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Shahjahanpur News: चालान और जागरूकता पर रहा जोर, सुधारे नहीं डेंजर जोन
Sat, 02 Dec 2023 12:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:21 AM IST
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निगोही में कैमुआ पुल पर संकेतक तक नहीं लगाए गए हैं। संवाद
शाहजहांपुर। यातायात माह में लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करने पर प्रशासन का जोर रहा लेकिन खुद की कमियों को दूर नहीं किया। जिम्मेदार स्कूलों में बच्चों को नियम सिखाते रहे और पूरे माह में 44 लोगों ने सड़क हादसे में जान गंवा दी। 41 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए। पुलिस का पूरा फोकस चालान पर रहा, जबकि डेंजर जोन के हालात में सुधार नहीं हुआ।
एक नवंबर से शुरू हुए यातायात माह का शुभारंभ डीएम उमेश प्रताप सिंह और एसपी अशोक कुमार ने खिरनीबाग रामलीला मैदान से किया था। उद्देश्य था कि लोग सुरक्षित सफर करें और हादसों में कमी आए। लोगों को समझाने और डेंजर जोन में सुधार लाने की कवायद भी की गई थी, लेकिन पूरे माह सिर्फ कांवेंट स्कूलों में आयोजन कर कक्षा एक से दस तक के बच्चों को जागरूक किया गया। डेंजर जोन की हालत में सुधार नहीं आया। पूर्व में चिह्नित 18 और वर्तमान नए सात डेंजर जोन के हालात पहले जैसे ही हैं। गत वर्षों की तरह वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने का काम नहीं किया गया। पुलिस ने पूरे महीने में 11577 लोगों के चालान किए हैंं। इसके विपरीत जिले में 88 हादसे हुए जिसमें 44 लोगाें की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए। जनवरी से अब तक 752 दुर्घटनाओं में 388 लोगों की जान गई। अमूमन एक महीने में औसतन 30 से 35 लोगों की हादसे में मौत होती है लेकिन यातायात माह में यह आंकड़ा 44 पहुंच गया।
25 डेंजर जोन के हालात काफी खराब
जिले में पूर्व में 18 डेंजर जोन चिह्नित किए गए थे। सात नए जोन बनाए गए। पहले बनाए गए डेंजर जोन में परावर्ती साइनेज बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, मार्ग चिह्न संकेतक व दुर्घटना बहुल क्षेत्र बोर्ड लगे होने का दावा किया जाता रहा। जबकि डेंजर जोन के हालात बिल्कुल ही अलग हैं। शहर में दुर्गा होटल के पास स्पीड ब्रेकर के नाम पर मात्र पीली पट्टी डाली गई। बोर्ड भी अब नजर नहीं आ रहा। इसी तरह रोजा में जमुका तिराहे पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। यहां भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। ब्लिंकर लाइट अवश्य लगी हैं, लेकिन ब्रेकर नहीं बने हुए हैं।
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निगोही में पुल शुरू पर नहीं हुआ कोई काम
-निगोही में कैमुआ पुल बनने के बाद यातायात का दबाव भी बढ़ गया। यह डेंजर जोन की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद भी यहां पर काेई काम नहीं किया गया। परावर्ती साइन व संकेतक तक नहीं हैं। ऐसे में हादसा होना आम बात हो गई। रात में हादसे होने का डर बना रहता है।
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नवंबर में इतने हुए चालान
3387 बिना हेलमेट
2845 आईटीएमएस की लाइन क्राॅस करने पर
1695 नाे-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने पर
47 मोबाइल चलाते समय वाहन चलाते हुए
1780 बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर चालान हुए
154 वाहनों के बिना नंबर प्लेट के हाेने पर चालान काटा।
291 बिना सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाते हुए।
473 बाइकों पर तीन सवारी बैठाकर चलाने पर।
120 वाहनों के चालान प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होने पर किए।
28 वाहनों के चालान प्रेशर हार्न के चलते किए गए।
42 बड़े वाहनों के चालान काली फिल्म पर हुए।
15 वाहन चालक शराब पीकर गाड़ी चलाते मिलने पर चालान हुए।
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-डेंजर जोन में सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को नोडल बनाया गया है। चीनी मिलों में आने वालीं ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर लगाने के लिए अभियान चल रहा है। कार्यालय में बिना रिफ्लेक्टर पट्टी के किसी वाहन की फिटनेस नहीं की जाती है।
