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एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टापेज और जनरल कोच बढ़ाएं प्रभु
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:40 PM IST
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उखाड़ी गई फर्रुखाबाद-मैलानी वाया पुवायां रेलवे लाइन की पटरी फिर से अस्तित्व में लाने के लिए तमाम सियासी पार्टियों और संगठनों की तीन दशक पुरानी कवायद भले ही कामयाब नहीं हो पाई हो, रेल बजट से हर साल लोगों की नई-नई उम्मीदें बढ़ रही हैं। मोदी सरकार के पहले रेल बजट में जिले को लखनऊ मेमू ट्रेन का अप्रत्याशित तोहफा मिलने की वजह से इस बार भी रेल बजट की ओर यहां के लोग टकटकी लगाए हैं।
बता दें कि फर्रुखाबाद-मैलानी रेल रूट को दोबारा बहाल करने की मांग सर्वप्रथम तीन दशक पहले संसद में गूंजी थी। पीलीभीत संसदीय क्षेत्र के तत्कालीन सांसद कुंवर मोहन स्वरूप ने यह मुद्दा उठाया था। जनता शासनकाल में तत्कालीन सांसद हरीश गंगवार और बाद में पीलीभीत की सांसद मेनका गांधी भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी हैं क्योंकि तब पुवायां विधानसभा क्षेत्र पीलीभीत संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था।
यही नहीं, जलालाबाद से लेकर पुवायां तक के विधायकों और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को जिंदा रखा। नतीजे में रेल मंत्रालय में कई बार नई लाइन को सर्वे भी किया। इस मुहिम से जुड़े लोगों को झटका तब लगा, जब यूपीए-2 शासनकाल के अंतिम रेल बजट में जिले के वरिश्ठ कांग्रेस नेता और तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के प्रभाव से रेल मंत्रालय ने बजट में फर्रुखाबाद से गोला वाया शाहजहांपुर रेल रूट सर्वे को हरी झंडी दे दी।
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चूंकि, पिछले रेल बजट में नई लाइन के सर्वे प्रस्ताव को कोई जगह नहीं मिली। इसलिए न तो पुवायां, खुटार, मैलानी वालों को रेल सुख के आसार बने और न ही मोहम्मदी, गोला तहसीलों के लोगों तक बड़ी लाइन पहुंचने की संभावना बन पाई। इसके बावजूद लोगों की ऐसी तमाम छोटी-छोटी उम्मीदें बजट पर टिकी हैं, जिनके पूरे होने से आम लोगों के लिए भी रेल यात्रा सुखद बन सकेगी।
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बता दें कि फर्रुखाबाद-मैलानी रेल रूट को दोबारा बहाल करने की मांग सर्वप्रथम तीन दशक पहले संसद में गूंजी थी। पीलीभीत संसदीय क्षेत्र के तत्कालीन सांसद कुंवर मोहन स्वरूप ने यह मुद्दा उठाया था। जनता शासनकाल में तत्कालीन सांसद हरीश गंगवार और बाद में पीलीभीत की सांसद मेनका गांधी भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी हैं क्योंकि तब पुवायां विधानसभा क्षेत्र पीलीभीत संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था।
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यही नहीं, जलालाबाद से लेकर पुवायां तक के विधायकों और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को जिंदा रखा। नतीजे में रेल मंत्रालय में कई बार नई लाइन को सर्वे भी किया। इस मुहिम से जुड़े लोगों को झटका तब लगा, जब यूपीए-2 शासनकाल के अंतिम रेल बजट में जिले के वरिश्ठ कांग्रेस नेता और तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के प्रभाव से रेल मंत्रालय ने बजट में फर्रुखाबाद से गोला वाया शाहजहांपुर रेल रूट सर्वे को हरी झंडी दे दी।
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चूंकि, पिछले रेल बजट में नई लाइन के सर्वे प्रस्ताव को कोई जगह नहीं मिली। इसलिए न तो पुवायां, खुटार, मैलानी वालों को रेल सुख के आसार बने और न ही मोहम्मदी, गोला तहसीलों के लोगों तक बड़ी लाइन पहुंचने की संभावना बन पाई। इसके बावजूद लोगों की ऐसी तमाम छोटी-छोटी उम्मीदें बजट पर टिकी हैं, जिनके पूरे होने से आम लोगों के लिए भी रेल यात्रा सुखद बन सकेगी।