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50 लाख क्विंटल से अधिक गन्ना खरीद कर चुकीं जनपद की चीनी मिलें
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शाहजहांपुर। सहकारी क्षेत्र की तिलहर और पुवायां चीनी मिल समेत जनपद की पांचों चीनी मिलें अभी तक 50 लाख क्विंटल से अधिक गन्ना खरीद चुकी हैं। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पेराई सत्र एक सप्ताह देर से शुरू होने के कारण गन्ना खरीद में तेजी लाने के लिए सभी 168 क्रय केंद्रों पर तौल कार्य शुरू हो चुका है और रोजाना औसतन 2.60 लाख क्विंटल गन्ना खरीद हो रही है। खास यह है कि इस बार गन्ना समितियों के नए सदस्य बने 6246 किसानों को पहली बार मिलों को गन्ना आपूर्ति करने का मौका मिला है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने सभी ज्येष्ठ विकास निरीक्षकों और पर्यवेक्षकों को क्रय केंद्रों की निगरानी कर तौल कार्य का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
बीते दिन हथौड़ा चौराहा-रेती रोड स्थित गन्ना भवन में हुई केन इम्पलीमेंटशन कमेटी (गन्ना क्रियान्वयन समिति) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसीओ डॉ. भार्गव ने अभी तक समर्थन मूल्य पर हुई गन्ना की खरीद और पेराई सत्र से जुड़े अन्य कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने गन्ना मूल्य भुगतान, टैगिंग आदेश के अनुपालन, दैनिक गन्ना खरीद, क्रय केंद्रों व मिल गेट पर कोविड गाइड लाइन के पालन, क्रय केंद्रों के संचालन, निरीक्षण, समानुपातिक गन्ना खरीद, वेबसाइट पर दैनिक गन्ना खरीद के आंकड़ों की अपलोडिंग, तौल लिपिकों के स्थानांतरण आदि कार्यों की प्रगति जांची।
बैठक में बताया कि इस बार सहकारी गन्ना विकास समिति रोजा में 2418, पुवायां में 1574 एवं चीनी मिल समिति तिलहर में 2254 गन्ना किसानों ने सदस्यता ली है और यह सभी पहली बार चीनी मिल को अपना गन्ना देंगे। डीसीओ ने बैठक में मौजूद चीनी मिलों के अधिकारियों और उनके प्रतिनिधियों को सड़कों पर जाम की स्थिति से बचने के लिए प्रतिदिन केवल उतनी पर्चियां जारी करने के निर्देश दिए, जितने गन्ना की मिल को दैनिक आवश्यकता है। उन्होंने बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल के अधिकारियों को बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए गोदाम में उपलब्ध चीनी की बिक्री करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों एवं सचिवों को लगातार क्षेत्र में भ्रमण करने और कहीं कोई समस्या आने पर संबंधित क्रय केंद्र पर पहुंच कर उसका समाधान करने के निर्देश दिए।
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गन्ना की खरीद में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए तौल लिपिकों से लेकर गन्ना समितियों और चीनी मिलों के कर्मचारियों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए हैं। शासन ने घोषणा पत्र भरने की समय सीमा 10 दिसंबर तक बढ़ा दी है, लेकिन अभी तक जनपद में 1.80 लाख किसानों मे से केवल 1.20 लाख किसानों ने घोषणा पत्र भरे हैं। नियत तिथि तक जो किसान घोषणा पत्र नहीं भरेंगे, उनको विभागीय सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी और उनका सट्टा भी बंद कर दिया जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी।
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बीते दिन हथौड़ा चौराहा-रेती रोड स्थित गन्ना भवन में हुई केन इम्पलीमेंटशन कमेटी (गन्ना क्रियान्वयन समिति) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसीओ डॉ. भार्गव ने अभी तक समर्थन मूल्य पर हुई गन्ना की खरीद और पेराई सत्र से जुड़े अन्य कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने गन्ना मूल्य भुगतान, टैगिंग आदेश के अनुपालन, दैनिक गन्ना खरीद, क्रय केंद्रों व मिल गेट पर कोविड गाइड लाइन के पालन, क्रय केंद्रों के संचालन, निरीक्षण, समानुपातिक गन्ना खरीद, वेबसाइट पर दैनिक गन्ना खरीद के आंकड़ों की अपलोडिंग, तौल लिपिकों के स्थानांतरण आदि कार्यों की प्रगति जांची।
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बैठक में बताया कि इस बार सहकारी गन्ना विकास समिति रोजा में 2418, पुवायां में 1574 एवं चीनी मिल समिति तिलहर में 2254 गन्ना किसानों ने सदस्यता ली है और यह सभी पहली बार चीनी मिल को अपना गन्ना देंगे। डीसीओ ने बैठक में मौजूद चीनी मिलों के अधिकारियों और उनके प्रतिनिधियों को सड़कों पर जाम की स्थिति से बचने के लिए प्रतिदिन केवल उतनी पर्चियां जारी करने के निर्देश दिए, जितने गन्ना की मिल को दैनिक आवश्यकता है। उन्होंने बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल के अधिकारियों को बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए गोदाम में उपलब्ध चीनी की बिक्री करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों एवं सचिवों को लगातार क्षेत्र में भ्रमण करने और कहीं कोई समस्या आने पर संबंधित क्रय केंद्र पर पहुंच कर उसका समाधान करने के निर्देश दिए।
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गन्ना की खरीद में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए तौल लिपिकों से लेकर गन्ना समितियों और चीनी मिलों के कर्मचारियों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए हैं। शासन ने घोषणा पत्र भरने की समय सीमा 10 दिसंबर तक बढ़ा दी है, लेकिन अभी तक जनपद में 1.80 लाख किसानों मे से केवल 1.20 लाख किसानों ने घोषणा पत्र भरे हैं। नियत तिथि तक जो किसान घोषणा पत्र नहीं भरेंगे, उनको विभागीय सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी और उनका सट्टा भी बंद कर दिया जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी।