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आपात कटौती से अंधेरे में डूबा शहर
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 12 Jun 2015 09:06 PM IST
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विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के विरोध के बावजूद पॉवर कॉरपोरेशन का सिस्टम कंट्रोल आधी रात को आपात बिजली कटौती पर आमादा है। बृहस्पतिवार को यही हुआ। आधी रात के बाद इमर्जेंसी रोस्टरिंग के नाम पर सारे फीडर बंद कर दिए जाने से शहर शुक्रवार को तड़के दिन निकलने से पहले तक अंधेरे में डूबा रहा। इससे उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल मिश्रा गुट के व्यापारी भड़क उठे। संगठन के पदाधिकारी कलक्ट्रेट जाकर डीएम से मिले और बिजली कटौती पर विरोध दर्ज कराकर सप्लाई में सुधार की मांग दोहराई।
बिजली विभाग ने एक साल पहले रोजाना नौ घंटे की नियमित कटौती का रोस्टर बनाया था। इसका लोगों ने विरोध किया, लेकिन कटौती अवधि कम नहीं हुई। अब आधी रात में तीन से चार घंटे की आपात कटौती से जनता में हाहाकार मचा है। सारा दिन भीषण गर्मी में गुजारने के बाद शहरी बाशिंदों को रात में चैन की नींद भी नहीं मिल पा रही है। खास यह है कि विभाग अपने स्तर से तय किए कटौती शेड्यूल का पालन नहीं कर पा रहा है।
बृहस्पतिवार को आधी रात के बाद से यही हुआ। रात करीब एक बजे लखनऊ सिस्टम कंट्रोल के मेसेज पर पैना ट्रांसमिशन सब स्टेशन से शहर के सभी बिजली उपकेंद्रों को बिजली सप्लाई रोक दी गई। सारे फीडर बंद हुए तो शहर अंधेरे में डूब गया। इससे दिन के थके हारे लोगों की नींद टूट गई और उन्हें कमरे छोड़कर छत पर भागना पड़ा। बिजली सप्लाई तड़के पांच बजे बहाल हुई। दिन में भी मनमाने तरीके से बिजली काटी गई।
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सुबह छह से आठ बजे तक कटौती अवधि में बिजली दी गई, लेकिन दोपहर दो बजे बिजली सप्लाई मिलने की अवधि में फिर एक घंटे की कटौती थोप दी गई। मनमाने तरीके से बिजली कटौती किए जाने के विरोध में मिश्रा गुट के पदाधिकारी जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ के नेतृत्व में डीएम से मिले और कटौती में कमी कराने की मांग दोहराई। जिलाध्यक्ष ने डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि रात में सभी ऑफिस, मार्केट, फैक्ट्री आदि बंद रहने पर आधी रात को कटौती किए जाने का औचित्य समझ नहीं आ रहा।
व्यापारियों ने डीएम से नियमित कटौती नौ के बजाय सात घंटे कराने और आधी रात को होने वाली कटौती से छुटकारा दिलाए जाने की मांग की। डीएम ने वहीं मौजूद एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव को निर्देश दिया कि पॉवर कॉरपोरेशन के अधीक्षण अभियंता और एक्सईएन को बुलाकर समस्या का समाधान कराएं। शिष्टमंडल में धर्मपाल रैना, ललित खुराना, सुनील गुप्ता, नीरज गुप्ता, चंद्रप्रकाश गुलाटी, जवाहर रस्तोगी, राजीव कमरा, दीपक गुप्ता, सुरेंद्र सेठी, मो. रफी आदि शामिल रहे।
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बिजली विभाग ने एक साल पहले रोजाना नौ घंटे की नियमित कटौती का रोस्टर बनाया था। इसका लोगों ने विरोध किया, लेकिन कटौती अवधि कम नहीं हुई। अब आधी रात में तीन से चार घंटे की आपात कटौती से जनता में हाहाकार मचा है। सारा दिन भीषण गर्मी में गुजारने के बाद शहरी बाशिंदों को रात में चैन की नींद भी नहीं मिल पा रही है। खास यह है कि विभाग अपने स्तर से तय किए कटौती शेड्यूल का पालन नहीं कर पा रहा है।
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बृहस्पतिवार को आधी रात के बाद से यही हुआ। रात करीब एक बजे लखनऊ सिस्टम कंट्रोल के मेसेज पर पैना ट्रांसमिशन सब स्टेशन से शहर के सभी बिजली उपकेंद्रों को बिजली सप्लाई रोक दी गई। सारे फीडर बंद हुए तो शहर अंधेरे में डूब गया। इससे दिन के थके हारे लोगों की नींद टूट गई और उन्हें कमरे छोड़कर छत पर भागना पड़ा। बिजली सप्लाई तड़के पांच बजे बहाल हुई। दिन में भी मनमाने तरीके से बिजली काटी गई।
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सुबह छह से आठ बजे तक कटौती अवधि में बिजली दी गई, लेकिन दोपहर दो बजे बिजली सप्लाई मिलने की अवधि में फिर एक घंटे की कटौती थोप दी गई। मनमाने तरीके से बिजली कटौती किए जाने के विरोध में मिश्रा गुट के पदाधिकारी जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ के नेतृत्व में डीएम से मिले और कटौती में कमी कराने की मांग दोहराई। जिलाध्यक्ष ने डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि रात में सभी ऑफिस, मार्केट, फैक्ट्री आदि बंद रहने पर आधी रात को कटौती किए जाने का औचित्य समझ नहीं आ रहा।
व्यापारियों ने डीएम से नियमित कटौती नौ के बजाय सात घंटे कराने और आधी रात को होने वाली कटौती से छुटकारा दिलाए जाने की मांग की। डीएम ने वहीं मौजूद एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव को निर्देश दिया कि पॉवर कॉरपोरेशन के अधीक्षण अभियंता और एक्सईएन को बुलाकर समस्या का समाधान कराएं। शिष्टमंडल में धर्मपाल रैना, ललित खुराना, सुनील गुप्ता, नीरज गुप्ता, चंद्रप्रकाश गुलाटी, जवाहर रस्तोगी, राजीव कमरा, दीपक गुप्ता, सुरेंद्र सेठी, मो. रफी आदि शामिल रहे।