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Shahjahanpur News: तंत्र-मंत्र का नहीं, मस्तिष्क का विकार है मिर्गी

Sun, 17 Nov 2024 01:47 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 17 Nov 2024 01:47 AM IST
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Epilepsy is a disorder of the brain and not of Tantra Mantra
शाहजहांपुर। मिर्गी का रोगी तंत्र-मंत्र से स्वस्थ नहीं होता, बल्कि मस्तिष्क का विकार होने के चलते नियमित रूप से दवा के सेवन से मरीज ठीक होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मिर्गी रोग से पीड़ित चार से पांच मरीज रोज पहुंचते हैं। इलाज में लापरवाही करने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है।
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हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर लोग मिर्गी को भूत-प्रेत की छाया समझकर तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज की जान भी जा सकती है। जबकि, यह मस्तिष्क का विकार होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. रोहतास ईसा बताते हैं कि मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक समस्या है। बड़ों की अपेक्षा बच्चे ज्यादा पीड़ित होते हैं। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी कहते हैं। इसके चलते दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होती हैं। इसी के चलते व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हैं। दौरे पड़ने पर दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर बुरी तरह लड़खड़ा जाता है। नियंत्रण खोने से व्यक्ति जमीन पर गिर जाता है। कई बार थोड़े समय में व्यक्ति खुद ही ठीक हो जाता है।
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मिर्गी के लक्षण
-घूरना, हाथों और पैरों में झटके आना, शरीर का अकड़ना, मुंह से झाग आना, होश खो देना, सांस लेने में समस्या या सांस रुक जाना, आंत्र या मूत्राशय पर नियंत्रण खोना, बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक गिरना, सिर को हिलाना आदि।
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-मिर्गी रोग की दवा करीब तीन साल तक लगातार चलती है। मरीजों के परिजन को दवाई खिलाने के साथ काउंसलिंग भी की जाती है। मनोचिकित्सक की सलाह से ही दवा कम कर सकते हैं।


डॉ.रोहतास, मनोचिकित्सक,राजकीय मेडिकल कॉलेज
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ये बरतें सावधानी
-समय पर नियमित रूप से दवा लें। खाली पेट न रहें। कम से कम छह फुट की दूरी से टीवी देखें। पर्याप्त नींद लें। दौरा पड़ने पर मरीज को मोजा सुंघाना आदि उपाय न करें।
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