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चौपाल में किसानों, बेराजेगारों की बात, भाषा की मर्यादा पर भी लोग चिंतित

Wed, 23 Feb 2022 12:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 12:41 AM IST
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Farmers, unemployed, worried about indecent language
पुवायां (शाहजहांपुर)। चुनाव के बाद अब चौपालों पर हार जीत को लेकर बहस का दौर चल रहा है। इसके अलावा बड़े नेताओं के भाषण भी चर्चा में हैं। कोई भाजपा का कमल खिलने का दावा कर रहा है तो कोई सपा की साइकिल सबसे तेज दौड़ने की बात कर रहा है। चर्चा केवल स्थानीय सीट को लेकर नहीं हो रही है, लोग प्रदेश में सरकार बनने को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं। गांव मझिगवां में बस स्टैंड के पास लगी चौपाल पर भी लोग चुनावी चर्चा में व्यस्त थे।
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गांव घनश्यामपुर के सचिन कुमार ने कहा कि प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बन सकती है। छुट्टा पशुओं को लेकर बड़ी समस्या है, लेकिन अब प्रधानमंत्री ने कह दिया है कि दस मार्च के बाद पशुओं के मामले में योजना बनाकर काम किया जाएगा और किसानों को राहत दिलाई जाएगी। प्रधानमंत्री का छुट्टा पशुओं की समस्या का संज्ञान लेना अच्छी बात है। जल्द ही इसका समाधान भी निकलेगा। गांव मझिगवां के ब्रजेश कुमार ने कहा कि सरकार भाजपा की बने चाहे सपा की, लेकिन किसानों को सस्ती बिजली, डीजल, खाद की उपलब्धता और फसलों का सेंटरों पर बिकना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सबसे ज्यादा परेशान किसान ही है।
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दीपक कुमार ने कहा कि प्रदेश में भाजपा और सपा की कड़ी टक्कर चल रही है। जो भी दल सरकार बनाए, वह बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के हित के लिए काम करे। किसी वर्ग को अलग से लाभ न दिया जाए। कुछ दल ऐसा करते रहे हैं, जिस कारण वह सत्ता से बाहर हो गए। गांव बनिगवां के शीलू ने कहा कि प्रदेश में बिजली खूब मिल रही है। गुंडागर्दी भी कम हुई है, लेकिन महंगाई बढ़ी है। केंद्र को प्रदेश में बनने वाली सरकार के साथ महंगाई पर रोक लगाने का प्रयास करना चाहिए। वीरू ने कहा कि भाजपा और सपा के बीच टक्कर है, लेकिन बसपा भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
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किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो छोटे दल सत्ता की चाबी होंगे। ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि युवा बेरोजगारी के कारण परेशान हैं। सरकार को रोजगार ज्यादा देने चाहिए, इससे गरीबी दूर होगी और लोगों की सरकार पर निर्भरता भी कम होगी। विमलेश कुमार ने कहा कि सरकार केवल निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करें। फीस, महंगी किताबें अभिभावकों की सबसे बड़ी समस्या है। गांव मुड़िया कुर्मियात के अवधेश कुमार का कहना था कि चुनाव में नेताओं ने भाषा की तमाम मर्यादाएं तोड़ दी हैं, यह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। बात केवल समस्याओं और विकास पर होनी चाहिए।
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