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कोरोना पर भारी पंचायत चुनाव, 74 फीसदी मतदान
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फोटो: 01, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08
टकराव की छिटपुट घटनाओं के बीच कड़ी सुरक्षा में पड़े वोट
पंचायत चुनाव के मतदान को लेकर दिखा भारी उत्साह, सुबह से बूथों पर वोटरों की लगीं कतारें
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ। ग्रामीणों में गांव की सरकार बनाने को लेकर सुबह से उत्साह दिखा। मतदान शुरू होने के कुछ देर बाद से ही बूथों पर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। हालांकि कतारों में खड़े मतदाता कोविड-19 गाइड लाइन का अनुपालन न करते हुए सामाजिक दूरी से पूरी तरह बेपरवाह दिखे। इस बीच डीएम इंद्र विक्रम सिंह और एसपी एस आनंद ने ददरौल ब्लॉॅक के बूथों का भ्रमण कर निर्वाचन कार्मिकों को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से मतदान कराने के निर्देश दिए। शाम पांच बजे तक 65.5 प्रतिशत मतदान हो गया।
छह ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के प्रत्याशियों के निधन के कारण उन सभी ग्राम पंचायतों को छोड़कर शेष 1063 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के 7696, जिला पंचायत के 47 वार्डों से सदस्य पद के 781 और 15 क्षेत्र पंचायतों के 1169 बीडीसी पदों के लिए 5275 उम्मीदवारों का भाग्य मतपेटिकाओं में बंद हो गया। मतदान को लेकर सुबह से ही गांवों में उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाएं चौका-चूल्हा छोड़कर सुबह सात बजे से वोट डालने अपने बूथों पर पहुंचने लगीं। नौ बजे तक अधिकतर बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें दिखने लगीं। हालांकि, मतदान की शुरुआत धीमी गति से हुई। दिन में 11 बजे तक शुरुआती चार घंटे में सिर्फ 12 प्रतिशत मतदान हुआ।
एक साथ चार पदों के लिए बैलेट पद्धति से मतदान होने के कारण पोलिंग पार्टियों को एक-एक मतदाता को चार-चार मतपत्र मोड़कर देने में काफी वक्त लगा। इस बीच, धूप ने तेजी पकड़ी और गर्मी बढ़ी तो बूथों पर कतारों की लंबाई भी कम होने लगी। इस बीच, महिलाओं ने रसोई की जिम्मेदारी संभाली तो बूथों पर उनकी संख्या कम होने लगी, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद से उन्होंने भी घर से निकलना शुरू कर दिया। अपरान्ह तीन बजे तक पुरुषों के अलावा महिला वोटरों की कतारें फिर से बढ़ने लगीं जो तमाम ग्राम पंचायतों में मतदान अवधि पूरी होने तक जस की तस कायम रहीं। अपवाद के तौर पर कुछ बूथों पर तेज गति से मतदान की शुरुआत हुई। हथौड़ा बुजुर्ग के संविलियन स्कूल में बनाए गए बूथ संख्या 119 पर 689 में से 115 लोग वोट डाल चुके थे।
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इस बूथ के पीठासीन अधिकारी संजीव मिश्रा से लेकर मतदान अधिकारी नामित अन्य कर्मचारी वहां पेयजल, चाय, भोजन आदि की कोई व्यवस्था नहीं होने से खफा दिखे। वहां ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों के लिए थाने से भोजन पैकेट भेजे गए, लेकिन पोलिंग पार्टियों के बाकी सदस्य भूख-प्यासे बेहाल दिखे। हथौड़ा बुजुर्ग-अटसलिया मार्ग से निकले जानकीनगर के लिंक रोड पर करीब 500 मीटर चलने के बाद वहां के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए मतदान केंद्र पहुंचने पर वहां के तीनों बूथों पर मतदाता अपनी बारी की प्रतीक्षा में कतारों में खड़े दिखे। दिन में 11 बजे तक वहां के बूथ क्रमांक 160 पर 833 में 150 मतदाता वोट डाल चुके थे।
भावलखेड़ा ब्लॉॅक की बल्लिया ग्राम पंचायत के प्राइमरी स्कूल में सात बूथ बनाए जाने से वहां दोपहर 12 बजे मतदाताओं का मेला लगा दिखाई दिया। इनमें तमाम ऐसे लोग भी थे जो मास्क और सामाजिक दूरी से पूरी तरह बेपरवाह रहे। कइयों ने अपने मास्क नीचे खिसका रखे थे। दोपहर 12:30 बजे तक रौसर गांव के तीन और दनियापुर के चार बूथों पर वोटरों की कतारें दिखने के बावजूद 15 प्रतिशत से ज्यादा मतदान नहीं हो सका। आसपास के जमुही, जमुका, रानापुर, बिलंदापुर, निघोना आदि ग्राम पंचायतों में दोपहर 12 बजे तक मतदान की गति शिथिल रही, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद उसमेें तेजी आ गई।
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नियामतपुर के बूथ पर प्रत्याशियों के समर्थकों में मारपीट
