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Shahjahanpur News: बाढ़ का पानी घटा, नाले और पोखर अब भी बने मुसीबत
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जलालाबाद के गांव कोठीवाल बाग के पास पानी भरे रहे खेत मे खराब हुई मक्का की फसल। संवाद
जलालाबाद। रामगंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर कम होने से क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात तो खत्म हो गए हैं, लेकिन नदियों के उफान के साथ भरने वाले नाले और पोखर अब भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। एलमनगर कटरिया, मंझरा, कसारी, तिकोला, शाहपुर, हथिनापुर और तेरा समेत करीब एक दर्जन निचले इलाकों के गांवों में पानी लगातार कम हो रहा है, लेकिन खेतों और रास्तों में जलभराव की समस्या बनी हुई है।
एलमनगर से मंझरा जाने वाले मार्ग पर करीब 20 मीटर हिस्से में अब भी पानी बह रहा है। आसपास के मेड़ और वैकल्पिक रास्ते भी पानी में डूबे हैं। इससे ग्रामीणों को पिटारमऊ होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पुलिया भी आवागमन के लिए खतरा बनी हुई है। गांवों के अंदर कीचड़युक्त रास्तों से लोगों को निकलने में परेशानी हो रही है।
वहीं, लंबे समय से पानी में डूबी मक्का समेत अन्य फसलें खराब होने लगी हैं। पशुओं के चारे की समस्या भी ग्रामीणों को परेशान कर रही है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले स्थानों से पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि पानी कम होने के बाद भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालात पूरी तरह सामान्य होने के बाद नुकसान का सही आकलन कराया जाएगा।
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एलमनगर से मंझरा जाने वाले मार्ग पर करीब 20 मीटर हिस्से में अब भी पानी बह रहा है। आसपास के मेड़ और वैकल्पिक रास्ते भी पानी में डूबे हैं। इससे ग्रामीणों को पिटारमऊ होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पुलिया भी आवागमन के लिए खतरा बनी हुई है। गांवों के अंदर कीचड़युक्त रास्तों से लोगों को निकलने में परेशानी हो रही है।
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वहीं, लंबे समय से पानी में डूबी मक्का समेत अन्य फसलें खराब होने लगी हैं। पशुओं के चारे की समस्या भी ग्रामीणों को परेशान कर रही है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले स्थानों से पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि पानी कम होने के बाद भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालात पूरी तरह सामान्य होने के बाद नुकसान का सही आकलन कराया जाएगा।