मंडियों में नया धान लेकर पहुंचने लगे किसान
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मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में धान की सरकारी खरीद शुरू होने में भले ही एक सप्ताह बाकी हो, कृषि उत्पादन मंडी समितियों में धान की नई फसल लेकर किसान पहुंचने लगे हैं। यह अलग बात है कि जल्दी काटे गए धान में नमी ज्यादा होने से मंडियों के गल्ला आढ़ती उन्हें औने-पौने दाम देकर टरका रहे हैं। इधर, सरकारी खरीद शुरू होने से पहले प्रशासन ने विभिन्न क्रय एजेंसियों को 21 अतिरिक्त केंद्र एलॉट कर दिए हैं। गत वर्ष जिले को 3.60 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है और इसके लिए विभिन्न क्रय एजेंसियों के 83 केंद्र खोले गए थे। इस वर्ष खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 4.40 लाख मीट्रिक टन कर दिए जाने से प्रशासन भी उसी के अनुरूप क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने में जुट गया है। दो सप्ताह पहले विभिन्न एजेंसियों के 108 क्रय केंद्र तय हुए, लेकिन अब उन्हें बढ़ाकर 129 कर दिया गया है। इन क्रय केंद्रों में सर्वाधिक पीसीएफ के 41, पीसीयू के 30, मार्केटिंग के 27, नैफेड के दस, एसएफसी के आठ और यूपी एग्रो के चार केंद्र शामिल हैं। हालांकि, यह क्रय केंद्र अभी अस्तित्व में नहीं आए हैं, लेकिन मंडियों में धान की नई उपज पहुंचने लगी है। इससे रोजा और पुवायां मंडी में गल्ला आढ़तियों का काम चल निकला, लेकिन तिलहर और जलालाबाद की मंडियों में धान की आवक शुरू नहीं होने से आढ़ती मूंगफली, मक्का आदि की खरीद-फरोख्त में समय बिता रहे हैं। जिला खाद्य विपणन अधिकारी रूपेश सिंह के अनुसार समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल खरीदने के लिए धान खरीद की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।रोजा। स्थानीय मंडी में नए धान की आवक शुरू हो गई। जिससे तीन माह से खाली बैठे आढ़तियों के चेहरों पर मुस्कान आ गई। यद्यपि धान में नमी ज्यादा होने से किसानों को अपनी उपज का कम मूल्य ही मिल पा रहा है। मंडी सचिव संजय सिंह ने बताया कि किसानों के लिए सरकारी क्रय केंद्र पहली अक्टूबर से प्रस्तावित है क्योेंकि अभी बहुत कम मात्रा में रोजाना औसतन 300 क्विंटल धान की आवक हो रही है।
पुवायां। सरकारी खरीद भले ही देर से शुरू हो, मंडी में नया धान लेकर आने वाले किसानों की रौनक बढ़ने लगी है। गल्ला आढ़ती धान में नमी अधिक देख मनमाने रेट पर सौदा कर रहे हैं। मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार के अनुसार रोजाना करीब 500 क्विंटल नए धान की आवक हो रही है, लेकिन उसमें गीलापन अधिक होने से किसानों को वाजिब दाम मिलने में थोड़ा समय लगेगा।