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पंचायत चुनाव : परदेसियों की आई याद, बुलाने को आजमा रहे हर दांव
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शाहजहांपुर। पंचायत चुनाव लड़ रहे संभावित प्रत्याशियों के बीच में अपने वोटर को बाहर से बुलाने की होड़ मची है। इसके लिए वाहन भेजने और वोटरों के बैंक एकाउंट में रुपये डालने की कोशिश में हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से बाहर काम करने वाले लोग अपने घर आना चाहते हैं।
जिले के तमाम लोग दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात के साथ कई अन्य प्रदेशों में मजदूरी या अन्य काम-धंधा कर जीवन यापन करते हैं। साल में एक या दो बार ही ये लोग अपने गांव आ पाते हैं। अधिकतर लोग ऐसे हैं जो पत्नी-बच्चों समेत बाहर रहते हैं। गांव आने-जाने में हजारों रुपये सिर्फ किराये पर खर्च हो जाते हैं। सीमित आय और संसाधन के बीच उनका सिर्फ पंचायत चुनाव में वोट डालने के लिए आना संभव नहीं हो पाता। प्रधानी और जिला पंचायती का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशी एक-एक वोट की कीमत जानते हैं। कम वोटर संख्या का चुनाव होने के कारण एक वोट भी कई बार हार-जीत तय कर देता है। यही वजह है कि बाहर रहकर काम करने वालों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग संपर्क में हैं। वोट डालने के लिए आने में खर्च का झंझट निपटाने में पूरा सहयोग का आश्वासन दे रहे हैं। जहां पर वोटर संख्या ज्यादा है, वहां पर निजी खर्चे पर वाहन भेजने का आश्वासन भी दे रहे हैं। किराये का वाहन लेकर आने पर किराया चुकाने का वादा कर रहे हैं। चुनाव के दौरान कार्यक्षेत्र में मजदूरी के होने वाले नुकसान की भरपाई का भी आश्वासन दिया जा रहा है।
जलालाबाद तहसील क्षेत्र में गांव यकूबपुर निवासी ग्रामीण ने बताया कि गांव से बाहर रोजगार के लिए गये वोटरों की लिस्ट प्रत्याशियों ने बनाना शुरू कर दी है। उनसे संपर्क भी कर रहे हैं। प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक संभावित प्रत्याशी ने बताया कि यह तो हर पंचायत चुनाव में होता है। हम सिर्फ चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं। यह तो वोटर पर निर्भर करता है कि वह मतदान केंद्र में किसे वोट दे। गरीब मतदाता महज रुपये के अभाव में वोट डालने से वंचित रह जाए, यह भी ठीक नहीं।
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जिले के तमाम लोग दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात के साथ कई अन्य प्रदेशों में मजदूरी या अन्य काम-धंधा कर जीवन यापन करते हैं। साल में एक या दो बार ही ये लोग अपने गांव आ पाते हैं। अधिकतर लोग ऐसे हैं जो पत्नी-बच्चों समेत बाहर रहते हैं। गांव आने-जाने में हजारों रुपये सिर्फ किराये पर खर्च हो जाते हैं। सीमित आय और संसाधन के बीच उनका सिर्फ पंचायत चुनाव में वोट डालने के लिए आना संभव नहीं हो पाता। प्रधानी और जिला पंचायती का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशी एक-एक वोट की कीमत जानते हैं। कम वोटर संख्या का चुनाव होने के कारण एक वोट भी कई बार हार-जीत तय कर देता है। यही वजह है कि बाहर रहकर काम करने वालों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग संपर्क में हैं। वोट डालने के लिए आने में खर्च का झंझट निपटाने में पूरा सहयोग का आश्वासन दे रहे हैं। जहां पर वोटर संख्या ज्यादा है, वहां पर निजी खर्चे पर वाहन भेजने का आश्वासन भी दे रहे हैं। किराये का वाहन लेकर आने पर किराया चुकाने का वादा कर रहे हैं। चुनाव के दौरान कार्यक्षेत्र में मजदूरी के होने वाले नुकसान की भरपाई का भी आश्वासन दिया जा रहा है।
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जलालाबाद तहसील क्षेत्र में गांव यकूबपुर निवासी ग्रामीण ने बताया कि गांव से बाहर रोजगार के लिए गये वोटरों की लिस्ट प्रत्याशियों ने बनाना शुरू कर दी है। उनसे संपर्क भी कर रहे हैं। प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक संभावित प्रत्याशी ने बताया कि यह तो हर पंचायत चुनाव में होता है। हम सिर्फ चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं। यह तो वोटर पर निर्भर करता है कि वह मतदान केंद्र में किसे वोट दे। गरीब मतदाता महज रुपये के अभाव में वोट डालने से वंचित रह जाए, यह भी ठीक नहीं।
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