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Shahjahanpur News: नए डॉक्टर भी नहीं आ रहे, पुराने भी छोड़ गए अस्पताल
Wed, 01 Nov 2023 12:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 01 Nov 2023 12:30 AM IST
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शाहजहांपुर। चिकित्सालयों में काम का बोझ और अन्य दबाव के चलते डॉक्टर ही मैदान छोड़ने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग को 12 नए डॉक्टर मिले थे पर मात्र चार को ही नियुक्ति मिली। छुट्टी लेकर पूर्व में गए 12 डॉक्टर भी वापस नहीं आए हैं। ऐसे हालात में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था चरमरा गई है। सीमित संसाधन होने के चलते अधिकारी भी कुछ मजबूत कार्ययोजना तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिले में 39 पीएचसी, 16 सीएचसी बनी हैं लेकिन वहां पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को उपचार मिलने में परेशानी आती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार, उनके पास 190 के सापेक्ष मात्र 80 ही डॉक्टर उपलब्ध हैं। रिक्त पद नहीं भरने के चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। अहम बात यह है कि तीन माह पहले 12 नए डॉक्टरों की नियुक्ति जिले में की गई थी। उनमें मात्र चार ने ही ज्वाइन किया। एक डॉक्टर आने के बाद लौटकर नहीं आए। इसी के चलते वेक्टरजनित बीमारियों के समय में बुखार से जूझ रहे मरीजों को बेहतर व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने बताया कि नए डॉक्टर को निगोही, सिंधौली, भावलखेड़ा व ददरौल में नियुक्त किया है।
ग्रामीण स्तर की राजनीति नहीं आ रही रास : दूर-दराज के सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति पाने वाले डॉक्टर पर हर कोई दबाव बनाना चाहता है। बताते हैं कि प्रधान से लेकर बीडीओ तक दबाव बनाते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य दिक्कतों के चलते डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में काम करने के बजाय निजी अस्पतालों में सेवाएं देना उचित समझ रहे हैं।
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-जिले के 12 डॉक्टर करीब एक साल पहले छुट्टी लेकर गए थे। कई बार पत्राचार करने के बाद भी वह लौटकर नहीं आए हैं। उन पर शासन स्तर पर कार्रवाई प्रस्तावित चल रही है।
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ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिले में 39 पीएचसी, 16 सीएचसी बनी हैं लेकिन वहां पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को उपचार मिलने में परेशानी आती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार, उनके पास 190 के सापेक्ष मात्र 80 ही डॉक्टर उपलब्ध हैं। रिक्त पद नहीं भरने के चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। अहम बात यह है कि तीन माह पहले 12 नए डॉक्टरों की नियुक्ति जिले में की गई थी। उनमें मात्र चार ने ही ज्वाइन किया। एक डॉक्टर आने के बाद लौटकर नहीं आए। इसी के चलते वेक्टरजनित बीमारियों के समय में बुखार से जूझ रहे मरीजों को बेहतर व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने बताया कि नए डॉक्टर को निगोही, सिंधौली, भावलखेड़ा व ददरौल में नियुक्त किया है।
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ग्रामीण स्तर की राजनीति नहीं आ रही रास : दूर-दराज के सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति पाने वाले डॉक्टर पर हर कोई दबाव बनाना चाहता है। बताते हैं कि प्रधान से लेकर बीडीओ तक दबाव बनाते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य दिक्कतों के चलते डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में काम करने के बजाय निजी अस्पतालों में सेवाएं देना उचित समझ रहे हैं।
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-जिले के 12 डॉक्टर करीब एक साल पहले छुट्टी लेकर गए थे। कई बार पत्राचार करने के बाद भी वह लौटकर नहीं आए हैं। उन पर शासन स्तर पर कार्रवाई प्रस्तावित चल रही है।