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Shahjahanpur News: बुनियादी सुविधाओं का अकाल... जनता टैक्स की मार से बेहाल
Sun, 30 Apr 2023 01:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 30 Apr 2023 01:11 AM IST
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नगर निगम की खबर में, कुल्दीप दुआ।संवाद
शाहजहांपुर। नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद सुविधाओं में तो कोई खास इजाफा नहीं हुआ, लेकिन जनता पर टैक्स की मार बढ़ गई है। नगर निगम ने कर में कई गुना वृद्धि कर दी है। कर बढ़ने से व्यापारी से लेकर आम आदमी परेशान हैं। नगर निगम की टीम टैक्स वसूली के लिए नोटिस भेज रही है। लोगों का कहना है कि नया महापौर ऐसा हो जो लोगों को टैक्स से राहत दे सके।
नगर निगम का काम होता है कि शहरवासियों को पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना। कर मूल्यांकन की व्यवस्था बेहतर न होने की वजह से नगर निगम को घाटा हो रहा है। नगर निगम ने भवन स्वामी को स्वयं आंकलन कर टैक्स अदा करने की सुविधा दी है। लोगों ने टैक्स जमा नहीं किया तो नगर निगम ने नोटिस जारी करने शुरू कर दिए। इसके बावजूद अब तक नगर निगम की ओर से भवनों का सर्वे नहीं हुआ है। मोहल्ला वार टैक्स की अलग-अलग दरें निर्धारित हैं। कई मोहल्ले अब भी ऐसे हैं जहां जल निगम ने पाइप लाइन तो बिछाई है लेकिन कनेक्शन नहीं दिए हैं, लेकिन जलकर की वसूली के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं।
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नगर निगम का टैक्स निर्धारण
आवासीय भवनों पर अधिकतम 1.90 रुपये वर्ग स्कायर फिट और न्यूनतम 15 पैसे वर्ग स्क्वायर फिट का कर है। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 0 से पांच मीटर की सड़क, पांच से 10 मीटर की सड़क और 10 मीटर से ऊपर की सड़क। सड़कों की चौड़ाई के आधार पर टैक्स का निर्धारण किया गया है। इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्र को छह श्रेणी में बांटा गया है। दुकान का आवासीय भवन से पांच गुना अधिक, नर्सिंग होम का तीन गुना अधिक, मैरिज हाल का तीन गुना अधिक और शॉपिंग माल का छह गुना अधिक है।
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नगर निगम की स्थिति
नगर निगम में कुल संपत्ति की संख्या- 55512
नगर निगम क्षेत्र में आवसीय भवनों की संख्या- 44229
अनावासीय भवनों की संख्या- 11283
वित्तीय वर्ष 2022- 23 से 7233 अनावासीय भवनों से 401.10 लाख वसूली की गई। वहीं आवासीय 28891 भवनों से 413.47 लाख वसूली की गई।
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नगर निगम में करेत्तर मद
- विज्ञापन
- नगर निगम की दुकानों का किराया
- नामांतरण
- जल व सीवर संयोजन
- कुत्ते, बिल्ली का लाइसेंस
- अन्य प्रकार के लाइसेंस
- सिंगल यूज प्लास्टिक बैन से वसूली
- फूड वैन व कार्ट यूजर चार्जेज
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लोगों से बातचीत
नगर निगम की ओर से मनमाने ढंग से कर का निर्धारण कर लिया गया। इसमें कई गुना टैक्स बढ़ा दिया गया है। इसका व्यापारी वर्ग विरोध करता है। व्यापारी वर्ग चाहता है कि टैक्स ऐसा लगाया जाए जो सही हो। चुनाव में ऐसा महापौर बनना चाहिए जो व्यापारियों के हित में काम करे। - कुलदीप सिंह दुआ, व्यापारी नेता
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नगर निगम की ओर से कई गुना बढ़ाकर टैक्स लगा दिया गया है। इसमें नगर पालिका के वक्त का भी टैक्स शामिल किया गया है। व्यापारी वर्ग इसका विरोध करता है। इसलिए अभी तक टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। टैक्स का निर्धारण सही ढंग से होना चाहिए। इससे व्यापारियों पर अधिक बोझ नहीं पड़े। - सचिन बाथम, व्यापारी नेता
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नगर निगम ने आवासीय भवनों का टैक्स तो निर्धारण कर दिया है, लेकिन नगर निगम जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रहीं हैं। शहर की सभी सड़कें खुदी पड़ी हैं। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं है। सुविधाएं मिलने लगे तो लोगों को टैक्स देने में कोई परेशानी नहीं है। - अनुज सिंह
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नगर निगम ने अपनी तरफ से टैक्स का निर्धारण कर दिया है। इसमें छोटे मकान वाले लोगों को भी काफी टैक्स देना पड़ रहा है। सही तरह से टैक्स का निर्धारण नहीं किया गया। आम आदमी को चाहिए कि मूलभूत सुविधाओं के आधार पर टैक्स लिया जाए। - कौशल सक्सेना
