{"_id":"6fdba2c89a06bca46340a10d5e974c89","slug":"faith-lying-on-cold-side-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कड़ाके की ठंड पर आस्था पड़ी भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कड़ाके की ठंड पर आस्था पड़ी भारी
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 21 Jan 2016 08:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी पड़ रही है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड होने के बावजूद श्रद्धालु माघ मेला ढाईघाट में एक माह का कल्पवास करने को पहुंच रहे हैं। जहां सूरज की किरणें फूटने से पहले हर-हर गंगे के स्वर गूंजने लगते हैं। मेले का प्रथम पर्व पौष पूर्णिमा 24 जनवरी को होगा।
विज्ञापन
सोमवार से ढाईघाट गंगातट पर माघ मेला शुरू हुआ था। पहले दिन से ही साधू, संत और आम श्रद्धालु कल्पवास करने के लिए गंगातट पहुंच रहे हैं। यहां पंडों के पंडालों में भजन, कीर्तन और हरे रामा, हरे कृष्णा के स्वर गूंजने लगते हैं। जिला पंचायत प्रशासन साधू, संतों के पंडालों मे पेयजल और प्रकाश आदि की व्यवस्थायें कर रहा है। इससे मेले में रौनक बढ़ गई है।
विज्ञापन
कभी ढाईघाट के माघ मेले में फूस की झोपड़ियों में साधू-संत और कल्पवासी एक माह तक प्रवास करते थे। मगर अब झोपड़ी बनाने वाले मजदूरों की कमी। फूस की कीमत भी बढ़ गई है। इससे संतों के पंडालों में फूस के झोपड़े दिखाई देते हैं। अधिकांश श्रद्धालु और संत कपड़े के वाटर प्रूफ टेंट में रह रहे हैं। कल्पवासियों का कहना है कि फूस के झोपड़ों में अग्नि दुर्घटनाओं का खतरा रहता था। कई बार बड़े अग्निकांड भी हो जाते थे। इससे मेले में फूस के झोपड़ों का चलन लगभग बंद ही हो गया है। बारिश होने से मेले में रेतीली सड़कें पुख्ता हो गईं हैं, जिससे आने जाने की सुविधा मौसम ने ही कर दी है।
विज्ञापन
शाम होते ही मेले में ट्यूब लाइट की रोशनी से गंगा का बीहड़ क्षेत्र किसी महानगर से कम नहीं दिखाई दे देता। दुकानों में की गई सजावट से मेले में रौनक और बढ़ गई है। इस बार मेले में सार्वजनिक स्वच्छ शौचालयों का भी निर्माण कराया जा रहा है।