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बैंकों की ज्यादातर कृषि योजनाओं से किसान अंजान
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:04 AM IST
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कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बैंकों द्वारा केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से किसान अंजान बने रहते हैं। इसकी खास वजह यह है कि उन योजनाओं का ज्यादा प्रचार-प्रसार नहीं कराया जाता। इस कारण कृषि प्रधान जिले के बड़ी संख्या में जरूरतमंद किसान ऐसी योजनाओं से अंजान बने रहते हैं। योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है। खास बात यह है कि कृषि विभाग और बैंक प्रबंधन से जुड़े अधिकारी ऐसी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का जिम्मा एक-दूसरे पर थोप रहे हैं।
ऋण स्वीकृति की 80 प्रतिशत हो सकी लक्ष्य पूर्ति
शाहजहांपुर। विगत वर्ष बारिश से बर्बाद हुए किसानों को कर्ज देने में बैंकें हाथ खींच रही हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि ऋण दिए जाने का लक्ष्य कम नियत किए जाने से अधिकांश किसान सूदखोरों के चंगुल में फंसने को मजबूर हैं।
कोआपरेटिव सेक्टर ने दिए महज 1.66 करोड़
जिले की सहकारी समितियों ने 73235 किसानों को महज 1.66 करोड़ के ऋण बांटे जबकि समितियों पर किसानों को केवल तीन फीसदी ब्याज पर खाद-बीज के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध है। समितियों पर दलालों और बड़े किसानों का बोलबाला होने से कम जोत वाले ऋण पाने के लिए चक्कर काटते रह जाते हैं।
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बैंकों की आपत्तियों से किसान परेशान
कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी भी मानते हैं कि शार्ट टर्म लोन देने वाली बैंकेें छोटे किसानों की ऋण पत्रावलियों को तरह-तरह की आपत्तियां लगाकर अस्वीकृत कर देती हैं। इसके पीछे बैंक अफसरों की यह सोच काम करती है कि कम जोत वाले किसान समय से ऋण की अदायगी नहीं कर पाएंगे, जबकि इसका बोझ अतिरिक्त ब्याज चुकाकर किसान ही उठाते हैं।
किसान हित की तमाम बैंक योजनाएं प्रभावी
बैंकों के जरिए एक ही छत के नीचे खाद, बीज, पेस्टीसाइड्स की उपलब्धता को एग्री जंक्शन, एग्रीकल्चर मशीनरी स्कीम के तहत ट्रैक्टर लोन, फसलों की ढुलाई को एग्री व्हीकल फाइनेंस स्कीम, पशुओं के लिए एग्री फॉर्म शेड स्कीम, आपातकालीन वित्तीय जरूरतों के लिए बड़ौदा किसान तत्काल योजना, फसल उत्पादन को गोल्ड लोन स्कीम, बड़ौदा जनरल क्रेडिट कार्ड, छोटे किसानों के लिए कृषि भूमि खरीद को ऋण, ग्रामीण भंडारण आदि योजनाएं संचालित हैं।
एग्री जंक्शन लाभान्वित हो रहे किसान
पुवायां। सरकार की एक योजना एग्री जंक्शन के नाम से है। इसके तहत कृषि स्नातकों को खाद, पेस्टीसाइड्स आदि का लाइसेंस देकर किसानों के लिए एक ही स्थान पर खाद, बीज, दवाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत कृषि स्नातक को निशुल्क लाइसेंस दिया जाता है। दुकान आदि का एक वर्ष तक का किराया आदि सरकार वहन करती है। दुकान के फर्नीचर आदि के लिए बैंक कर्ज उपलब्ध कराती है। पुवायां के गांव बनिगवां में एक एग्री जंक्शन खोला गया है। एग्री जंक्शन के स्वामी श्रीश चंद्र मिश्रा का कहना है कि एग्री जंक्शन खुलने के बाद किसान इसका लाभ लेने लगे हैं।
किसानों की बात: उन्हीं की जुबानी
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मुझे तो सिर्फ केंद्र की उज्ज्वला योजना के बारे में ही पता है। इसके अलावा अन्य किसी योजना का लाभ नहीं मिला। सरकार को गांव-गांव शिविर लगाकर योजनाओं का प्रचार प्रसार करना चाहिए।
मुकेश यादव, गांव उदरा टिकरी, बंडा
खाद और बीज आदि पर सब्सिडी के बारे में पता चला था, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं है।
-बल्देव सिंह, कोचर फार्म, खुटार
सरकार की किसानों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं की जानकारी नहीं दी जाती है तो किसान को कैसे पता चले और वे कैसे उनका लाभ उठाएं। किसानों को बैंक से कर्ज दिया जाता है। इसके अलावा किसी योजना की जानकारी नहीं है।
-धीर सिंह, ग्राम रूरा, खुटार
किसानों की दिक्कतों पर अफसरों की सफाई
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किसानों को ऋण देने में बिचौलियों की भूमिका निष्क्रिय बनाने को बैंकों में व्यापार प्रतिनिधि नियुक्त हैं जो किसानों और बैंकों के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। योजनाओं का प्रचार-प्रसार भारत सरकार और कृषि विभाग के माध्यम से कराया जाता है। बैंक स्तर से लगने वाले किसान शिविरों का व्यय वहन शाखा प्रबंधक अपनी सीमित पॉवर से करते हैं।
चंद्रशेखर जोशी, अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा
