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Shahjahanpur News: हादसों के बाद भी बंदरों को पकड़ने के नहीं किए जा रहे इंतजाम

Thu, 06 Nov 2025 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 12:17 AM IST
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Even after the accidents, no arrangements are being made to catch the monkeys.
कैंट क्षेत्र में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद
शाहजहांपुर। शहर से लेकर देहात तक बंदर लोगों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं लेकिन नगर निकाय जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। बंदरों के कारण हो रहे हादसों में लोगों की जान जा रही है। मंगलवार को रोजा के देवरास गांव में बंदरों की वजह से पांच वर्षीय बच्चे कार्तिक की जान चली गई। इसके बाद भी नगर निकाय और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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नगर निगम क्षेत्र में करीब तीन वर्ष पहले बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया गया था। बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया तो वन निगम के अधिकारियों ने एतराज किया और नगर निगम की टीम पर जुर्माना लगा दिया था। इसके बाद से बंदरों को पकड़ने का अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद से बंदरों को पकड़ने का अभियान नहीं चला जबकि लोग बंदरों से परेशान हैं। आए दिन शिकायतें करते रहते हैं। फिर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। बंदरों के हमलों में लोग घायल हो रहे हैं और उनकी जान भी जा रही है।
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पहले भी हो चुके हैं हादसे


- 17 जुलाई 2020 : चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला वाजिदखेल में बंदरों ने छत की चाहरदीवारी गिरा दी थी। इससे पड़ोस के घर में आंगन में सो रहीं शबनम व उनके चार बच्चों की मौत हो गई थी।
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- 31 दिसंबर 2024 : निगोही क्षेत्र के डेलखेड़ा गांव निवासी अय्यूब खां की बंदरों के झुंड के हमले से छत से गिरकर मौत हो गई थी।

- 25 सितंबर 2023 : मीरानपुर कटरा क्षेत्र के खंडसार गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला द्रोपदी की बंदरों के हमले में छत गिरकर मौत हो गई थी। वह छत पर गेहूं सुखा रहीं थीं। हमला होने पर जल्दबाजी में सीढ़ी से उतरते समय आंगन में जा गिरीं थीं।



- 21 सितंबर 25 : गांव औधापुर में बंदरों के हमले में छत से गिरकर सफाईकर्मी आशाराम की मौत हो गई थी।

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बच्चे के शव का परिजनों ने किया अंतिम संस्कार
बरतारा (रोजा)। क्षेत्र के गांव देवरास में मंगलवार सुबह जिलेदार सिंह का पांच वर्षीय बेटे कार्तिक की बंदरों के उत्पात से गिरे छज्जे के मलबे से दबकर मौत हो गई थी। पिता जिलेदार दिल्ली में मजदूरी करने गए थे। घर पर पत्नी रीता अपने चार बच्चों के साथ रह रही थी। सूचना मिलने पर जिलेदार दिल्ली से घर पहुंचे। बुधवार सुबह नौ बजे बच्चे के शव का अंतिम संस्कार किया गया। जिलेदार की एक बेटी और तीन बेटों में कार्तिक सबसे छोटा था। बेटे की मौत से मां रीता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में वर्षों से बंदरों का आतंक है। कई लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। संवाद

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कई बार वन विभाग के अधिकारियों से बंदरों को पकड़ने के लिए पत्राचार कर चुके हैं। बंदरों को पकड़कर उनको छोड़ने की समस्या आ रही है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द ही इसका कुछ हल निकलेगा।



- एसके सिंह, अपर नगर आयुक्त

कैंट क्षेत्र में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद

कैंट क्षेत्र में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद

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