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भ्रूण हत्या पर ‘खामोश क्यों’?
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 02 Dec 2015 12:21 AM IST
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जिला कारागार के बंदियों ने प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कन्या भ्रूण हत्या पर आधारित नाटक ‘खामोश क्याें’ का जेल परिसर में ही मंचन किया। इस कार्य मेें युवा कलाकार कप्तान सिंह कर्णधार ने निर्देशक की सशक्त भूमिका निभाई।
जेल अधिकारियों के सहयोग और गंगा शिक्षा संस्कृति सेवा समिति के बैनर तले नाटक का मंचन किया गया। कई नाटकों को खेल चुके कलाकारों को निर्देशित करना टेढ़ी खीर होता है, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि कारागार में बंद युवाओं को नाटक मंचन के लिए तैयार करना कितना कठिन कार्य होगा, यह बात कप्तान कर्णधार से बेहतर और कौन समझ सकता है। कई दिनों की कार्यशाला के बाद नाटक का मंचन सोमवार को किया गया। खास बात यह थी कि नाटक का लेखन भी पुनीत नामक बंदी ने किया था। पुनीत ने कन्या भ्रूण हत्या को महापाप बताते हुए समाज को कन्याओं को संरक्षण देेने के लिए प्रेरित किया। नाटक का मंचन भी बंदियों ने ही किया, जिसमें रिंकू, रजनीश, गौरव, शिव कुमार, पिंटू, रजनीश, राज कुमार, मनोज, केशव तथा व्यवस्था में लेखक पुनीत, पप्पू, आशीष, कामरान खां, अमित यादव, दीपा आदि का योगदान रहा।
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जेल अधिकारियों के सहयोग और गंगा शिक्षा संस्कृति सेवा समिति के बैनर तले नाटक का मंचन किया गया। कई नाटकों को खेल चुके कलाकारों को निर्देशित करना टेढ़ी खीर होता है, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि कारागार में बंद युवाओं को नाटक मंचन के लिए तैयार करना कितना कठिन कार्य होगा, यह बात कप्तान कर्णधार से बेहतर और कौन समझ सकता है। कई दिनों की कार्यशाला के बाद नाटक का मंचन सोमवार को किया गया। खास बात यह थी कि नाटक का लेखन भी पुनीत नामक बंदी ने किया था। पुनीत ने कन्या भ्रूण हत्या को महापाप बताते हुए समाज को कन्याओं को संरक्षण देेने के लिए प्रेरित किया। नाटक का मंचन भी बंदियों ने ही किया, जिसमें रिंकू, रजनीश, गौरव, शिव कुमार, पिंटू, रजनीश, राज कुमार, मनोज, केशव तथा व्यवस्था में लेखक पुनीत, पप्पू, आशीष, कामरान खां, अमित यादव, दीपा आदि का योगदान रहा।
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