारी भगवान बलराम के दिव्य स्वरूप की झांकी सजाई गई। पं. कान्हा कृष्ण शुक्ला ने बताया कि जब कंस ने देवकी और वासुदेव को कारगार में कैद कर दिया था। कंस ने एक-एक करके उनकी छह संतानों को मार दिया।
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लेकिन सातवी संतान के रूप में शेषावतार भगवान बलराम देवकी के गर्भ में स्थापित हुए तो श्री हरि ने योग माया से उन्हें माता रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। इसलिए बलराम का जन्म भगवान कृष्ण के बड़े भाई के रूप में नंदबाबा के यहां हुआ। बलराम मल्लयुद्ध, कुश्ती और गदायुद्ध में पारंगत थे तथा हाथ में हल धारण करते थे। तभी उन्हें हलधर भी कहा जाता है। पूजन के दौरान वैष्णवी शुक्ला, दिव्यार्थ पांडेय, शांती, मीना, अंशिका शुक्ला, अनन्या, गीतांजलि, पूजा त्रिपाठी, अंजली पांडेय, मनीषा तिवारी, स्वेता तिवारी, आकांक्षा, अभिलाषा आदि मौजूद रहीं।
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