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नदियों की जमीन कब्जाकर बसाई जा रही कॉलोनियां, प्रशासन बेखर
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शाहजहांपुर। खनन माफिया गर्रा और खन्नौत नदी को खोखला करने पर जुटे हैं तो भूमाफिया नदी के किनारों पर कब्जा करके अवैध निर्माण करने में लगे हैं। नदी की जमीन पर कब्जा करके कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। व्यावसायिक भवनों तक के निर्माण हो गए हैं लेकिन प्रशासन खामोशी से सबकुछ देख रहा है। कार्रवाई के नाम पर अवैध निर्माण करा रहे 250 लोगों को नोटिस जारी करने के बाद अफसरों ने चुप्पी साध ली है। न तो इन लोगों ने अवैध कब्जे हटाए और न ही प्रशासन ने इन्हें रोकने का कोई प्रयास किया।
गर्रा और खन्नौत नदी से घिरा होने के कारण महानगर के शहरी क्षेत्र में अब ऐसे भूखंड नहीं बचे हैं, जहां नई कॉलोनियां बनाई जा सकें। शहर के मूल बाशिंदे नदी पार अथवा अन्य बाहरी इलाकों में मकान बनाना नहीं चाहते। लोगों की इसी मानसिकता के कारण अब दोनों नदियों के बाढ़ क्षेत्र में मकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं। करीब एक दशक से लोगों की इस प्रवृत्ति पर कोई रोक नहीं लगने से न केवल मकान बल्कि कई कॉलोनियां नदी किनारों पर विकसित हो चुकी हैं।
लोधीपुर से खन्नौत पुल तक लगातार हो रहे कब्जे
शहर का पुराना मोहल्ला लोधीपुर खन्नौत नदी से काफी फासले और ऊंचाई पर बसा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका विस्तार खतरनाक तरीके से सड़क और रेलवे पुल तक हो रहा है। इसकी शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी ने नदी की जमीन पर मकान और दुकानें बनाकर की। फिर बाकी जमीन कब्जाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से सड़क और पुल के पास एक धर्मस्थल की नींव रख दी। बाद में उयकी देखा-देखी अन्य तमाम लोगों ने भी वहां मकान खड़े कर लिए। क्षेत्र के व्यापारी नेता अनीस खां ने अवैध कब्जों के खिलाफ कई साल तक आवाज भी उठाई, लेकिन सिस्टम की बदहाली के कारण उनकी एक नहीं सुनी गई।
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मानकों को ताक पर रखकर बसाई तटबंध के पास कॉलोनी
करीब ढाई दशक पहले मानकों को अनदेखा करके खन्नौत नदी के बिल्कुल किनारे तटबंध के पास एक कालोनी विकसित की गई। अब इसी कॉलोनी में कई माननीयों के आवास बने हैं। इसलिए कॉलोनी की वैधता को लेकर सरकारी सिस्टम भी कोई सवाल खड़े नहीं करता। एक दशक पहले खन्नौत में आई बाढ़ के दौरान कॉलोनी के तमाम मकान कई दिन तक पानी से घिरे रहे। अब इसी कॉलोनी के आसपास के तटीय इलाकों मेें भी धड़ल्ले से मकान बनाए जा रहे हैं।
अजीजगंज में गर्रा तटबंध तक पहुंची आबादी
गर्रा नदी के किनारे अजीजगंज को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध नहीं बनाया जाता तो लोग नदी के घाट पर कब्जा कर लेते। अब कुछ नहीं सूझ रहा तो वहां के लोगों ने पुराने हाईवे की पूर्व दिशा में नदी किनारे स्थित श्मशान भूमि के नजदीकी भूखंड खरीदकर मकान बना लिए। वर्ष 2011 में आई बाढ़ के दौरान नए मकान जलभराव में घिर गए। इसके बावजूद वहां पक्के निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लग सकी।
जियाखेल इलाके में विकसित हुआ बाला तिराही
गर्रा फाटक के नजदीक जियाखेल इलाके मेें घनी आबादी वाला बाला तिराही मोहल्ला नदी की तलहटी में होने के कारण गत एक दशक से बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। अब आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है इसलिए मोहल्ला धीरे-धीरे नदी तट की ओर बढ़ रहा है क्योंकि नए मकानों के लिए वहां कोई जगह नहीं बची है। मामूली बरसात में भी आसपास के नाले इतने उफना जाते हैं कि मोहल्ले की सड़कें नहर मेें बदल जाती हैं और वहां के बाशिंदों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
मकानों से घिरा बंका घाट का पश्चिमी तट
बिसरात रोड पर अंटा चौराहे से बंका घाट तक खन्नौत के पश्चिमी तट की जमीनों को मिट्टी से पाटकर कई भू माफिया ने कब्जा कर लिया और वहां मकानों के साथ व्यवसायिक उद्देश्य से तमाम पक्के निर्माण करा लिए। खास यह है कि आवास बनाने के लिए आसपास के खेत मालिकों से नदी तट के पास की जमीनों का मालिकाना हक लेकर आसपास की अन्य जमीनें भी कब्जाई जा रही है। प्रशासन से इसकी कई बार शिकायत भी हुई, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
