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भक्ति से प्रकट होते हैं भगवान : श्यामसुंदर
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पुवायां में कथा सुनाते श्यामसुंदर ठाकुर। संवाद
पुवायां। पुवायां के खुटार रोड स्थित एक मैरिज लाॅन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बरसाना के श्यामसुंदर ठाकुर ने कहा कि भगवान निष्काम भक्ति से प्रकट होते हैं और भक्त को अपने लोक में स्थान देते हैं।
सेठ गंगाराम की स्मृति में चल रही कथा में श्यामसुंदर ठाकुर ने कहा कि भक्त प्रह्लाद, ध्रुव आदि इसके उदाहरण हैं कि भगवान ने हमेशा भक्त की रक्षा की है। जिनके ऊपर भगवान की कृपा होती है, वही सद्पुरुष भगवान के मांगलिक उत्सवों में सम्मिलित हो पाते हैं। उत्सव स्वर्ग में भी नहीं हो सकते, उत्सव धराधाम पर ही होते हैं। उन उत्सवों में आने का सौभाग्य मिल जाए तो यह उनकी कृपा होती है।
उन्होंने कहा कि सेवा तीन प्रकार की होती है। मनुष्य को तन-मन और धन से धर्म और समाज की सेवा करनी चाहिए। मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है। वैसे ही श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
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कलयुग के दुष्प्रभाव से बचने के लिए भागवत ही एकमात्र सहारा है। कथा हमें ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करती है। इसको सुनने से सभी पापों का नाश होता है। सभी को समय निकालकर पुण्य लाभ अर्जित करना चाहिए।
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भरत चरित्र का वर्णन
शाहजहांपुर। श्रीबालाजी मानस सेवा समिति की ओर से मोहल्ला मदराखेल में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य अंकुर शुक्ल ने भरत चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि पाप व तुच्छ कर्मों से बचना ही सबसे बड़ा पुण्य का काम है। इसके उपरांत भागवत की आरती आचार्य श्रवण और विनीत शुक्ल ने कराई। मनोज कुमार, सनी कुमार, सचिन कुमार, रीता, रूप कमल, अंश, वंशिका अग्रिम, अंजलि, मोना, प्रज्ञा, सुनीता, अनीता, विनीता, गुड्डी आदि मौजूद रहे। संवाद
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सेठ गंगाराम की स्मृति में चल रही कथा में श्यामसुंदर ठाकुर ने कहा कि भक्त प्रह्लाद, ध्रुव आदि इसके उदाहरण हैं कि भगवान ने हमेशा भक्त की रक्षा की है। जिनके ऊपर भगवान की कृपा होती है, वही सद्पुरुष भगवान के मांगलिक उत्सवों में सम्मिलित हो पाते हैं। उत्सव स्वर्ग में भी नहीं हो सकते, उत्सव धराधाम पर ही होते हैं। उन उत्सवों में आने का सौभाग्य मिल जाए तो यह उनकी कृपा होती है।
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उन्होंने कहा कि सेवा तीन प्रकार की होती है। मनुष्य को तन-मन और धन से धर्म और समाज की सेवा करनी चाहिए। मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म है। वैसे ही श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
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कलयुग के दुष्प्रभाव से बचने के लिए भागवत ही एकमात्र सहारा है। कथा हमें ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करती है। इसको सुनने से सभी पापों का नाश होता है। सभी को समय निकालकर पुण्य लाभ अर्जित करना चाहिए।
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भरत चरित्र का वर्णन
शाहजहांपुर। श्रीबालाजी मानस सेवा समिति की ओर से मोहल्ला मदराखेल में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य अंकुर शुक्ल ने भरत चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि पाप व तुच्छ कर्मों से बचना ही सबसे बड़ा पुण्य का काम है। इसके उपरांत भागवत की आरती आचार्य श्रवण और विनीत शुक्ल ने कराई। मनोज कुमार, सनी कुमार, सचिन कुमार, रीता, रूप कमल, अंश, वंशिका अग्रिम, अंजलि, मोना, प्रज्ञा, सुनीता, अनीता, विनीता, गुड्डी आदि मौजूद रहे। संवाद

पुवायां में कथा सुनाते श्यामसुंदर ठाकुर। संवाद

पुवायां में कथा सुनाते श्यामसुंदर ठाकुर। संवाद