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बेघर हुए परिवार, पलायन कर ऊंचे स्थानों पर डाला डेरा
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शाहजहांपुर/मिर्जापुर। बारिश में कमी आने और बैराजों से पानी की निकासी घटने के बावजूद कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटे से 143.59 मीटर पर स्थिर है। इस वजह से मिर्जापुर क्षेत्र में ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी और उसके मजरों में रहने वालों को अभी बाढ़ से कोई खास राहत नहीं मिल सकी है। आजादनगर और इस्लामनगर के कई परिवार बुधवार को घरों से पलायन कर गांव से बाहर निकल आए और सड़कों समेत अन्य ऊंचे स्थानों पर डेरा डालकर समय व्यतीत कर रहे हैं। भोजन पकाने के लिए ईंधन, पशु चारा और दवाओं का प्रशासन स्तर से बंदोबस्त नहीं होने से बाढ़ प्रभावित परिवार बेहद परेशान हैं। उधर, रामगंगा में दस सेमी पानी बढ़ने से परौर के तटवर्ती गांवों के आसपास भूमि कटान रुक गया है लेकिन बाढ़ से वहां के लोग डरे हुए हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचनाओं के अनुसार बुधवार को सुबह नरौरा बैराज से गंगा में रिलीज पानी की मात्रा 1.13 लाख क्यूसेक से घटकर 76575 क्यूसेक रह गई है। सिंचाई विभाग के मुताबिक नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में बारिश थमी हुई है और बैराजों से पानी की मात्रा घट रही है। इसे देखते बृहस्पतिवार से गंगा के जलस्तर में कमी आने लगेगी। अन्य बैराजों से रामगंगा मेें रिलीज हो रहे पानी की मात्रा भी घटकर 25125 क्यूसेक रह गई है और इसे देखते अगले 24 घंटे में परौर क्षेत्र में रामगंगा के उतार पर आने की संभावना बढ़ गई है। इसकेे बावजूद जिन घरों में बाढ़ का पानी चला गया, उसे निकलने और घरों को रहने लायक बनाने में तीन-चार दिन का वक्त लग सकता है।
बाढ़ पीड़ितों को सिर छिपाने को मिले तिरपाल
करीब एक पखवाड़े से बाढ़ का कहर झेल रहे आजादनगर, इस्लामनगर और पैलानी उत्तरी के बाढ़ पीड़ितों का सुरक्षित स्थानों पर पलायन जारी है। बुधवार को प्रशासन ने खुले आसमान तले डेरा डाले 108 विस्थापित परिवारों को सिर छिपाने के लिए तिरपालों का वितरण किया। बाढ़ से चौतरफा घिरे गांवों के कई परिवार आज भी नाव में अपनी गृहस्थी भरकर सुरक्षित स्थान चौंरा-बसोला मार्ग पर डेरा डालने पहुंचे। राजस्व निरीक्षक परशुराम शुक्ला और लेखपाल सत्येंद्र कुमार सिंह ने गांव के सपा नेता रिजवान अहमद के साथ विस्थापित परिवारों को तिरपाल बांटे और पानी कम होने तक सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की।
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राहत को तरसे पड़ोसी जिले के पीड़ित
बाढ़ से घिरे आजादनगर से बमुश्किल 50 मीटर दूरी पर बसे पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद जिले के गांव चितार और कमथरी भी बाढ़ से चौतरफा घिरे हैं, लेकिन वहां के पीड़ित परिवार अपने जिले के अधिकारियों से सहायता नहीं मिलने से दुखी हैं। बता दें कि शाहजहांपुर जिले के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री की किट पहले ही मिल चुकी हैं लेकिन पड़ोसी फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने कमथरी और चितार गांव के लोगों की कोई खैर-खबर नहीं ली। ढाई घाट मार्ग पर तीन फुट तक पानी बहने से फर्रुखाबाद के अधिकारी प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच सके हैं।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को कई दिन से दूषित पेयजल और बासी भोजन मिल रहा है। प्रशासन यदि ईंधन और पानी की व्यवस्था करा दे तो बहुत सहूलियत हो जाएगी।
