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Shahjahanpur News: हाजी पीर जाकिर मियां चिश्ती का इंतकाल, सुपुर्दे खाक किया
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हाजी पीर जाकिर मियां चिश्ती का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
शाहजहांपुर। मोहल्ला निसरजई निवासी हाजी जाकिर अली मियां चिश्ती निजामी का शनिवार सुबह इंतकाल हो गया। वह 85 वर्ष के थे। पीर ए तरीकत की दो दिन पहले तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें पहले एक स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया। आराम न मिलने पर उन्हें तिलहर कस्बे और बाद में बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शनिवार सुबह 7:18 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके परिवार में पत्नी निगार फातिमा, तीन बेटे अजमल निजामी, जुनैद निजामी, उवैस निज़ामी और तीन बेटियां हैं। अचानक अपने पीर-ओ-मुर्शिद के इंतकाल की खबर से मुरीदों में शोक है। मुंबई, जबलपुर, बहराइच, लखनऊ, दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली, हरदोई, पीलीभीत समेत कई जिलों से उनके मुरीद अंतिम दीदार के लिए पहुंचे। परिजनों ने सभी से मशवरे के बाद मकान के ही अहाते में कब्र तैयार कर शनिवार रात सुपुर्दे खाक कर दिया।
सबसे पहले उनके बड़े बेटे अजमल मियां निजामी ने कब्र में मिट्टी दी। जाकिर मियां ने ओसीएफ से वीआरएस लेने के बाद अपना पूरा जीवन दीन के प्रचार में समर्पित कर दिया था। वह जबलपुर में हजरत बाबा कलीम उल्लाह शाह के मुरीद थे। बाद में वह उनके खलीफा भी बने। उन्होंने अपने पीर के इंतकाल के बाद यहां निसरजई में तीन दिवसीय वार्षिक उर्स किया था।
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अंतिम यात्रा में मुंबई के पीर अब्दुल मन्नान शेख निजामी, दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के खादिम सैयद हम्माद निजामी, महबूब खीरानी, आफताब मन्नान शेख, बरेली के डाॅ. शजर अली, निसार अहमद, शकील अंजुम, नानपारा बहराइच के शकील अंसारी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संवाद
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उनके परिवार में पत्नी निगार फातिमा, तीन बेटे अजमल निजामी, जुनैद निजामी, उवैस निज़ामी और तीन बेटियां हैं। अचानक अपने पीर-ओ-मुर्शिद के इंतकाल की खबर से मुरीदों में शोक है। मुंबई, जबलपुर, बहराइच, लखनऊ, दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली, हरदोई, पीलीभीत समेत कई जिलों से उनके मुरीद अंतिम दीदार के लिए पहुंचे। परिजनों ने सभी से मशवरे के बाद मकान के ही अहाते में कब्र तैयार कर शनिवार रात सुपुर्दे खाक कर दिया।
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सबसे पहले उनके बड़े बेटे अजमल मियां निजामी ने कब्र में मिट्टी दी। जाकिर मियां ने ओसीएफ से वीआरएस लेने के बाद अपना पूरा जीवन दीन के प्रचार में समर्पित कर दिया था। वह जबलपुर में हजरत बाबा कलीम उल्लाह शाह के मुरीद थे। बाद में वह उनके खलीफा भी बने। उन्होंने अपने पीर के इंतकाल के बाद यहां निसरजई में तीन दिवसीय वार्षिक उर्स किया था।
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अंतिम यात्रा में मुंबई के पीर अब्दुल मन्नान शेख निजामी, दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के खादिम सैयद हम्माद निजामी, महबूब खीरानी, आफताब मन्नान शेख, बरेली के डाॅ. शजर अली, निसार अहमद, शकील अंजुम, नानपारा बहराइच के शकील अंसारी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संवाद