0 मौके पर पहुंचे अधिकारी, प्रेक्षक से पुनर्मतदान की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। भावलखेड़ा ब्लॉॅक में भाजपा का गढ़ कही जाने वाली वीआईपी ग्राम पंचायत नियामतपुर के बूथ पर मतदान शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही प्रधानी के दो उम्मीदवारों के समर्थकों में वोट डालने को लेकर मारपीट शुरू हो गई। जानकारी पाकर उप जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत)/ एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी और एएसपी ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे, लेकिन तब तक वहां शांति छा चुकी थी। बाद में प्रधानी के उम्मीदवार शिवरतन मौर्य ने निर्वाचन प्रेक्षक देवेंद्र कुमार सिंह से मामले की शिकायत कर मतदान निरस्त कराने के साथ दोबारा निष्पक्ष मतदान कराने की गुहार लगाई है।
बता दें कि शिवरतन ने गत 19 अप्रैल को भी राज्य निर्वाचन आयोग समेत मुख्यमंत्री और डीएम को पत्र देकर मतदान में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए गांव के बूथ पर सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए जाने की मांग की थी। यह वही शिवरतन हैं, जिनके गांव बिजली खेड़ा के 77 मतदाताओं के नाम गायब कर दिए थे। बाद में उनकी शिकायत पर हुई जांच के बाद उन समेत सभी मतदाताओं की संशोधित सूची जारी हुई और इसी सूची के आधार पर शिवरतन ने अपना और अपने बेटे ओमकार का प्रधान पद के लिए नामांकन कराया था।
उन्होंने आयोग को भेजे प्रार्थना पत्र में प्रधान पद के एक प्रत्याशी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा है कि गांव के मतदान केंद्र संख्या 19 के बूथ क्रमांक 39 पर मतदान शुरू होने के बाद विरोधी उम्मीदवार और उनके समर्थकों ने मतदाताओं से जबरन वोट डलवाने शुरू कर दिए। विरोध करने पर प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के समर्थकों और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके पोलिंग एजेंटों और समर्थकों को लात-घूसों से पीटा। हमलावर हुए लोगों ने उनके समर्थकों और एजेंटों के मोबाइल फोन छीनकर उन्हें बूथ से भगा दिया। यही नहीं, उनके बेटे (प्रधान प्रत्याशी) ओमकार को पकड़कर सिंधौली थाने में बंद करा दिया।
मामले की छानबीन कर नियामतपुर से लौटे एडीएम फाइनेंस ने बताया कि वह प्रत्याशी के समर्थकों से मारपीट की शिकायत मिलने पर एएसपी सिटी के साथ नियामतपुर प्राथमिक पाठशाला के मतदान केंद्र पर पहुंचे, लेकिन वहां शांतिपूर्ण तरीके से मतदान होता मिला। एडीएम के अनुसार वह वहां लगभग आधा घंटा रुके रहे। इस दौरान अन्य कई प्रत्याशियों के मौजूद मिले मतदान अभिकर्ताओं से भी मारपीट की कथित घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन सभी लोग खामोश रहे और कोई कुछ नहीं बोला।
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टकराव की छिटपुट घटनाओं के बीच कड़ी सुरक्षा में पड़े वोट
पंचायत चुनाव के मतदान को लेकर दिखा भारी उत्साह, सुबह से बूथों पर वोटरों की लगीं कतारें
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ। ग्रामीणों में गांव की सरकार बनाने को लेकर सुबह से उत्साह दिखा। मतदान शुरू होने के कुछ देर बाद से ही बूथों पर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। हालांकि कतारों में खड़े मतदाता कोविड-19 गाइड लाइन का अनुपालन न करते हुए सामाजिक दूरी से पूरी तरह बेपरवाह दिखे। इस बीच डीएम इंद्र विक्रम सिंह और एसपी एस आनंद ने ददरौल ब्लॉॅक के बूथों का भ्रमण कर निर्वाचन कार्मिकों को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से मतदान कराने के निर्देश दिए। शाम पांच बजे तक 65.5 प्रतिशत मतदान हो गया।
छह ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के प्रत्याशियों के निधन के कारण उन सभी ग्राम पंचायतों को छोड़कर शेष 1063 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के 7696, जिला पंचायत के 47 वार्डों से सदस्य पद के 781 और 15 क्षेत्र पंचायतों के 1169 बीडीसी पदों के लिए 5275 उम्मीदवारों का भाग्य मतपेटिकाओं में बंद हो गया। मतदान को लेकर सुबह से ही गांवों में उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाएं चौका-चूल्हा छोड़कर सुबह सात बजे से वोट डालने अपने बूथों पर पहुंचने लगीं। नौ बजे तक अधिकतर बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें दिखने लगीं। हालांकि, मतदान की शुरुआत धीमी गति से हुई। दिन में 11 बजे तक शुरुआती चार घंटे में सिर्फ 12 प्रतिशत मतदान हुआ।