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कृषि मेलों, गोष्ठियों, किसान-वैज्ञानिक संवाद आदि आयोजनों के माध्यम से किसानों को विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूककिया जाता है। ऐसे आयोजन पूरे वर्ष होते हैं। बैंकों से संचालित किसान हित की योजनाओं के प्रचार का दायित्व बैंकें निभाती हैं।
डीएस चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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ऋण स्वीकृति की 80 प्रतिशत हो सकी लक्ष्य पूर्ति
शाहजहांपुर। विगत वर्ष बारिश से बर्बाद हुए किसानों को कर्ज देने में बैंकें हाथ खींच रही हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि ऋण दिए जाने का लक्ष्य कम नियत किए जाने से अधिकांश किसान सूदखोरों के चंगुल में फंसने को मजबूर हैं।
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कोआपरेटिव सेक्टर ने दिए महज 1.66 करोड़
जिले की सहकारी समितियों ने 73235 किसानों को महज 1.66 करोड़ के ऋण बांटे जबकि समितियों पर किसानों को केवल तीन फीसदी ब्याज पर खाद-बीज के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध है। समितियों पर दलालों और बड़े किसानों का बोलबाला होने से कम जोत वाले ऋण पाने के लिए चक्कर काटते रह जाते हैं।
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बैंकों की आपत्तियों से किसान परेशान
कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी भी मानते हैं कि शार्ट टर्म लोन देने वाली बैंकेें छोटे किसानों की ऋण पत्रावलियों को तरह-तरह की आपत्तियां लगाकर अस्वीकृत कर देती हैं। इसके पीछे बैंक अफसरों की यह सोच काम करती है कि कम जोत वाले किसान समय से ऋण की अदायगी नहीं कर पाएंगे, जबकि इसका बोझ अतिरिक्त ब्याज चुकाकर किसान ही उठाते हैं।
किसान हित की तमाम बैंक योजनाएं प्रभावी
बैंकों के जरिए एक ही छत के नीचे खाद, बीज, पेस्टीसाइड्स की उपलब्धता को एग्री जंक्शन, एग्रीकल्चर मशीनरी स्कीम के तहत ट्रैक्टर लोन, फसलों की ढुलाई को एग्री व्हीकल फाइनेंस स्कीम, पशुओं के लिए एग्री फॉर्म शेड स्कीम, आपातकालीन वित्तीय जरूरतों के लिए बड़ौदा किसान तत्काल योजना, फसल उत्पादन को गोल्ड लोन स्कीम, बड़ौदा जनरल क्रेडिट कार्ड, छोटे किसानों के लिए कृषि भूमि खरीद को ऋण, ग्रामीण भंडारण आदि योजनाएं संचालित हैं।
एग्री जंक्शन लाभान्वित हो रहे किसान
पुवायां। सरकार की एक योजना एग्री जंक्शन के नाम से है। इसके तहत कृषि स्नातकों को खाद, पेस्टीसाइड्स आदि का लाइसेंस देकर किसानों के लिए एक ही स्थान पर खाद, बीज, दवाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत कृषि स्नातक को निशुल्क लाइसेंस दिया जाता है। दुकान आदि का एक वर्ष तक का किराया आदि सरकार वहन करती है। दुकान के फर्नीचर आदि के लिए बैंक कर्ज उपलब्ध कराती है। पुवायां के गांव बनिगवां में एक एग्री जंक्शन खोला गया है। एग्री जंक्शन के स्वामी श्रीश चंद्र मिश्रा का कहना है कि एग्री जंक्शन खुलने के बाद किसान इसका लाभ लेने लगे हैं।
किसानों की बात: उन्हीं की जुबानी
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मुझे तो सिर्फ केंद्र की उज्ज्वला योजना के बारे में ही पता है। इसके अलावा अन्य किसी योजना का लाभ नहीं मिला। सरकार को गांव-गांव शिविर लगाकर योजनाओं का प्रचार प्रसार करना चाहिए।
मुकेश यादव, गांव उदरा टिकरी, बंडा
खाद और बीज आदि पर सब्सिडी के बारे में पता चला था, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं है।
-बल्देव सिंह, कोचर फार्म, खुटार
सरकार की किसानों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं की जानकारी नहीं दी जाती है तो किसान को कैसे पता चले और वे कैसे उनका लाभ उठाएं। किसानों को बैंक से कर्ज दिया जाता है। इसके अलावा किसी योजना की जानकारी नहीं है।
-धीर सिंह, ग्राम रूरा, खुटार
किसानों की दिक्कतों पर अफसरों की सफाई
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किसानों को ऋण देने में बिचौलियों की भूमिका निष्क्रिय बनाने को बैंकों में व्यापार प्रतिनिधि नियुक्त हैं जो किसानों और बैंकों के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। योजनाओं का प्रचार-प्रसार भारत सरकार और कृषि विभाग के माध्यम से कराया जाता है। बैंक स्तर से लगने वाले किसान शिविरों का व्यय वहन शाखा प्रबंधक अपनी सीमित पॉवर से करते हैं।
चंद्रशेखर जोशी, अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा
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कृषि मेलों, गोष्ठियों, किसान-वैज्ञानिक संवाद आदि आयोजनों के माध्यम से किसानों को विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूककिया जाता है। ऐसे आयोजन पूरे वर्ष होते हैं। बैंकों से संचालित किसान हित की योजनाओं के प्रचार का दायित्व बैंकें निभाती हैं।
डीएस चौधरी, जिला कृषि अधिकारी