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रोजगारपरक शिक्षा से आधी आबादी बन सकेगी स्वावलंबी
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शाहजहांपुर के आर्य महिला महाविद्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित छात्राएं । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। छात्राओं का कहना है कि यदि उन्हें रोजगारपरक शिक्षा दी जाए, तो वह स्वावलंबी बनकर खुद के साथ समाज की तरक्की का रास्ता प्रशस्त कर सकती हैं। आज रोजगारपरक शिक्षा की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्र और राज्य सरकार का निरंतर प्रयास करना चाहिए।
आर्य महिला डिग्री कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम में यहां की छात्राओं ने अपने विचार रखे। कहा कि शिक्षा नीति ऐसी हो, जिससे आजीविका मिल सके। इस उद्देश्य को पूरा करने लिए नई शिक्षा नीति को लागू किया है। इसके बावजूद छात्राओं को रोजगारपरक शिक्षा नहीं मिल रही है। छात्राओं ने सरकार से छात्राओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
छात्र-छात्राओं का उद्देश्य मात्र डिग्रियां लेना ही नहीं होना चाहिए। इससे हमारा भविष्य कितना सुरक्षित होने की कोई गारंटी नहीं है। वहीं अगर हमें शुरुआत से ही रोजगारपरक शिक्षा प्रदान की जाए तो निश्चित ही भविष्य को लेकर चिंतित नहीं होना पड़ेगा। - मानसी
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आज भी हम रोजगारपरक शिक्षा से काफी दूर हैं। हालांकि सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू किया है, जिससे कुछ सुधार होने की संभावना है। वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ रोजगारपरक शिक्षा प्रदान किया जाना बहुत जरूरी है। - संजीवनी
छात्र-छात्राओं को वक्त के मुताबिक तैयार करना है, तो उन्हें अपनी भाषा में शिक्षा देनी होगी। प्रबंधन, इंजीनियरिंग, मेडिकल तथा कानून की शिक्षा को स्थानीय भाषा में विकसित करने की जरूरत है। इससे रोजगारपरक शिक्षा का उद्देश्य पूरा हो सकता है। - मनु वाजपेयी
मेरा मानना है कि आम तौर पर अंकों के प्रतिशत को छात्र-छात्राओं के बौद्धिक स्तर और रचनात्मकता का पैमाना माना जाता है, जो ठीक नहीं। यह सोच गलत है कि 12वीं में कम अंक लाने वाले छात्रों में रचनात्मकता नहीं होती। क्षमताएं सबमें होती है। - प्रगति
समस्या यह है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था रचनात्मक लोगों की मदद नहीं करती है। शिक्षा में रोजगार प्राप्त करने को मानव संसाधन तैयार करने होंगे। आधुनिक तकनीक, शोध को बढ़ावा और तकनीक की मदद से सामाजिक समस्याओं का हल तलाशना होगा। - प्रियंका वर्मा
आज के समय में शिक्षा के साथ कौशल का होना बहुत जरूरी है। छात्र-छात्राओं को प्राथमिक स्तर से ही शिक्षित करना होगा। इससे वह शिक्षा पूरी करने के बाद बिना किसी परेशानी के अपने पैरों पर खड़े हो सकें। देश और समाज की तरक्की में भूमिका निभा सकें। - कंचन राठौर
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आर्य महिला डिग्री कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम में यहां की छात्राओं ने अपने विचार रखे। कहा कि शिक्षा नीति ऐसी हो, जिससे आजीविका मिल सके। इस उद्देश्य को पूरा करने लिए नई शिक्षा नीति को लागू किया है। इसके बावजूद छात्राओं को रोजगारपरक शिक्षा नहीं मिल रही है। छात्राओं ने सरकार से छात्राओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
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छात्र-छात्राओं का उद्देश्य मात्र डिग्रियां लेना ही नहीं होना चाहिए। इससे हमारा भविष्य कितना सुरक्षित होने की कोई गारंटी नहीं है। वहीं अगर हमें शुरुआत से ही रोजगारपरक शिक्षा प्रदान की जाए तो निश्चित ही भविष्य को लेकर चिंतित नहीं होना पड़ेगा। - मानसी
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आज भी हम रोजगारपरक शिक्षा से काफी दूर हैं। हालांकि सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू किया है, जिससे कुछ सुधार होने की संभावना है। वर्तमान समय में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ रोजगारपरक शिक्षा प्रदान किया जाना बहुत जरूरी है। - संजीवनी
छात्र-छात्राओं को वक्त के मुताबिक तैयार करना है, तो उन्हें अपनी भाषा में शिक्षा देनी होगी। प्रबंधन, इंजीनियरिंग, मेडिकल तथा कानून की शिक्षा को स्थानीय भाषा में विकसित करने की जरूरत है। इससे रोजगारपरक शिक्षा का उद्देश्य पूरा हो सकता है। - मनु वाजपेयी
मेरा मानना है कि आम तौर पर अंकों के प्रतिशत को छात्र-छात्राओं के बौद्धिक स्तर और रचनात्मकता का पैमाना माना जाता है, जो ठीक नहीं। यह सोच गलत है कि 12वीं में कम अंक लाने वाले छात्रों में रचनात्मकता नहीं होती। क्षमताएं सबमें होती है। - प्रगति
समस्या यह है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था रचनात्मक लोगों की मदद नहीं करती है। शिक्षा में रोजगार प्राप्त करने को मानव संसाधन तैयार करने होंगे। आधुनिक तकनीक, शोध को बढ़ावा और तकनीक की मदद से सामाजिक समस्याओं का हल तलाशना होगा। - प्रियंका वर्मा
आज के समय में शिक्षा के साथ कौशल का होना बहुत जरूरी है। छात्र-छात्राओं को प्राथमिक स्तर से ही शिक्षित करना होगा। इससे वह शिक्षा पूरी करने के बाद बिना किसी परेशानी के अपने पैरों पर खड़े हो सकें। देश और समाज की तरक्की में भूमिका निभा सकें। - कंचन राठौर