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Shahjahanpur News: चित्रा नक्षत्र एवं शुभ योग में मनाया जाएगा गणेश चतुर्थी उत्सव
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पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाते हैं। इस साल 27 अगस्त को चित्रा नक्षत्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया जाएगा।
श्री रुद्र बाला जी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि भगवान गणेश को विघ्नहरता, बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों में उनकी मूर्ति स्थापित कर आराधना करते हैं और पूरे 10 दिनों तक धार्मिक आयोजन करते हैं।
उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी का पूजा मुहूर्त महावीर पंचाग के अनुसार चतुर्थी तिथि 26 अगस्त दिन बुधवार को दिन में 12:39 से प्रारंभ हो जाएगी, जो 27 अगस्त दिन बुधवार को दिन में 02:06 तक रहेगी। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 01 मिनट से हो रहा है, जो दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, फिर 1:30 मिनट से 02:06 मिनट तक रहेगा।
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इस समय में गणेश जी की स्थापना करके विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस बीच 12:00 से 1:30 बजे तक राहुकाल रहेगा। उन्होंने बताया कि दूर्वा भगवान गणेश को बेहद ही प्रिय है। इसे पूजा में अवश्य शामिल करें। मोदक भगवान गणेश की पसंदीदा मिठाई है। ऐसे में भगवान को भोग के रूप में मोदक अवश्य चढ़ाएं।
इससे उनकी प्रसन्नता शीघ्र हासिल होती है। बप्पा का प्रिय फल केला पूजा में अवश्य शामिल करें। सिंदूर का तिलक लगाना बेहद शुभ माना गया है। भगवान गणेश की पूजा में गन्ना शामिल करने से आपके जीवन में भी मिठास घुलने लगती है।
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गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के दिन विधिपूर्वक गणपति बप्पा की मूर्ति को एक चौकी पर पीले रंग की चादर या कपड़ा बिछाकर रखें। उनका गंगाजल से अभिषेक करें, फिर वस्त्र, फूल, माला, जनेऊ आदि से उनको सुशोभित करें। उसके बाद अक्षत, हल्दी, पान का पत्ता, सुपारी, चंदन, धूप, दीप, नारियल आदि से पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
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गणेश प्रतिमा विसर्जन
गणेश चतुर्थी का समापन अनंत चतुर्दशी को होता है, जब बप्पा की प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाता है। इस बार गणेश प्रतिमा विसर्जन 6 सितंबर शनिवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त बप्पा से अगले वर्ष शीघ्र आगमन की प्रार्थना करते हैं। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।
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श्री रुद्र बाला जी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि भगवान गणेश को विघ्नहरता, बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों में उनकी मूर्ति स्थापित कर आराधना करते हैं और पूरे 10 दिनों तक धार्मिक आयोजन करते हैं।
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उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी का पूजा मुहूर्त महावीर पंचाग के अनुसार चतुर्थी तिथि 26 अगस्त दिन बुधवार को दिन में 12:39 से प्रारंभ हो जाएगी, जो 27 अगस्त दिन बुधवार को दिन में 02:06 तक रहेगी। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 01 मिनट से हो रहा है, जो दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, फिर 1:30 मिनट से 02:06 मिनट तक रहेगा।
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इस समय में गणेश जी की स्थापना करके विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस बीच 12:00 से 1:30 बजे तक राहुकाल रहेगा। उन्होंने बताया कि दूर्वा भगवान गणेश को बेहद ही प्रिय है। इसे पूजा में अवश्य शामिल करें। मोदक भगवान गणेश की पसंदीदा मिठाई है। ऐसे में भगवान को भोग के रूप में मोदक अवश्य चढ़ाएं।
इससे उनकी प्रसन्नता शीघ्र हासिल होती है। बप्पा का प्रिय फल केला पूजा में अवश्य शामिल करें। सिंदूर का तिलक लगाना बेहद शुभ माना गया है। भगवान गणेश की पूजा में गन्ना शामिल करने से आपके जीवन में भी मिठास घुलने लगती है।
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के दिन विधिपूर्वक गणपति बप्पा की मूर्ति को एक चौकी पर पीले रंग की चादर या कपड़ा बिछाकर रखें। उनका गंगाजल से अभिषेक करें, फिर वस्त्र, फूल, माला, जनेऊ आदि से उनको सुशोभित करें। उसके बाद अक्षत, हल्दी, पान का पत्ता, सुपारी, चंदन, धूप, दीप, नारियल आदि से पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
गणेश प्रतिमा विसर्जन
गणेश चतुर्थी का समापन अनंत चतुर्दशी को होता है, जब बप्पा की प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाता है। इस बार गणेश प्रतिमा विसर्जन 6 सितंबर शनिवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त बप्पा से अगले वर्ष शीघ्र आगमन की प्रार्थना करते हैं। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।