शाहजहांपुर। चित्रा टॉकीज में श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन मंगलवार को व्यास डॉ. दामोदर दीक्षित ने सुदामा व कृष्ण मिलन का प्रसंग सुनाया। इसको सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। व्यास ने कहा कि जब सुदामा अपनी दीनहीन दशा में बचपन के सखा कृष्ण से मिलने पहुंचे तो उन्हें द्वारपालों ने भगा दिया। किसी तरह कृष्ण को सुदामा के आने की सूचना मिली, तब वह नंगे पांव दौड़े चले गए।
सुदामा से मिलते ही उन्हें सीने से लगा लिया। अपने महल ले गए और अपने हाथों से सुदामा के पैर धोए। सुदामा भी इतना आदर सत्कार पाकर अभिभूत हो गए। व्यास ने प्रथम स्कंध से लेकर द्वादश स्कंध तक संपूर्ण भगवान की आवृत्ति करके शास्त्रीय परंपरा का विधिवत निर्वहन किया। कथाओं के आध्यात्मिक रहस्यों की जानकारी दी।
इससे पूर्व रायबरेली से आए स्वामी ज्योतिर्मयानंद, आचार्य रामानंद दीक्षित, ऋषिकेश परमार्थ निकेतन के स्वामी असंगानंद ने प्रवचन दिए। कथा के समापन पर भंडारा कराया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कमलेश खन्ना, सरला खन्ना, चंद्रशेखर खन्ना, रागिनी खन्ना, राम मेहरोत्रा, सुधा, ध्रुवनारायण मेहरा, राघव, रोली खन्ना, हरओम मिश्र आदि मौजूद रहे।