विनियमित क्षेत्र कार्यालय की ओर से महानगर के सभी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर नजर रखने को लगातार सर्वे किया जा रहा है। तमाम लोगों को बीआरओ एक्ट के तहत नोटिस देकर उनके निर्माण कार्य रुकवाए गए हैं और नियमों का उल्लंघन होते पाए जाने पर विधिक कार्रवाई भी की जा चुकी है। नदी के आसपास की जमीनों पर अवैध रूप से कराए गए पक्के निर्माण कार्यों की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- विनीता सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट
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गर्रा और खन्नौत नदी से घिरा होने के कारण महानगर के शहरी क्षेत्र में अब ऐसे भूखंड नहीं बचे हैं, जहां नई कॉलोनियां बनाई जा सकें। शहर के मूल बाशिंदे नदी पार अथवा अन्य बाहरी इलाकों में मकान बनाना नहीं चाहते। लोगों की इसी मानसिकता के कारण अब दोनों नदियों के बाढ़ क्षेत्र में मकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं। करीब एक दशक से लोगों की इस प्रवृत्ति पर कोई रोक नहीं लगने से न केवल मकान बल्कि कई कॉलोनियां नदी किनारों पर विकसित हो चुकी हैं।
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लोधीपुर से खन्नौत पुल तक लगातार हो रहे कब्जे
शहर का पुराना मोहल्ला लोधीपुर खन्नौत नदी से काफी फासले और ऊंचाई पर बसा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका विस्तार खतरनाक तरीके से सड़क और रेलवे पुल तक हो रहा है। इसकी शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी ने नदी की जमीन पर मकान और दुकानें बनाकर की। फिर बाकी जमीन कब्जाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से सड़क और पुल के पास एक धर्मस्थल की नींव रख दी। बाद में उयकी देखा-देखी अन्य तमाम लोगों ने भी वहां मकान खड़े कर लिए। क्षेत्र के व्यापारी नेता अनीस खां ने अवैध कब्जों के खिलाफ कई साल तक आवाज भी उठाई, लेकिन सिस्टम की बदहाली के कारण उनकी एक नहीं सुनी गई।
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मानकों को ताक पर रखकर बसाई तटबंध के पास कॉलोनी
करीब ढाई दशक पहले मानकों को अनदेखा करके खन्नौत नदी के बिल्कुल किनारे तटबंध के पास एक कालोनी विकसित की गई। अब इसी कॉलोनी में कई माननीयों के आवास बने हैं। इसलिए कॉलोनी की वैधता को लेकर सरकारी सिस्टम भी कोई सवाल खड़े नहीं करता। एक दशक पहले खन्नौत में आई बाढ़ के दौरान कॉलोनी के तमाम मकान कई दिन तक पानी से घिरे रहे। अब इसी कॉलोनी के आसपास के तटीय इलाकों मेें भी धड़ल्ले से मकान बनाए जा रहे हैं।
अजीजगंज में गर्रा तटबंध तक पहुंची आबादी
गर्रा नदी के किनारे अजीजगंज को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध नहीं बनाया जाता तो लोग नदी के घाट पर कब्जा कर लेते। अब कुछ नहीं सूझ रहा तो वहां के लोगों ने पुराने हाईवे की पूर्व दिशा में नदी किनारे स्थित श्मशान भूमि के नजदीकी भूखंड खरीदकर मकान बना लिए। वर्ष 2011 में आई बाढ़ के दौरान नए मकान जलभराव में घिर गए। इसके बावजूद वहां पक्के निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लग सकी।
जियाखेल इलाके में विकसित हुआ बाला तिराही
गर्रा फाटक के नजदीक जियाखेल इलाके मेें घनी आबादी वाला बाला तिराही मोहल्ला नदी की तलहटी में होने के कारण गत एक दशक से बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। अब आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है इसलिए मोहल्ला धीरे-धीरे नदी तट की ओर बढ़ रहा है क्योंकि नए मकानों के लिए वहां कोई जगह नहीं बची है। मामूली बरसात में भी आसपास के नाले इतने उफना जाते हैं कि मोहल्ले की सड़कें नहर मेें बदल जाती हैं और वहां के बाशिंदों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
मकानों से घिरा बंका घाट का पश्चिमी तट
बिसरात रोड पर अंटा चौराहे से बंका घाट तक खन्नौत के पश्चिमी तट की जमीनों को मिट्टी से पाटकर कई भू माफिया ने कब्जा कर लिया और वहां मकानों के साथ व्यवसायिक उद्देश्य से तमाम पक्के निर्माण करा लिए। खास यह है कि आवास बनाने के लिए आसपास के खेत मालिकों से नदी तट के पास की जमीनों का मालिकाना हक लेकर आसपास की अन्य जमीनें भी कब्जाई जा रही है। प्रशासन से इसकी कई बार शिकायत भी हुई, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
विनियमित क्षेत्र कार्यालय की ओर से महानगर के सभी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर नजर रखने को लगातार सर्वे किया जा रहा है। तमाम लोगों को बीआरओ एक्ट के तहत नोटिस देकर उनके निर्माण कार्य रुकवाए गए हैं और नियमों का उल्लंघन होते पाए जाने पर विधिक कार्रवाई भी की जा चुकी है। नदी के आसपास की जमीनों पर अवैध रूप से कराए गए पक्के निर्माण कार्यों की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- विनीता सिंह, नियत प्राधिकारी (विनियमित क्षेत्र)/सिटी मजिस्ट्रेट