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वर्जन-
नगर निगम बनने के बाद सुविधाओं के आधार पर टैक्स लिया जाता है। टैक्स से ही नगर निगम के कामों का वहन किया जाता है। जैसे-जैसे निगम की आय बढ़ती है, उसी आधार पर सुविधाएं मुहैया कराई जातीं हैं। - संतोष शर्मा, नगर आयुक्त
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नगर निगम का काम होता है कि शहरवासियों को पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना। कर मूल्यांकन की व्यवस्था बेहतर न होने की वजह से नगर निगम को घाटा हो रहा है। नगर निगम ने भवन स्वामी को स्वयं आंकलन कर टैक्स अदा करने की सुविधा दी है। लोगों ने टैक्स जमा नहीं किया तो नगर निगम ने नोटिस जारी करने शुरू कर दिए। इसके बावजूद अब तक नगर निगम की ओर से भवनों का सर्वे नहीं हुआ है। मोहल्ला वार टैक्स की अलग-अलग दरें निर्धारित हैं। कई मोहल्ले अब भी ऐसे हैं जहां जल निगम ने पाइप लाइन तो बिछाई है लेकिन कनेक्शन नहीं दिए हैं, लेकिन जलकर की वसूली के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं।
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नगर निगम का टैक्स निर्धारण
आवासीय भवनों पर अधिकतम 1.90 रुपये वर्ग स्कायर फिट और न्यूनतम 15 पैसे वर्ग स्क्वायर फिट का कर है। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 0 से पांच मीटर की सड़क, पांच से 10 मीटर की सड़क और 10 मीटर से ऊपर की सड़क। सड़कों की चौड़ाई के आधार पर टैक्स का निर्धारण किया गया है। इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्र को छह श्रेणी में बांटा गया है। दुकान का आवासीय भवन से पांच गुना अधिक, नर्सिंग होम का तीन गुना अधिक, मैरिज हाल का तीन गुना अधिक और शॉपिंग माल का छह गुना अधिक है।
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नगर निगम की स्थिति
नगर निगम में कुल संपत्ति की संख्या- 55512
नगर निगम क्षेत्र में आवसीय भवनों की संख्या- 44229
अनावासीय भवनों की संख्या- 11283
वित्तीय वर्ष 2022- 23 से 7233 अनावासीय भवनों से 401.10 लाख वसूली की गई। वहीं आवासीय 28891 भवनों से 413.47 लाख वसूली की गई।
नगर निगम में करेत्तर मद
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- नगर निगम की दुकानों का किराया
- नामांतरण
- जल व सीवर संयोजन
- कुत्ते, बिल्ली का लाइसेंस
- अन्य प्रकार के लाइसेंस
- सिंगल यूज प्लास्टिक बैन से वसूली
- फूड वैन व कार्ट यूजर चार्जेज
लोगों से बातचीत
नगर निगम की ओर से मनमाने ढंग से कर का निर्धारण कर लिया गया। इसमें कई गुना टैक्स बढ़ा दिया गया है। इसका व्यापारी वर्ग विरोध करता है। व्यापारी वर्ग चाहता है कि टैक्स ऐसा लगाया जाए जो सही हो। चुनाव में ऐसा महापौर बनना चाहिए जो व्यापारियों के हित में काम करे। - कुलदीप सिंह दुआ, व्यापारी नेता
नगर निगम की ओर से कई गुना बढ़ाकर टैक्स लगा दिया गया है। इसमें नगर पालिका के वक्त का भी टैक्स शामिल किया गया है। व्यापारी वर्ग इसका विरोध करता है। इसलिए अभी तक टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं। टैक्स का निर्धारण सही ढंग से होना चाहिए। इससे व्यापारियों पर अधिक बोझ नहीं पड़े। - सचिन बाथम, व्यापारी नेता
नगर निगम ने आवासीय भवनों का टैक्स तो निर्धारण कर दिया है, लेकिन नगर निगम जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रहीं हैं। शहर की सभी सड़कें खुदी पड़ी हैं। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं है। सुविधाएं मिलने लगे तो लोगों को टैक्स देने में कोई परेशानी नहीं है। - अनुज सिंह
नगर निगम ने अपनी तरफ से टैक्स का निर्धारण कर दिया है। इसमें छोटे मकान वाले लोगों को भी काफी टैक्स देना पड़ रहा है। सही तरह से टैक्स का निर्धारण नहीं किया गया। आम आदमी को चाहिए कि मूलभूत सुविधाओं के आधार पर टैक्स लिया जाए। - कौशल सक्सेना
वर्जन-
नगर निगम बनने के बाद सुविधाओं के आधार पर टैक्स लिया जाता है। टैक्स से ही नगर निगम के कामों का वहन किया जाता है। जैसे-जैसे निगम की आय बढ़ती है, उसी आधार पर सुविधाएं मुहैया कराई जातीं हैं। - संतोष शर्मा, नगर आयुक्त

नगर निगम की खबर में, कुल्दीप दुआ।संवाद

नगर निगम की खबर में, कुल्दीप दुआ।संवाद

नगर निगम की खबर में, कुल्दीप दुआ।संवाद