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मानव को ईश्वर के बोध की आवश्यकता
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:36 PM IST
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संत निरंकारी मंडल के महात्मा मुखी हरिओम ने कहा कि यदि मनुष्य को वास्तव में ईश्वर का बोध हो जाए तो उसका आचार-विचार सात्विक होते देर नहीं लगेगी। वह रविवार को निरंकारी मंडल के सत्संग भवन में श्रद्धालुओं के समक्ष क्षमा याचना पर केंद्रित प्रवचन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि जो लोग ईश्वर की सत्ता को मानते हैं, उनमें भी हम बहुतों को गलत राह पर जाते इसीलिए देखते हैं क्योंकि उन्हें ईश्वर की अनुभूति अंतरतम तक स्पर्श नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी सेवा छोटी अथवा बड़ी नहीं होती। सच्चा साधक वही है जो सबमें परमात्मा का एक जैसा नूर देखते हुए उनसे वही व्यवहार करता है जिसकी अपेक्षा अपने साथ रखता है। कार्यक्रम में मुन्ना लाल, रानी मिश्रा, मतता, सोनी, बाबूराम, वेद प्रकाश, शशिबाला, राजेश गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि जो लोग ईश्वर की सत्ता को मानते हैं, उनमें भी हम बहुतों को गलत राह पर जाते इसीलिए देखते हैं क्योंकि उन्हें ईश्वर की अनुभूति अंतरतम तक स्पर्श नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी सेवा छोटी अथवा बड़ी नहीं होती। सच्चा साधक वही है जो सबमें परमात्मा का एक जैसा नूर देखते हुए उनसे वही व्यवहार करता है जिसकी अपेक्षा अपने साथ रखता है। कार्यक्रम में मुन्ना लाल, रानी मिश्रा, मतता, सोनी, बाबूराम, वेद प्रकाश, शशिबाला, राजेश गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
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