शांतिभूषण पांडेय, एआरटीओ
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हादसों को रोकने के लिए डेंजर जोन को सही कराया गया। साइन बोर्ड व अन्य व्यवस्थाओं को दुरस्त कराया गया। जहां पर कमियां हैं, उसके लिए पत्राचार कर सही कराया जाएगा।
सुधीर जायसवाल, एसपी सिटी
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एक नवंबर से शुरू हुए यातायात माह का शुभारंभ डीएम उमेश प्रताप सिंह और एसपी अशोक कुमार ने खिरनीबाग रामलीला मैदान से किया था। उद्देश्य था कि लोग सुरक्षित सफर करें और हादसों में कमी आए। लोगों को समझाने और डेंजर जोन में सुधार लाने की कवायद भी की गई थी, लेकिन पूरे माह सिर्फ कांवेंट स्कूलों में आयोजन कर कक्षा एक से दस तक के बच्चों को जागरूक किया गया। डेंजर जोन की हालत में सुधार नहीं आया। पूर्व में चिह्नित 18 और वर्तमान नए सात डेंजर जोन के हालात पहले जैसे ही हैं। गत वर्षों की तरह वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने का काम नहीं किया गया। पुलिस ने पूरे महीने में 11577 लोगों के चालान किए हैंं। इसके विपरीत जिले में 88 हादसे हुए जिसमें 44 लोगाें की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए। जनवरी से अब तक 752 दुर्घटनाओं में 388 लोगों की जान गई। अमूमन एक महीने में औसतन 30 से 35 लोगों की हादसे में मौत होती है लेकिन यातायात माह में यह आंकड़ा 44 पहुंच गया।
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25 डेंजर जोन के हालात काफी खराब
जिले में पूर्व में 18 डेंजर जोन चिह्नित किए गए थे। सात नए जोन बनाए गए। पहले बनाए गए डेंजर जोन में परावर्ती साइनेज बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, मार्ग चिह्न संकेतक व दुर्घटना बहुल क्षेत्र बोर्ड लगे होने का दावा किया जाता रहा। जबकि डेंजर जोन के हालात बिल्कुल ही अलग हैं। शहर में दुर्गा होटल के पास स्पीड ब्रेकर के नाम पर मात्र पीली पट्टी डाली गई। बोर्ड भी अब नजर नहीं आ रहा। इसी तरह रोजा में जमुका तिराहे पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। यहां भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। ब्लिंकर लाइट अवश्य लगी हैं, लेकिन ब्रेकर नहीं बने हुए हैं।
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निगोही में पुल शुरू पर नहीं हुआ कोई काम
-निगोही में कैमुआ पुल बनने के बाद यातायात का दबाव भी बढ़ गया। यह डेंजर जोन की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद भी यहां पर काेई काम नहीं किया गया। परावर्ती साइन व संकेतक तक नहीं हैं। ऐसे में हादसा होना आम बात हो गई। रात में हादसे होने का डर बना रहता है।
नवंबर में इतने हुए चालान
3387 बिना हेलमेट
2845 आईटीएमएस की लाइन क्राॅस करने पर
1695 नाे-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने पर
47 मोबाइल चलाते समय वाहन चलाते हुए
1780 बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर चालान हुए
154 वाहनों के बिना नंबर प्लेट के हाेने पर चालान काटा।
291 बिना सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाते हुए।
473 बाइकों पर तीन सवारी बैठाकर चलाने पर।
120 वाहनों के चालान प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होने पर किए।
28 वाहनों के चालान प्रेशर हार्न के चलते किए गए।
42 बड़े वाहनों के चालान काली फिल्म पर हुए।
15 वाहन चालक शराब पीकर गाड़ी चलाते मिलने पर चालान हुए।
-डेंजर जोन में सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को नोडल बनाया गया है। चीनी मिलों में आने वालीं ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर लगाने के लिए अभियान चल रहा है। कार्यालय में बिना रिफ्लेक्टर पट्टी के किसी वाहन की फिटनेस नहीं की जाती है।
शांतिभूषण पांडेय, एआरटीओ
हादसों को रोकने के लिए डेंजर जोन को सही कराया गया। साइन बोर्ड व अन्य व्यवस्थाओं को दुरस्त कराया गया। जहां पर कमियां हैं, उसके लिए पत्राचार कर सही कराया जाएगा।
सुधीर जायसवाल, एसपी सिटी

निगोही में कैमुआ पुल पर संकेतक तक नहीं लगाए गए हैं। संवाद