-फारुख अली, ग्राम प्रधान, पैलानी उत्तरी
बाढ़ की स्थिति और प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। केवल ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी के कुछ गांव बाढ़ से ज्यादा प्रभावित हैं। आज कानूनगो और लेखपाल को आजादनगर भेजकर सड़कों पर पहुंचे परिवारों को बारिश से बचाव के लिए तिरपाल वितरित कराए हैं। जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न की किटें लगातार दी जा रही हैं।
-रमेश बाबू, एसडीएम कलान
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचनाओं के अनुसार बुधवार को सुबह नरौरा बैराज से गंगा में रिलीज पानी की मात्रा 1.13 लाख क्यूसेक से घटकर 76575 क्यूसेक रह गई है। सिंचाई विभाग के मुताबिक नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में बारिश थमी हुई है और बैराजों से पानी की मात्रा घट रही है। इसे देखते बृहस्पतिवार से गंगा के जलस्तर में कमी आने लगेगी। अन्य बैराजों से रामगंगा मेें रिलीज हो रहे पानी की मात्रा भी घटकर 25125 क्यूसेक रह गई है और इसे देखते अगले 24 घंटे में परौर क्षेत्र में रामगंगा के उतार पर आने की संभावना बढ़ गई है। इसकेे बावजूद जिन घरों में बाढ़ का पानी चला गया, उसे निकलने और घरों को रहने लायक बनाने में तीन-चार दिन का वक्त लग सकता है।
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बाढ़ पीड़ितों को सिर छिपाने को मिले तिरपाल
करीब एक पखवाड़े से बाढ़ का कहर झेल रहे आजादनगर, इस्लामनगर और पैलानी उत्तरी के बाढ़ पीड़ितों का सुरक्षित स्थानों पर पलायन जारी है। बुधवार को प्रशासन ने खुले आसमान तले डेरा डाले 108 विस्थापित परिवारों को सिर छिपाने के लिए तिरपालों का वितरण किया। बाढ़ से चौतरफा घिरे गांवों के कई परिवार आज भी नाव में अपनी गृहस्थी भरकर सुरक्षित स्थान चौंरा-बसोला मार्ग पर डेरा डालने पहुंचे। राजस्व निरीक्षक परशुराम शुक्ला और लेखपाल सत्येंद्र कुमार सिंह ने गांव के सपा नेता रिजवान अहमद के साथ विस्थापित परिवारों को तिरपाल बांटे और पानी कम होने तक सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की।
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राहत को तरसे पड़ोसी जिले के पीड़ित
बाढ़ से घिरे आजादनगर से बमुश्किल 50 मीटर दूरी पर बसे पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद जिले के गांव चितार और कमथरी भी बाढ़ से चौतरफा घिरे हैं, लेकिन वहां के पीड़ित परिवार अपने जिले के अधिकारियों से सहायता नहीं मिलने से दुखी हैं। बता दें कि शाहजहांपुर जिले के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री की किट पहले ही मिल चुकी हैं लेकिन पड़ोसी फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने कमथरी और चितार गांव के लोगों की कोई खैर-खबर नहीं ली। ढाई घाट मार्ग पर तीन फुट तक पानी बहने से फर्रुखाबाद के अधिकारी प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच सके हैं।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को कई दिन से दूषित पेयजल और बासी भोजन मिल रहा है। प्रशासन यदि ईंधन और पानी की व्यवस्था करा दे तो बहुत सहूलियत हो जाएगी।
-फारुख अली, ग्राम प्रधान, पैलानी उत्तरी
बाढ़ की स्थिति और प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। केवल ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी के कुछ गांव बाढ़ से ज्यादा प्रभावित हैं। आज कानूनगो और लेखपाल को आजादनगर भेजकर सड़कों पर पहुंचे परिवारों को बारिश से बचाव के लिए तिरपाल वितरित कराए हैं। जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न की किटें लगातार दी जा रही हैं।
-रमेश बाबू, एसडीएम कलान