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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Farmers will not be able to burn stool in the field

अब खेत में नरई नहीं जला सकेंगे किसान

Sun, 02 Apr 2017 12:11 AM IST
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 02 Apr 2017 12:11 AM IST
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 अबकी गेहूं काटने के बाद अगर नरई जलाई तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। खुद मुख्यमंत्री ने इसे संज्ञान में लेकर अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 
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खेत में नरई जलाने से प्रदूषण के साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान पहुंचता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नरई जलाने से भूमि के तमाम पोषक तत्व नष्ट होने के साथ ही मित्र कीट भी जलकर मर जाते हैं। नरई जलाने से अच्छा है कि नरई को खेत में ही जोत दिया जाए। थोड़ी सी यूरिया डाल देने से नरई जल्द ही खेत में गल जाती है और खाद का काम करती है। सीओ अरुण कुमार का कहना है कि शासन के आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। 
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नरई जलाने से कभी भी हो सकता है भारी नुकसान
पुवायां। गेहूं की कटाई के बाद शाम होते ही तमाम खेतों में नरई जलाने का काम शुरू कर दिया जाता है। इससे बड़ा हादसा भी हो सकता है।
नरई जलाने पर तेज हवा के कारण जरा सी चिंगारी थोड़ी ही देर में उग्र रूप धारण कर लेती है और हवा के कारण उठने वाली लपटों से आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। पिछले सालों में कई स्थानों पर तेज हवा के दौरान नरई जलाने से भारी नुकसान हुआ था। नरई जलाने की बड़ी वजह साठा धान है। क्षेत्र के बड़े और मझोले किसान गेहूं काटने के तुरंत बाद साठा धान लगाते हैं। गेहूं को कंबाइन से कटवाने के बाद यदि नरई नहीं जलाई जाए तो साठा धान की रोपाई में दिक्कत होती है। इस वजह से दूसरों के नुकसान की चिंता किए बगैर नरई जलाई जाती है और जरा सी लापरवाही तमाम लोगों का निवाला छीन लेती है।
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