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फिर से भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा
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लखनऊ में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा का स्वागत करते लक्ष्मी क
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। सपा से ददरौल विधानसभा से टिकट न मिलने पर रविवार को पूर्व मंत्री अवधेश कुमार वर्मा ने लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। अवधेश वर्मा ने कहा कि वह भाजपा प्रत्याशियों को जिताकर सपा में हुए अपमान का बदला लेेंगे।
ददरौल विधानसभा से अवधेश वर्मा ने वर्ष 2002 में बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। मायावती ने दोबारा उन पर विश्वास जताते हुए 2007 में चुनाव में मैदान में उतारा। उनके शानदार जीत दर्ज करने पर बसपा सरकार में उन्हें मंत्री पद से नवाजा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने अवधेश वर्मा का टिकट काट दिया था। उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा था।
इसके बाद अवधेश वर्मा ने समर्थकों को बुलाकर मीटिंग की थी। अवधेश उस मीटिंग में फूट-फूटकर रोए थे। इस बीच उन्होंने भाजपा का दामन थामा और ददरौल से फिर चुनाव मैदान में उतरे। इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2017 के चुनाव में अवधेश वर्मा ने चुनाव लड़ने के लिए फिर से पाला बदलते हुए बसपा का दामन थाम लिया। तब बसपा ने उन्हें तिलहर विधानसभा से चुनाव में उतारा था। उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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इस वर्ष चुनाव लड़ने के लिए अवधेश वर्मा ने दल को बदलते हुए भाजपा से सपा का दामन थाम लिया। उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। लेकिन, पूर्व मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा के पुत्र राजेश वर्मा का दावा मजबूत मानते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व ने अवधेश वर्मा को नकार दिया। माना जा रहा था कि अवधेश बसपा से फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन, उन्होंने चुनाव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया। रविवार को पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने लखनऊ में भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें ज्वाइनिंग कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सदस्यता ग्रहण कराई।
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ददरौल विधानसभा से अवधेश वर्मा ने वर्ष 2002 में बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। मायावती ने दोबारा उन पर विश्वास जताते हुए 2007 में चुनाव में मैदान में उतारा। उनके शानदार जीत दर्ज करने पर बसपा सरकार में उन्हें मंत्री पद से नवाजा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने अवधेश वर्मा का टिकट काट दिया था। उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा था।
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इसके बाद अवधेश वर्मा ने समर्थकों को बुलाकर मीटिंग की थी। अवधेश उस मीटिंग में फूट-फूटकर रोए थे। इस बीच उन्होंने भाजपा का दामन थामा और ददरौल से फिर चुनाव मैदान में उतरे। इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2017 के चुनाव में अवधेश वर्मा ने चुनाव लड़ने के लिए फिर से पाला बदलते हुए बसपा का दामन थाम लिया। तब बसपा ने उन्हें तिलहर विधानसभा से चुनाव में उतारा था। उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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इस वर्ष चुनाव लड़ने के लिए अवधेश वर्मा ने दल को बदलते हुए भाजपा से सपा का दामन थाम लिया। उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। लेकिन, पूर्व मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा के पुत्र राजेश वर्मा का दावा मजबूत मानते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व ने अवधेश वर्मा को नकार दिया। माना जा रहा था कि अवधेश बसपा से फिर से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन, उन्होंने चुनाव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया। रविवार को पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा ने लखनऊ में भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें ज्वाइनिंग कमेटी के चेयरमैन लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सदस्यता ग्रहण कराई।