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एक साथ चार पदों के लिए बैलेट पद्धति से मतदान होने के कारण पोलिंग पार्टियों को एक-एक मतदाता को चार-चार मतपत्र मोड़कर देने में काफी वक्त लगा। इस बीच, धूप ने तेजी पकड़ी और गर्मी बढ़ी तो बूथों पर कतारों की लंबाई भी कम होने लगी। इस बीच, महिलाओं ने रसोई की जिम्मेदारी संभाली तो बूथों पर उनकी संख्या कम होने लगी, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद से उन्होंने भी घर से निकलना शुरू कर दिया। अपरान्ह तीन बजे तक पुरुषों के अलावा महिला वोटरों की कतारें फिर से बढ़ने लगीं जो तमाम ग्राम पंचायतों में मतदान अवधि पूरी होने तक जस की तस कायम रहीं। अपवाद के तौर पर कुछ बूथों पर तेज गति से मतदान की शुरुआत हुई। हथौड़ा बुजुर्ग के संविलियन स्कूल में बनाए गए बूथ संख्या 119 पर 689 में से 115 लोग वोट डाल चुके थे।
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भावलखेड़ा ब्लॉॅक की बल्लिया ग्राम पंचायत के प्राइमरी स्कूल में सात बूथ बनाए जाने से वहां दोपहर 12 बजे मतदाताओं का मेला लगा दिखाई दिया। इनमें तमाम ऐसे लोग भी थे जो मास्क और सामाजिक दूरी से पूरी तरह बेपरवाह रहे। कइयों ने अपने मास्क नीचे खिसका रखे थे। दोपहर 12:30 बजे तक रौसर गांव के तीन और दनियापुर के चार बूथों पर वोटरों की कतारें दिखने के बावजूद 15 प्रतिशत से ज्यादा मतदान नहीं हो सका। आसपास के जमुही, जमुका, रानापुर, बिलंदापुर, निघोना आदि ग्राम पंचायतों में दोपहर 12 बजे तक मतदान की गति शिथिल रही, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद उसमेें तेजी आ गई।
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नियामतपुर के बूथ पर प्रत्याशियों के समर्थकों में मारपीट
0 मौके पर पहुंचे अधिकारी, प्रेक्षक से पुनर्मतदान की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। भावलखेड़ा ब्लॉॅक में भाजपा का गढ़ कही जाने वाली वीआईपी ग्राम पंचायत नियामतपुर के बूथ पर मतदान शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही प्रधानी के दो उम्मीदवारों के समर्थकों में वोट डालने को लेकर मारपीट शुरू हो गई। जानकारी पाकर उप जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत)/ एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी और एएसपी ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे, लेकिन तब तक वहां शांति छा चुकी थी। बाद में प्रधानी के उम्मीदवार शिवरतन मौर्य ने निर्वाचन प्रेक्षक देवेंद्र कुमार सिंह से मामले की शिकायत कर मतदान निरस्त कराने के साथ दोबारा निष्पक्ष मतदान कराने की गुहार लगाई है।
बता दें कि शिवरतन ने गत 19 अप्रैल को भी राज्य निर्वाचन आयोग समेत मुख्यमंत्री और डीएम को पत्र देकर मतदान में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए गांव के बूथ पर सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए जाने की मांग की थी। यह वही शिवरतन हैं, जिनके गांव बिजली खेड़ा के 77 मतदाताओं के नाम गायब कर दिए थे। बाद में उनकी शिकायत पर हुई जांच के बाद उन समेत सभी मतदाताओं की संशोधित सूची जारी हुई और इसी सूची के आधार पर शिवरतन ने अपना और अपने बेटे ओमकार का प्रधान पद के लिए नामांकन कराया था।
उन्होंने आयोग को भेजे प्रार्थना पत्र में प्रधान पद के एक प्रत्याशी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा है कि गांव के मतदान केंद्र संख्या 19 के बूथ क्रमांक 39 पर मतदान शुरू होने के बाद विरोधी उम्मीदवार और उनके समर्थकों ने मतदाताओं से जबरन वोट डलवाने शुरू कर दिए। विरोध करने पर प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के समर्थकों और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके पोलिंग एजेंटों और समर्थकों को लात-घूसों से पीटा। हमलावर हुए लोगों ने उनके समर्थकों और एजेंटों के मोबाइल फोन छीनकर उन्हें बूथ से भगा दिया। यही नहीं, उनके बेटे (प्रधान प्रत्याशी) ओमकार को पकड़कर सिंधौली थाने में बंद करा दिया।
मामले की छानबीन कर नियामतपुर से लौटे एडीएम फाइनेंस ने बताया कि वह प्रत्याशी के समर्थकों से मारपीट की शिकायत मिलने पर एएसपी सिटी के साथ नियामतपुर प्राथमिक पाठशाला के मतदान केंद्र पर पहुंचे, लेकिन वहां शांतिपूर्ण तरीके से मतदान होता मिला। एडीएम के अनुसार वह वहां लगभग आधा घंटा रुके रहे। इस दौरान अन्य कई प्रत्याशियों के मौजूद मिले मतदान अभिकर्ताओं से भी मारपीट की कथित घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन सभी लोग खामोश रहे और कोई कुछ नहीं बोला।