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धान खरीद घोटाला: जिन खातों में रकम भेजी, उनको किसानों का सगा संबंधी बताने की योजना
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पुवायां। धान खरीद घोटाले में पुलिस को अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिल पाने के कारण विवेचना की गति बेहद धीमी है। वहीं घोटाले में फंसे सेंटर इंचार्ज समेत अन्य लोग बचाव की जुगत में जुटे हुए हैं। आरोपी किसानों से संपर्क कर उनसे रिश्तेदारी निकाल रहे हैं और उन्हें हर तरीके से मनाने में जुटे हैं ताकि उनकी गर्दन बच सके।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश चंद्र सागरवाल ने सात फरवरी को पुवायां में गांव नत्थापुर में लगाए गए कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्र प्रभारी उदयवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप था कि केंद्र प्रभारी ने कल्पित किसानों के नाम फर्जी खरीद कर लाभ अर्जित किया है। किसानों के पक्ष में फर्जी ढंग से धनराशि भेजी गई है। केंद्र पर ऐसे 42 किसानों के बैंक खातों में विसंगतियां पाई गई थीं, लेकिन दर्ज कराई रिपोर्ट में केवल आठ नाम ही दर्शाए गए थे। इन किसानों के भी पते नहीं दर्शाए गए थे। बाद में पुलिस को जो जांच रिपोर्ट मिली उसमें दर्ज कराई गई रिपोर्ट की जानकारी दी गई, साक्ष्य नहीं दिए गए, जिससे जांच में समस्याएं आ रही हैं। इससे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।पुवायां में दर्ज रिपोर्ट की विवेचना कर रहे एसआई नगेंद्र सिंह और बंडा में दर्ज रिपोर्ट की जांच कर रहे एसआई संतोष सिंह कह चुके हैं कि विवेचना में काफी वक्त लगेगा। वहीं, आरोपी सेंटर प्रभारी किसानों से संपर्क कर उनको इस बात के लिए मना रहे हैं कि जिन बैंक खातों में राशि भेजी गई, उनको वे अपना सगा संबंधी बता दें। कुछ किसान इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, कोई खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं है।
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जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश चंद्र सागरवाल ने सात फरवरी को पुवायां में गांव नत्थापुर में लगाए गए कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्र प्रभारी उदयवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप था कि केंद्र प्रभारी ने कल्पित किसानों के नाम फर्जी खरीद कर लाभ अर्जित किया है। किसानों के पक्ष में फर्जी ढंग से धनराशि भेजी गई है। केंद्र पर ऐसे 42 किसानों के बैंक खातों में विसंगतियां पाई गई थीं, लेकिन दर्ज कराई रिपोर्ट में केवल आठ नाम ही दर्शाए गए थे। इन किसानों के भी पते नहीं दर्शाए गए थे। बाद में पुलिस को जो जांच रिपोर्ट मिली उसमें दर्ज कराई गई रिपोर्ट की जानकारी दी गई, साक्ष्य नहीं दिए गए, जिससे जांच में समस्याएं आ रही हैं। इससे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।पुवायां में दर्ज रिपोर्ट की विवेचना कर रहे एसआई नगेंद्र सिंह और बंडा में दर्ज रिपोर्ट की जांच कर रहे एसआई संतोष सिंह कह चुके हैं कि विवेचना में काफी वक्त लगेगा। वहीं, आरोपी सेंटर प्रभारी किसानों से संपर्क कर उनको इस बात के लिए मना रहे हैं कि जिन बैंक खातों में राशि भेजी गई, उनको वे अपना सगा संबंधी बता दें। कुछ किसान इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, कोई खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं है।
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