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पांच अधिवक्ता बने विधायक, वकीलों की बढ़ी उम्मीदें
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शाहजहांपुर। जनपद की राजनीति में पेशे से अधिवक्ता प्रत्याशियों ने जलवा बिखेरा है। छह विधानसभा क्षेत्रों में पांच पर अधिवक्ताओं ने जीत दर्ज की है। इसके बाद वकीलों की उम्मीदें बढ़ गईं कि उनकी लंबित समस्याओं का निस्तारण हो सकेगा।
इस बार शहर सीट से सुरेश खन्ना, ददरौल से मानवेंद्र सिंह, पुवायां से चेतराम, जलालाबाद से हरिप्रकाश वर्मा और कटरा से वीर विक्रम सिंह प्रिंस ने जीत दर्ज की है। विधायक बनने वाले ये सभी नेता अधिवक्ता भी हैं। वहीं तिलहर से विधायक चुनी गईं सलोना कुशवाहा अस्पताल प्रबंधन से जुड़ी हुई हैं। जलालाबाद से विधायक चुने गए हरिप्रकाश वर्मा तो दो साल पहले तक काला कोट पहनकर कचहरी में वकालत तक करते रहे। उन्हें जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद चुनाव में टिकट दे दिया गया। जनपद के अधिवक्ताओं की विधानसभाओं में नुमाइंदगी होने से जनपद के वकील भी काफी ज्यादा खुश हैं। उन्हें आस है कि वर्षों से लंबित पड़ी उनकी समस्याओं का समाधान हो सकेंगा।
कचहरी में सबसे बड़ी दिक्कत अधिवक्ताओं के बैठने के लिए जगह की है। वकीलों की संख्या बढ़ रही है, पर जगह नहीं मिल पा रही है। पार्किंग की व्यवस्था भी सही नहीं है। इसके कारण वकीलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कलक्ट्रेट की तरफ भी वकीलों के बैठने का पर्याप्त व्यवस्था होने की उम्मीद है। - अनीत त्रिवेदी, पूर्व महासचिव, सेंट्रल बार एसोसिएशन
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-हर पेशे में व्यक्ति का स्तर काफी ऊंचा हो गया है। लेकिन, वकील अभी तक टिनेशड के नीचे बैठने को मजबूर हैं। वकीलों के लिए पहले मुलायम सिंह यादव की सरकार में चैंबर बने थे। तब से अभी तक किसी सरकार ने नहीं सुना। उम्मीद यही है कि वकीलों के लिए चैंबर बनवाने की व्यवस्था होगी।
- एजाज हसन खां, पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन।
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इस बार शहर सीट से सुरेश खन्ना, ददरौल से मानवेंद्र सिंह, पुवायां से चेतराम, जलालाबाद से हरिप्रकाश वर्मा और कटरा से वीर विक्रम सिंह प्रिंस ने जीत दर्ज की है। विधायक बनने वाले ये सभी नेता अधिवक्ता भी हैं। वहीं तिलहर से विधायक चुनी गईं सलोना कुशवाहा अस्पताल प्रबंधन से जुड़ी हुई हैं। जलालाबाद से विधायक चुने गए हरिप्रकाश वर्मा तो दो साल पहले तक काला कोट पहनकर कचहरी में वकालत तक करते रहे। उन्हें जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद चुनाव में टिकट दे दिया गया। जनपद के अधिवक्ताओं की विधानसभाओं में नुमाइंदगी होने से जनपद के वकील भी काफी ज्यादा खुश हैं। उन्हें आस है कि वर्षों से लंबित पड़ी उनकी समस्याओं का समाधान हो सकेंगा।
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कचहरी में सबसे बड़ी दिक्कत अधिवक्ताओं के बैठने के लिए जगह की है। वकीलों की संख्या बढ़ रही है, पर जगह नहीं मिल पा रही है। पार्किंग की व्यवस्था भी सही नहीं है। इसके कारण वकीलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कलक्ट्रेट की तरफ भी वकीलों के बैठने का पर्याप्त व्यवस्था होने की उम्मीद है। - अनीत त्रिवेदी, पूर्व महासचिव, सेंट्रल बार एसोसिएशन
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-हर पेशे में व्यक्ति का स्तर काफी ऊंचा हो गया है। लेकिन, वकील अभी तक टिनेशड के नीचे बैठने को मजबूर हैं। वकीलों के लिए पहले मुलायम सिंह यादव की सरकार में चैंबर बने थे। तब से अभी तक किसी सरकार ने नहीं सुना। उम्मीद यही है कि वकीलों के लिए चैंबर बनवाने की व्यवस्था होगी।
- एजाज हसन खां, पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन।