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पॉलिथीन और नदी में डाली जा रही गंदगी से घुट रही गोमती की सांस
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पुवायां (शाहजहांपुर)। पॉलिथीन व घरों से लाकर नदी में डाली जा रही गंदगी से गोमती की सांस घुट रही है। जलीय जंतु भी मर रहे हैं। तमाम जागरूकता अभियानों के बाद भी गोमती में राख, प्रतिमाएं, पॉलिथीन आदि डालने का क्रम जारी है।
बुजुर्ग बताते हैं कि कभी गोमती में काफी पानी होता था और नदी का फाट भी काफी चौड़ा था। इसका अंदाजा पुवायां खुटार हाईवे पर बने अंग्रेजों के जमाने के पुल को भी देखकर लगाया जा सकता है। कई वर्ष पहले तक नदी में काफी पानी भी था और बारिश में तो नदी की धार काफी तेज हो जाती थी, जिससे गंदगी बह जाती थी। बाद में अवैध कब्जों के कारण नदी की धार मंद पड़ गई और रही सही कसर पर्यावरण संरक्षण पर धार्मिक आस्थाओं के भारी पड़ने से पूरी हो गई।
घरों में होने वाले हवन, पूजन, यज्ञ आदि के बाद लोग राख को नदी में ही लाकर डालते हैं। पॉलिथीन में रखकर लाई गई राख को पॉलिथीन के सहित ही नदी में फेंक दिया जाता है, जो धीरे धीरे एकत्र होकर ढेर के रूप में बदल जाती है। खुटार पुवायां मार्ग पर गोमती तट पर काफी गंदगी है।
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नदी को प्रणाम कर चले जाते हैं लोग
गोमती के तटों पर कई स्थानों पर जेठ दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा आदि पर मेले लगते हैं। इस दौरान हजारों लोग नदी किनारे आकर पूजन हवन करते हैं। अब भारी गंदगी के कारण कम लोग ही नदी में स्नान करते हैं। लोग मेले में तो आते हैं लेकिन नदी को दूर से ही प्रणाम कर चले जाते हैं।
कैसे हो रहा नुकसान
- नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने से
- प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियों के शिकार के लिए जहर डालने से
- नदी तटों के पेड़ काटने से
- जल प्रवाह रोकने का प्रयास करने से
- घरों से लाई गई गंदगी डालने से
क्या करना होगा
- नदी के किनारे पौधरोपण
- गंदगी और गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोकना
- नदी की धारा को सुचारु बहने की व्यवस्था में सहयोग
- पूजन सामग्री को नदी में नहीं डालकर भू विसर्जन करना
- जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई आदि करना
- अवैध खनन रौकना, नदी के किनारों पर अवैध कब्जे रोकना
अखिलेश यादव ने शेयर की खबर
पुवायां। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमर उजाला में चार जुलाई को प्रकाशित गोमती नदी की खबर को फेसबुक पर शेयर किया है। कई और फोटो के साथ शेयर की गई खबर पर लिखा है, 100 दिन की भाजपा सरकार, उप्र हुआ गोरखधंधे से बर्बाद।
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बुजुर्ग बताते हैं कि कभी गोमती में काफी पानी होता था और नदी का फाट भी काफी चौड़ा था। इसका अंदाजा पुवायां खुटार हाईवे पर बने अंग्रेजों के जमाने के पुल को भी देखकर लगाया जा सकता है। कई वर्ष पहले तक नदी में काफी पानी भी था और बारिश में तो नदी की धार काफी तेज हो जाती थी, जिससे गंदगी बह जाती थी। बाद में अवैध कब्जों के कारण नदी की धार मंद पड़ गई और रही सही कसर पर्यावरण संरक्षण पर धार्मिक आस्थाओं के भारी पड़ने से पूरी हो गई।
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घरों में होने वाले हवन, पूजन, यज्ञ आदि के बाद लोग राख को नदी में ही लाकर डालते हैं। पॉलिथीन में रखकर लाई गई राख को पॉलिथीन के सहित ही नदी में फेंक दिया जाता है, जो धीरे धीरे एकत्र होकर ढेर के रूप में बदल जाती है। खुटार पुवायां मार्ग पर गोमती तट पर काफी गंदगी है।
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नदी को प्रणाम कर चले जाते हैं लोग
गोमती के तटों पर कई स्थानों पर जेठ दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा आदि पर मेले लगते हैं। इस दौरान हजारों लोग नदी किनारे आकर पूजन हवन करते हैं। अब भारी गंदगी के कारण कम लोग ही नदी में स्नान करते हैं। लोग मेले में तो आते हैं लेकिन नदी को दूर से ही प्रणाम कर चले जाते हैं।
कैसे हो रहा नुकसान
- नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने से
- प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियों के शिकार के लिए जहर डालने से
- नदी तटों के पेड़ काटने से
- जल प्रवाह रोकने का प्रयास करने से
- घरों से लाई गई गंदगी डालने से
क्या करना होगा
- नदी के किनारे पौधरोपण
- गंदगी और गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोकना
- नदी की धारा को सुचारु बहने की व्यवस्था में सहयोग
- पूजन सामग्री को नदी में नहीं डालकर भू विसर्जन करना
- जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई आदि करना
- अवैध खनन रौकना, नदी के किनारों पर अवैध कब्जे रोकना
अखिलेश यादव ने शेयर की खबर
पुवायां। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमर उजाला में चार जुलाई को प्रकाशित गोमती नदी की खबर को फेसबुक पर शेयर किया है। कई और फोटो के साथ शेयर की गई खबर पर लिखा है, 100 दिन की भाजपा सरकार, उप्र हुआ गोरखधंधे से बर्बाद।