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कठिनाइयां होने पर भी कल्याण का मार्ग नहीं छोड़ते विवेकी मनुष्य : स्वामी सत्यानंद
Sun, 05 Jan 2025 12:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 05 Jan 2025 12:25 AM IST
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जलालाबाद में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में प्रवचन सुनाते पीठाधीश्वर
जलालाबाद। अखिल भारतीय सोअहम महामंडल की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में सोअहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद विवेकी और धीर पुरुष केवल कल्याण के मार्ग का ही अनुसरण करते हैं। अविवेकी और अज्ञानी मनुष्य केवल अपना पेट भरने वाले अथवा खुद को अच्छा लगने वाले मार्ग का चयन करते हैं।
उन्होंने कहा कि अविवेकी मनुष्य केवल तात्कालिक लाभ के बारे में सोचता है। दूरगामी परिणाम को लेकर कभी विचार नहीं करता। कल्याण का मार्ग काफी परेशानी भरा होता है और उस पर चलने वाले को बड़ी परीक्षाएं देनी होती हैं, लेकिन इसके परिणाम सुखद और आनंददायक होते हैं। इसके विपरीत स्वार्थ के रास्ते पर चलने से केवल पश्चाताप हासिल होता है। इस प्रसंग में उन्होंने शास्त्रोक्ति सहित मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, सत्यवादी हरिश्चंद्र, धर्मराज युधिष्ठिर जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने जीवन में बहुत कष्ट भोगे, लेकिन अंत में सफलता, राज्य, विजय, वैभव और कीर्ति ने उनका वरण किया।
स्वामी प्रीतमदास महाराज ने कहा कि हमें श्रेष्ठ मार्ग पर चलते हुए यज्ञ, दान व तप आदि जैसे कर्म सदैव करते रहना चाहिए। इससे अंतःकरण शुद्ध होकर परमार्थ का मार्ग प्रशस्त होता है। स्वामी प्रणवानंद ने कहा कि दिया हुआ दान कई गुना होकर वापस मिलता है। स्वामी नारायणानंद ने कहा कि दान सदैव सुपात्र को ही देना चाहिए। सम्मेलन में स्वामी भगवतानंद, स्वामी सच्चिदानंद ने भी प्रवचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन छह जनवरी तक चलेगा।
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उन्होंने कहा कि अविवेकी मनुष्य केवल तात्कालिक लाभ के बारे में सोचता है। दूरगामी परिणाम को लेकर कभी विचार नहीं करता। कल्याण का मार्ग काफी परेशानी भरा होता है और उस पर चलने वाले को बड़ी परीक्षाएं देनी होती हैं, लेकिन इसके परिणाम सुखद और आनंददायक होते हैं। इसके विपरीत स्वार्थ के रास्ते पर चलने से केवल पश्चाताप हासिल होता है। इस प्रसंग में उन्होंने शास्त्रोक्ति सहित मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, सत्यवादी हरिश्चंद्र, धर्मराज युधिष्ठिर जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने जीवन में बहुत कष्ट भोगे, लेकिन अंत में सफलता, राज्य, विजय, वैभव और कीर्ति ने उनका वरण किया।
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स्वामी प्रीतमदास महाराज ने कहा कि हमें श्रेष्ठ मार्ग पर चलते हुए यज्ञ, दान व तप आदि जैसे कर्म सदैव करते रहना चाहिए। इससे अंतःकरण शुद्ध होकर परमार्थ का मार्ग प्रशस्त होता है। स्वामी प्रणवानंद ने कहा कि दिया हुआ दान कई गुना होकर वापस मिलता है। स्वामी नारायणानंद ने कहा कि दान सदैव सुपात्र को ही देना चाहिए। सम्मेलन में स्वामी भगवतानंद, स्वामी सच्चिदानंद ने भी प्रवचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन छह जनवरी तक चलेगा।

जलालाबाद में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में प्रवचन सुनाते पीठाधीश्वर
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