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Shahjahanpur News: मदद की गुहार भी नहीं आई काम, बेरहम भीड़ ने कुचल दी सामाजिकता

Fri, 05 Jul 2024 04:28 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Fri, 05 Jul 2024 04:28 AM IST
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Even the plea for help did not help, the merciless crowd crushed the society.
परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद
देवकली (बंडा)। भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने गईं महिलाओं ने भगदड़ के दौरान की आंखों देखी स्थिति बयां की है। घायल महिलाओं के मुताबिक, भगदड़ मचते ही लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए। नीचे दबे लोग मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन बेरहम भीड़ उन्हें कुचलते हुए आगे बढ़ गई। किसी ने भी यह नहीं सोचा कि जान बचाना ही परम धर्म था। यह सत्संग के मूल उद्देश्य में भी शामिल है।
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गांव मुड़िया छावन के नरेश की पत्नी चमेली देवी ने बताया कि वह काफी समय से सत्संग में जुड़ीं हैं। उनके पति सत्संग के सेवादार हैं। हाथरस सत्संग में उनके साथ उदरा गांव की सावित्री देवी और दीपमाला भी गईं थीं। तीनों महिलाओं के पति भी साथ में गए थे।
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पति बाहर सेवादारी कर रहे थे। महिलाएं अंदर सत्संग सुन रहीं थीं। चमेली ने बताया कि सत्संग का समापन होने के बाद भोले बाबा बाहर निकल गए। पंडाल से बाहर निकल रही भीड़ अचानक बेकाबू हो गई। धक्का-मुक्की होने लगी। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए। नीचे दबे हुए लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे लेकिन न कोई सुनने वाला था और न ही कोई भीड़ नियंत्रित कर रहा था। वह नीचे गिर गईं। सावित्री देवी उनके पास में थीं। सावित्री को कुचलते हुए भी कई लोग निकल गए। चमेली के मुताबिक उन्होंने सावित्री को किनारे किया। इसके बाद भगदड़ में वह भी बेहोश हो गईं। उनके परिजन आए और उन्हें होश में लाया गया। उनकी साथी दीपमाला आगे निकल गईं थीं। उनकी नाले में गिरने से मौत हो गई। सावित्री देवी ने बताया कि भगदड़ मचते ही वह गिरकर बेहोश हो गईं थीं। कोई बचाने वाला नहीं था, सामाजिकता भी तार-तार हो चुकी थी।
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धनदेवी का हुआ अंतिम संस्कार, बेटे ने की कार्रवाई की मांग
तिलहर। हाथरस में भोले बाबा के सत्संग में हुए हादसे की शिकार हुई थाना क्षेत्र के गांव रजाकपुर निवासी 65 वर्षीय पत्नी धन देवी का पार्थिव शरीर बुधवार देर शाम एटा से गांव पहुंचा। बृहस्पतिवार सुबह उनके दोनों बेटों के आने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे ने आयोजकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
धन देवी के पति राजाराम का 2007 में निधन हो गया था। उनका बड़ा बेटा बदन पाल और छोटा बेटा मदनपाल दोनों बिहार में मिठाई बेचने का काम करते हैं। घर पर धन देवी बड़ी बहू नीलम और छोटी बहू पिंकी के साथ रहती थीं। बड़ी बहू नीलम ने बताया कि सोमवार को उनकी सास सत्संग के लिए गईं थीं। बताया कि वह लगभग 20 वर्षों से सत्संग में जा रहीं थीं। गांव की धन्नो उर्फ सोमवती, शांति देवी, कालीचरण और उनकी पत्नी नन्ही के साथ धनदेवी सत्संग के लिए गईं थीं। बदन पाल ने बताया कि पिता राजाराम की 2007 में मौत हो जाने के बाद भाइयों का पालन-पोषण मां ने बड़े कष्टों से किया था। बड़े होने पर दोनों भाई बिहार में अपना काम करने के लिए चले गए। केवल आठ बीघा खेती है। मेहनत-मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं। एक बार वह भी सत्संग में गया था लेकिन उसे कुछ अच्छा नहीं लगा तो वह दोबारा नहीं गया। गांव की धन्नो और शांति देवी से उनका अधिक मेलजोल रहता था। उन्होंने कहा कि घटना के दोषियों को सजा अवश्य मिलनी चाहिए।




हर सत्संग में जातीं थीं महिलाएं, गांव की अन्य महिलाएं भी जुड़ीं
सत्संग में धन देवी के साथ गईं 70 वर्षीय शांति देवी ने बताया कि वे लोग तिलहर से बस में बैठकर गए थे। आने-जाने का 220 रुपये किराया पड़ा था। उन्होंने बताया कि सत्संग समाप्त होने के बाद भोले बाबा अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। उनके पीछे-पीछे वह भी बाहर चले आए। तभी अंदर पंडाल में सड़क की ओर लोग पानी से भरे गड्ढे में गिरने लगे। एक के ऊपर एक गिरते गए। उनके साथ गईं धन देवी पीछे पंडाल में रह गईं थीं। वह भगदड़ का शिकार हो गईं। रात तक उन्हें ढूंढ़ा गया लेकिन वह नहीं मिलीं तो वे लोग वापस तिलहर आ गए। शांति देवी ने बताया कि वह हर सत्संग में नहीं पहुंच पातीं थीं लेकिन धन देवी सभी सत्संगों में जाया करती थीं। उन्हीं के कहने पर वह भी जाती थीं। अब पता नहीं आगे जा पाएंगे या नहीं।

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

परिवार के साथ गमगीन बैठा मृतक धन देवी का बड़ा बेटा बदनपाल। संवाद

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